तुम्हें साथ लेकर चलता हूँ
तुम्हेंसाथ लेकर चलता हूँ (दिल्ली की वर्धमान कवयित्री मीनाक्षी डबास के काव्य के संदर्भ में) एक वार्ता में मीनाक्षी डबास ने कहा – “काव्य को साथ लेकर चलने से हम […]
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तुम्हेंसाथ लेकर चलता हूँ (दिल्ली की वर्धमान कवयित्री मीनाक्षी डबास के काव्य के संदर्भ में) एक वार्ता में मीनाक्षी डबास ने कहा – “काव्य को साथ लेकर चलने से हम […]
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दृष्टि विहीन हुआ, मनुज संताप की वेदना भारी है, देव,देव न रहे, निर्विवाद है विध्वंस की भावना जारी है, किस ओर दृष्टि डालूँ ,कृतघ्नता चहूँ ओर, विनिर्माण या निर्वाण परित्याग चारो ओर,
बच्चों से इक पुस्तक बोली जितना मुझे पढ़ जाओगे उतने ही गूढ़ रहस्य मेरे बच्चों तुम समझ पाओगे। मुझमें छिपे रहस्य हजारों सारे भेद समझ जाओगे दुनियाँ के तौर-तरीकों से
नवनीत शुक्ल की कविता – ‘पुस्तक बोली’ Read More »
1 हमने हर मोड़ पर जिसके लिये, ख़ुद को जलाया है। उसी ने छोड़कर हमको, किसी का घर बसाया है।। किया है जिसके एहसासों ने, मेरी रात को रोशन। सुबह
विवेक की चार कविताएं Read More »