“मेरे भी सपने हैं “
“मेरे भी सपने हैं”नारी हूं मैं वस्तु नहीं मेरे भी सपने हैं।जननी हूं मैं सृष्टि कीनवजीवन मुझसे पाता।केवल जननी नहीं मात्रमैं भी हूं जग की ज्ञाता।शक्ति तुझको मिली अधिकबांधा जिसने […]
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“मेरे भी सपने हैं”नारी हूं मैं वस्तु नहीं मेरे भी सपने हैं।जननी हूं मैं सृष्टि कीनवजीवन मुझसे पाता।केवल जननी नहीं मात्रमैं भी हूं जग की ज्ञाता।शक्ति तुझको मिली अधिकबांधा जिसने […]
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“शक्ति_स्वरूपा” हे -नारी तू ही है नारायणी और तू ही है शक्ति स्वरूपा जीती है तू दो -दो रूपों को लेकर जन्म नारी रूप में इस पावन वसुधा पर हे
महिला दिवस पर प्रतियोगिता हेतु रचना, “शक्ति स्वरूपा “ Read More »
भारत मां का यौवन भारत मां के यौवन को न छेड़ों ,ये मुश्किल से संवरा है ।श्रृंगार झलकता है, स्त्री से कलित,इसके क्षोभ से सुरक्षित रहो न ।।
दोहे अन्न वस्त्र भी चाहिये, थोड़ी बहुत जमीन । समाधान खोजें सभी, किस पर करें यकीन ।। कृषक देश की आन है, कृषक
हर रातें तो अंधेरी लगती हैं पर हर सुबह भी धुंधला धुंधला लगता है। रचनाकार का नाम: डॉ आलोक रंजन कुमार पदनाम: विभागाध्यक्ष हिन्दी संगठन: ए. के. सिंह कॉलेज जपला
बेगाना बेगाना लगता है Read More »
संघर्षविराम…!!! दिन बीतते रहे। साल जाते रहे। अनगिनत समस्याएं आयीं , परंतु राधेश्याम के संकल्पों और दृढ़ इच्छाशक्ति के सम्मुख उन कठिनाइयों को परास्त होना पड़ा। शिक्षा के क्षेत्र में
संघर्ष : संघर्षविराम ( भाग ७ ) Read More »
परवरिश…!!! हेलीकॉप्टर की गड़ गड़ गड़ गड़ करती आवाज़ से सारा आसमान गूंज रहा था। रोहन “पापा…पापा…” चिल्लाते हुए छत की ओर भागा। किसी काम में व्यस्त राधेश्याम भी दौड़ता
संघर्ष : परवरिश ( भाग ६ ) Read More »
संकल्प…!!! रात के अंधेरे में उम्मीद की कोई रोशनी अगर दिखाई ना दे…तो अंधेरे की कालिमा और बढ़ जाती है। सामान्य सी रात भी अमावस की रात का रूप ले
संघर्ष : संकल्प (भाग ५) Read More »
जीवनसाथी….!!! “जीवनसाथी”…!!! ये शब्द सुनते ही मन में सर्वप्रथम “पत्नी” शब्द की आवृत्ति अवश्य होती है। लेकिन मेरे विचार से पत्नी, जो ये शब्द है…थोड़ा संकुचित भावार्थ से पूर्ण है।
संघर्ष : जीवनसाथी ( भाग ४ ) Read More »
राम नाम सत्य है…!!! दोपहर के करीब तीन बजे थे। मौसम का मिज़ाज बड़ा ही अजीब था। सूर्य की लालिमा ऊर्जा का संचार नहीं कर रही थी बल्कि किसी अशुभ
संघर्ष : राम नाम सत्य है… ( भाग ३ ) Read More »