न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

placeholder.png
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

काव्य-मंच 

काव्य-मंच (मापनी:- 2122  2122  212) काव्य मंचों की अवस्था देख के,लग रहा कविता ही अब तो खो गयी;आज फूहड़ता का ऐसा जोर है,कल्पना कवियों की जैसे सो गयी। काव्य-रचना की जो प्रचलित मान्यता,तोड़ उनको जो रचें वे श्रेष्ठ हैं;नव-विचारों के वे संवाहक बनें,कवि गणों में आज वे ही ज्येष्ठ हैं। वासनाएँ मन की जो अतृप्त हैं,वे बहें तो काव्य में रस-धार है;हो अनावृत काव्य में सौंदर्य तो,आज की भाषा में वो शृंगार है। रूप की प्रतिमा अगर है मंच पर,गौण फिर तो काव्य का सौंदर्य है;फब्तियों की बाढ़ में खो कर रहे,काव्य का ही पाठ ये आश्चर्य है! चुटकलों में आज के श्रोता सभी,काव्य का पावन रसामृत ढूंढते;बिन समझ की वाहवाही करके वे,प्राण फूहड़ काव्य में भी फूंकते। मूक कवि, वाचाल सब लफ्फाज हैं,काव्य के सच्चे उपासक खो रहे;दुर्दशा मंचों की ऐसी देख कर,काव्य-प्रेमी आज सारे रो रहे। बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’तिनसुकिया

Read More »
हाईकु
basudeo

हाइकु (ये बालक कैसा)

हाइकु (ये बालक कैसा) अस्थिपिंजरकफ़न में लिपटाएक ठूँठ सा। पूर्ण उपेक्ष्यमानवी जीवन काकटु घूँट सा। स्लेटी बदनउसपे भाग्य

Read More »
अन्य काव्य विधाएं
basudeo

सार छंद “भारत गौरव”

  सार छंद “भारत गौरव” जय भारत जय पावनि गंगे, जय गिरिराज हिमालय;सकल विश्व के नभ में गूँजे,

Read More »
मुक्तक
basudeo

देश भक्ति मुक्तक

मुक्तक (देश भक्ति) सभी देशों में अच्छा देश भारतवर्ष प्यारा है,खिले हम पुष्प इसके हैं बगीचा ये हमारा

Read More »
नवगीत
basudeo

पथिक

पथिक (नवगीत) जो सदा अस्तित्व से अबतक लड़ा है।वृक्ष से मुरझा के पत्ता ये झड़ा है। चीर कर

Read More »