न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

देश निराला सब से अपना

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http://कविता(देशभक्ति प्रतियोगिता हेतु ) है देश निराला सबसे अपना है देश निराला सबसेअपना सबके दिल में ये बस्ता है, जो देश को ना समझे अपना, वो मृत जीव से भी सस्ता है। इसकी माटी में हम जन्मे, माटी में ही मिल जाएंगे। इसकी शान की खातिर हम रक्त भी अपना बहा देंगे, है वीरों की ये धरती अपनी, कायरता का पाठ मिटा देंगे, मेहनत के पसीने से हम, फूलों के बाग सजा देंगे, आपस के झगडे को भुला, प्रेम की नदीया बहाएंगे, सुख शांति और समृद्धि कि पताका को फहराएंगे, हम को ना समझे कोई निर्बल और कमजोर भूल गए क्या झांसी की रानी, खुदी राम और बोस, बलिदानों से मिली आजादी यूं मुफ्त में ना गवाएंगे हर दम इसके सम्मान को हम अपना धर्म बनाएंगे। जीना अगर शान से हो, तो देश प्रेम सीने में हो, यूं बातों से ना हम बहलाएंगे अपने कर्मों से ही हम देश का मान बढ़ाएंगे। कण कण मेरी माटी का सोने से नहीं सस्ता है, है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता। जय हिन्द जय भारत स्व रचित मनीषी मित्तल टीजीटी हिंदी कैटेगरी दृष्टिहीन चंडीगढ़ है देश निराला सबसेअपना सबके दिल में ये बस्ता है, जो देश को ना समझे अपना, वो मृत जीव से भी सस्ता है। इसकी माटी में हम जन्मे, माटी में ही मिल जाएंगे। इसकी शान की खातिर हम रक्त भी अपना बहा देंगे, है वीरों की ये धरती अपनी, कायरता का पाठ मिटा देंगे, मेहनत के पसीने से हम, फूलों के बाग सजा देंगे, आपस के झगडे को भुला, प्रेम की नदीया बहाएंगे, सुख शांति और समृद्धि कि पताका को फहराएंगे, हम को ना समझे कोई निर्बल और कमजोर भूल गए क्या झांसी की रानी, खुदी राम और बोस, बलिदानों से मिली आजादी यूं मुफ्त में ना गवाएंगे हर दम इसके सम्मान को हम अपना धर्म बनाएंगे। जीना अगर शान से हो, तो देश प्रेम सीने में हो, यूं बातों से ना हम बहलाएंगे अपने कर्मों से ही हम देश का मान बढ़ाएंगे। कण कण मेरी माटी का सोने से नहीं सस्ता है, है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता। जय हिन्द जय भारत स्व रचित मनीषी मित्तल टीजीटी हिंदी कैटेगरी दृष्टिहीन चंडीगढ़

Last Updated on January 9, 2021 by mani.mittal5

  • मनीषी मित्तल
  • अध्यापिका हिन्दी
  • शिक्षा विभाग चंडीगढ़
  • [email protected]
  • Hno 120/1 new darshani bhag manimajra Chandigarh
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