न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ

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तुम्हेंसाथ लेकर चलता हूँ
(दिल्ली की वर्धमान कवयित्री मीनाक्षी डबास के काव्य के संदर्भ में)

एक वार्ता में मीनाक्षी डबास ने कहा – “काव्य को साथ लेकर चलने से हम कलांत, खीज, अकेलेपन, अशांत माहौल से कोशों दूर प्रकृति के निकट मानवीय संवेदनाओं की अनुभूति करते हैं, यही अनुभूति के क्षण सभी के हृदय में भिन्न-भिन्न कामनाओं को नवांकुरित करते हैं, l” इसी संदर्भ में यह कविता लिखी गयी है l)

कहीं अकेलेपन में भटक कर खो न जाएं,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

सरस धारा दुलार भरी हो
जीवन खुशियों भरा हो
उमंग नव चेतना की हो
प्रेम स्नेह माधुर्य भरा हो
कहीं से जीवन की मुस्कान तुम्हें मिल जाएं,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

प्रभात में सविता जगाए
खग कलरव गान गाएं
तितलियाँ रंग भरकर जाएं
चौपाये भागे, दौड़ लगाएँ
कहीं ये सब देख तेरी दंतावली खिल जाएं,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

पेड़ों में लहराती हवा बहे
थिरक उठे झूमे ओर कहे
इस हवा संग तूँ भी तो
झूमें गाएं,मस्ती में खो जाएं
कहीं सारे नैसर्गिक वितान तुझसे खेलने आएँ,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

घर ममता भरा मिले आँचल
चहल कदमी भरा रोमांच
भाई बहनों का दुलार प्यार
सस्नेह घर स्वर्ग बन जाएं
कहीं विधाता तेरे घर आकर यही सब दे जाएं,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

महक उठे तेरा जीवन संसार
तुझको मिले सबका दुलार
तूँ उमंग बनकर जिये हरपल
तुझको मिले खुशियों के क्षण
यही सब विधाता से माँग कर ले आऊँ,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

एक दिन सवेरा अरुणाई भरकर
खुशियों के भर दोने दे जाएगा
एक दिन दाम्पत्य, ममत्व स्नेह से
तेरा घर सुन्दर स्वर्ग बन जाएगा
रोज यही सपना सजाने की दुआ माँगता हूँ,
इसलिए हमेशा तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ l

हेतराम भार्गव & हरिराम भार्गव

हेतराम भार्गव
शिक्षा – MA हिन्दी, B. ED., NET 8 बार
हरिराम भार्गव
शिक्षा – MA हिन्दी, B. ED., NET 8 बार JRF सहित

माता-पिता – श्रीमती गौरां देवी, श्री कालूराम भार्गव
प्रकशित रचनाएं –
जलियांवाला बाग दीर्घ कविता (लेखक द्वय – खंड काव्य )
मैं हिन्दी हूँ – राष्ट्रभाषा को समर्पित महाकाव्य (लेखक द्वय हिन्दी जुड़वाँ – महाकाव्य )
आकाशवाणी वार्ता – सिटी कॉटन चेनल सूरतगढ राजस्थान भारत
कविता संग्रह  पंजाब की धरती (लेखक द्वय हिन्दी जुड़वाँ – महाकाव्य )
तुम क्यों मौन हो – (लेखक द्वय हिन्दी जुड़वाँ – खंड काव्य )
पत्र – पत्रिकाएँ – शोध जर्नल
स्त्रीकाल – (यूजीसी लिस्टेड शोध पत्रिका) आजीवन सदस्यता I
अक़्सर – (यूजीसी लिस्टेड शोध पत्रिका) आजीवन सदस्यता I
अन्य भाषा, गवेषणा, इन्द्रप्रस्थ भारती, मधुमती का नियमित पठन I
समाचार पत्र – प्रभात केशरी (राजस्थान का प्रसिद्ध सप्ताहिक समाचार पत्र) में समय समय पर विभिन्न विमर्श पर लेखन I

उद्देश्य- हिंदी को प्रशासनिक कार्यालय में लोकप्रिय प्राथमिक भाषा बनाना।

Last Updated on October 26, 2020 by manuhrd7

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