नशा
#नशा ये -धुआँ भी चीज अजीब है नशा इसका बेमिसाल है, जकड़ता है लोगों को गिरफ्त में धीरे -धीरे, ये -धुआँ भी चीज अजीब है | भूल जाते हैं लोग […]
#नशा ये -धुआँ भी चीज अजीब है नशा इसका बेमिसाल है, जकड़ता है लोगों को गिरफ्त में धीरे -धीरे, ये -धुआँ भी चीज अजीब है | भूल जाते हैं लोग […]
बेटियाँ घर मेरे मौसम की, बहार आयी, घर मेरे शबनम की, फुहार आयी, दे दिया तोहफ़ा, मुझे कुदरत ने, बागीचे में मेरे, एक कचनार आयी। ओस सी नाज़ुक, मासूम
“महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता” हेतु कविता। Read More »
एहसास मन भावों को कैसे उकेरूं, शब्द नहीं हैं पास मेरे, कैसे गढ़ू मैं चित्र घनेरे, रंग नहीं हैं पास मेरे। एहसासों के बादल बरसें, चढ़े रंग तेरे प्यार
“प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता” हेतु कविता। Read More »
फूल-फूल पर ! फूल-फूल पर लिखी है बात,मनभावन सूरत उसके पास ।आया सावन बरसे बदरा,ओड़ कर आई काली चदरा ।।उड़ी फुहार भीगी कलियां,उड़ी सुगन्ध महके अंगना ।भौंरों का
अपना कौन ?——————-आज ही 10 बजे से बी.एड का पेपर है और साथ में नन्हे-नन्हे दो बच्चे और बुआ जी ने घर छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया कि “अभी घर
103 साल के युवा : हमारे गोखले बुवा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी एवं ऐतिहासिक शहर पुणे के भी हर पुराने शहर की तरह दो चेहरे हैं, एक पुराना और
103 साल के युवा : हमारे गोखले बुवा Read More »
भीगी पलकें , स्वप्न अधूरे ,किंतु निराशा में हो आशा,यही जगत की है परिभाषा ! कभी मार खाकर मौसम की ,दीपक एक हुआ बुझने को ,पर उसके मन के साहस
स्वामी विवेकानंद दीन- हीन के उत्थान पथ पर, जग जीवन को किए उजागर। भारतीय संस्कृति के निकुंज, सकारात्मकता का साकार पुंज। राष्ट्र प्रेम का स्रोत और गुणी, विवेक