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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

गीत

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भीगी पलकें , स्वप्न अधूरे ,
किंतु निराशा में हो आशा,
यही जगत की है परिभाषा !

कभी मार खाकर मौसम की ,
दीपक एक हुआ बुझने को ,
पर उसके मन के साहस ने ,
हिम्मत दी उसको लड़ने को,
दीप लड़ा, बलिदान हुआ पर,
अंत समय तक हार न मानी ।
माटी का ,माटी में मिलकर ,
लिखी धरा पर अमर कहानी,
वही शिखर पर पहुँच सका है ,
जिसने ख़ुद को स्वयं तराशा ।
यही जगत की है परिभाषा !

खड़े धरातल पर यथार्थ के-
चुनौतियों को गले लगाते,
और निहत्थे जीवन रण में,
वर्तमान से द्वन्द रचाते,
कभी व्याधियों से घबराकर ,
तनिक नहीं जो विचलित होते
इतिहासों के पृष्ठों पर वो ,
स्वर्णाक्षर से अंकित होते ,

ठहरे क़दमों को समझा दो,
जीत हार में भेद ज़रा सा ,
भीगी पलकें,स्वप्न अधूरे ,
फ़िर भी मन में हो इक आशा ।

@ मुकेश त्रिपाठी

Last Updated on January 21, 2021 by tripathim9

  • मुकेश त्रिपाठी
  • आडिटर
  • निरंक
  • [email protected]
  • कटनी,मध्यप्रदेश
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