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डॉ. शैलेश शुक्ला

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सरसी छंद “राजनाथजी”

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सरसी छंद “राजनाथजी”

भंभौरा में जन्म लिया है, यू पी का यक गाँव।
रामबदन खेतीहर के घर, अपने रक्खे पाँव।।
सन इक्यावन की शुभ बेला, गुजरातीजी मात।
राजनाथजी जन्म लिये जब, सबके पुलके गात।।

पाँव पालने में दिखलाये, होनहार ये पूत।
थे किशोर तेरह के जब ये, बने शांति के दूत।।
जुड़ा संघ से कर्मवीर ये, आगे बढ़ता जाय।
पीछे मुड़ के कभी न देखा, सब के मन को भाय।।

राजनाथ जी सदा रहे हैं, सभी गुणों की खान।
किया दलित पिछड़ों की खातिर, सदा गरल का पान।।
सदा देश का मान बढ़ाया, स्पष्ट बात को बोल।
हिन्दी को इनने दिलवाया, पूरे जग में मोल।।

रक्षा मंत्रालय है थामा, होकर के निर्भीक।
सिद्धांतों पर कभी न पीटे, तुष्टिकरण की लीक।।
अभिनन्दन ‘संसार करत है, ‘नमन’ आपको ‘नाथ’।
बरसे सौम्य हँसी इनकी नित, बना रहे यूँ साथ।।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया (असम)

Last Updated on May 3, 2021 by basudeo

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