न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

तब गांव हमें अपनाता है…!!!

Spread the love
image_pdfimage_print

रचना शीर्षक : “तब गांव हमें अपनाता है…!!!”
__________________________________

ग्रामीण भाव की धारा में,
जब शहर कोई बह जाता है,
शहरी होने का दंभ हृदय से,
मिट्टी सा बन रह जाता है,

तब गांव हमें अपनाता है…!
तब गांव हमें अपनाता है…!!

संघार गांव का कर कर के,
हर रोज़ शहर की नींव धरी,
ईंटों की ऊंची दीवारों से,
कैसे हो पृथ्वी हरी भरी,

जब शहर श्रेष्ठ और गांव तुच्छ,
का भूत उतर सा जाता है,
तब गांव हमें अपनाता है…!
तब गांव हमें अपनाता है…!!

सब बड़े हुए और शहर गए,
वो बूढ़ा कैसे प्रस्थान करे,
जन्म भूमि की माया में बंध,
कैसे उसका अपमान करे,

शहरी बेटा बूढ़े मन को,
जब सहज भाव पढ़ पाता है,
तब गांव हमें अपनाता है…!
तब गांव हमें अपनाता है…!!

वो मिट्टी में है सबल बना,
तुम चिकने पत्थर पर फिसल रहे,
ईश्वर प्रदत्त संसाधन छोड़,
भौतिकता में बस विकल रहे,

उस निर्बल अन्नदाता की खातिर,
जब सम्मान ज़रा बढ़ जाता है,
तब गांव हमें अपनाता है…!
तब गांव हमें अपनाता है…!!

बाबू जी का प्रेम छोड़,
मम्मी डैडी वो सीख रहा,
सभ्य समाज की आशा में,
एकल स्वभाव सा दीख रहा,

सम्मानजनक भाषा का ज्ञान,
जब शहरी बेटा कर जाता है,
तब गांव हमें अपनाता है…!
तब गांव हमें अपनाता है…!!

सादर,
🙏😊

Last Updated on January 22, 2021 by rtiwari02

  • ऋषि देव तिवारी
  • सहायक प्रबंधक
  • भारतीय स्टेट बैंक
  • [email protected]
  • L-4, NAI BASTI RAMAI PATTI MIRZAPUR UTTAR PRADESH INDIA PIN 231001
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

प्रतीकात्मक छवि

साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम है यह सम्मेलन-डॉ विकास दवे

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम

प्रतीकात्मक छवि

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा साहित्यिक पत्रिकाओं

प्रतीकात्मक छवि

जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श – डॉ. शैलेश शुक्ला

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के

Leave a Comment

error: Content is protected !!