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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

“देशभक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता ” हेतु कविता – वीरों को देश का वन्दन

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वीरों को देश का वन्दन

उन वीरों को देश का वन्दन, जो प्राणों को वारे हुए हैं,

अपनी खुशबू दे के वतन को, आज वो चाँद-सितारे हुए हैं । 

हम धरती पर हों या ना हों, देश का सूरज चमके हरदम,

प्रण जो लिया है दोहराएंगे, जब तक तन में रहता है दम,

जिनके डर से देश के दुश्मन, तन-मन-धन से हरे हुए हैं । 

आज मुझे सौभाग्य मिला है, कहती है सिन्दूर की लाली,

देश के हित सर्वस्व दिया है, मौन ह्रदय है खाली-खाली,

पूरित कर संकल्प को अपना, आज सभी के प्यारे हुए हैं । 

वीर सपूत को अर्पित करके, मन पिघला पर आँख न बहता,

गोदी के थे जो किलकारी, प्राण थमा पर शौर्य दे बढ़ता,

मेरे कुल का उज्ज्वल दीपक, घर-घर के उजियारे हुए हैं । 

स्वर्ण सा चितवन हो गयी माटी, मेरा दुख कौन है बाँटे,

गलते तन की भीगी आँचल, दिन और रात कैसे काटे,

कण-कण बिखरी मेरी ममता, वीर शहीद दुलारे हुए हैं । 

जिनके यश की अमर कहानी, गीतों में फिर गाया जाये,

हर बालक के मन मन्दिर में, बिम्ब उसी का छाया जाये,

जय-हिन्द के उद्घोष-गुंजित – गाँव, गली, गलियारे हुए हैं । 

***

Last Updated on January 11, 2021 by sundarsapne

  • श्रुति गुप्ता
  • टेक्सटाइल डिज़ाइनर
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