प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ
(प्रत्येक प्रियतमा अपने प्रियतम की छवि होती है, अपने प्रियतम में सागर की जल धारा बनकर संग -संग चलती है, इसी संदर्भ में प्रस्तुत है – “प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ “)
प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ
तुम जहाँ चले मैं हूँ वहाँ
तुम जो गहरा सागर विशाल
मैं तुमसे मिलती जल की धार
हृदय तुम्हारा अनंत असार
मैं उठती उसमें लहर सितार
तुम बदरा के गहराते घन
मैं तुझ में व्याप्त बन बूँद साकार
तुम चले दिशा अनंत विस्तार
मैं बनी हवा तुम संग संसार
तुम उपवन से भरे बिखरते
मैं समा रही बन तंतु आकार
सुरभित फूलों से जो रंगाकार
खुशबू तुम्हारी काम मैं आधार
तुम सूर्य से उदित आकाश
मैं फैली बन किरणों का जाल
तुम कमल दल श्वेत वितान
मैं जुड़ी रहूं बन तुझमें नाल
तुम पूर्णमासी के पूर्ण चंद्रमा
मैं शीतलता बनी पंख पसार
घटते बढ़ते तुम पाते पार
सिमटती तुझमें ले रूप आकर
तुम पर्वत सम कठोर समान
मैं नदी बन भेदती बन हृदय हार
चोटियां तेरी गगन विस्तार
हिम बन बरसती मैं हर बार
तुम वसुधा वत्सल दामन
मैं बीज तेरा गर्भ संसार
जीवनदायी देते तुम सब रस
बन पौध मैं फूटी लघुकार
प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ
तुम जहाँ चले मैं हूँ वहाँ
कवयित्री परिचय –
मीनाक्षी डबास “मन”
प्रवक्ता (हिन्दी)
राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार, शिक्षा निदेशालय ,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली भारत
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माता -पिता – श्रीमती राजबाला श्री कृष्ण कुमार
प्रकाशित रचनाएं – घना कोहरा, रिमझिम मोबाइल देवता,4 नया सवेरा (हाईकू), 5 बादल, 6 मेरी सहेलियां भाग -1, 7 शब्द संसार, 8 मेरी सहेलियां भाग- 2, 9 पगडंडियां, 10 मजदूरों की मजदूरी, 11 सीढ़ी, 12 धागा, 13 स्त्रियों के बाल, 14 रेखाओं में मजदूर, 15 वीर राणा प्रताप, 16 भारत के पूत, 17 नवजीवन वरदान, 18 कोरोना काल, 19 गढ़वाल राइफल का वीर 20 मृग तृष्णा,21 बन शक्ति,22 शाख से छूटा पत्ता,23 लो थाम प्रिय, 24 बेटी, 25 मुझे उस ओर जाना है, 26 कौन हो तुम, 27 प्रिय छवि, 28 कुछ कोलाब, 29 मेरे राम, 30कौन दिसा के वासी तुम?,31 अरमानों की गाँठें,32नेता जी
उद्देश्य – सरकारी कार्यालयों में कामकाज की प्राथमिक भाषा बनाने हेतु हिंदी का प्रचार – प्रसार
Last Updated on May 25, 2021 by mds.jmd
- मीनाक्षी डबास "मन"
- प्रवक्ता- हिन्दी
- शिक्षा निदेशालय ,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली भारत
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- राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार, शिक्षा निदेशालय ,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली भारत








1 thought on “प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ”
बहुत ही सुंदर कविताएं मीनाक्षी डबास द्वारा रचित