http://कविता(देशभक्ति प्रतियोगिता हेतु ) है देश निराला सबसे अपना है देश निराला सबसेअपना सबके दिल में ये बस्ता है, जो देश को ना समझे अपना, वो मृत जीव से भी सस्ता है। इसकी माटी में हम जन्मे, माटी में ही मिल जाएंगे। इसकी शान की खातिर हम रक्त भी अपना बहा देंगे, है वीरों की ये धरती अपनी, कायरता का पाठ मिटा देंगे, मेहनत के पसीने से हम, फूलों के बाग सजा देंगे, आपस के झगडे को भुला, प्रेम की नदीया बहाएंगे, सुख शांति और समृद्धि कि पताका को फहराएंगे, हम को ना समझे कोई निर्बल और कमजोर भूल गए क्या झांसी की रानी, खुदी राम और बोस, बलिदानों से मिली आजादी यूं मुफ्त में ना गवाएंगे हर दम इसके सम्मान को हम अपना धर्म बनाएंगे। जीना अगर शान से हो, तो देश प्रेम सीने में हो, यूं बातों से ना हम बहलाएंगे अपने कर्मों से ही हम देश का मान बढ़ाएंगे। कण कण मेरी माटी का सोने से नहीं सस्ता है, है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता। जय हिन्द जय भारत स्व रचित मनीषी मित्तल टीजीटी हिंदी कैटेगरी दृष्टिहीन चंडीगढ़ है देश निराला सबसेअपना सबके दिल में ये बस्ता है, जो देश को ना समझे अपना, वो मृत जीव से भी सस्ता है। इसकी माटी में हम जन्मे, माटी में ही मिल जाएंगे। इसकी शान की खातिर हम रक्त भी अपना बहा देंगे, है वीरों की ये धरती अपनी, कायरता का पाठ मिटा देंगे, मेहनत के पसीने से हम, फूलों के बाग सजा देंगे, आपस के झगडे को भुला, प्रेम की नदीया बहाएंगे, सुख शांति और समृद्धि कि पताका को फहराएंगे, हम को ना समझे कोई निर्बल और कमजोर भूल गए क्या झांसी की रानी, खुदी राम और बोस, बलिदानों से मिली आजादी यूं मुफ्त में ना गवाएंगे हर दम इसके सम्मान को हम अपना धर्म बनाएंगे। जीना अगर शान से हो, तो देश प्रेम सीने में हो, यूं बातों से ना हम बहलाएंगे अपने कर्मों से ही हम देश का मान बढ़ाएंगे। कण कण मेरी माटी का सोने से नहीं सस्ता है, है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता है देश निराला सबसे अपना सब के दिल में ये बस्ता। जय हिन्द जय भारत स्व रचित मनीषी मित्तल टीजीटी हिंदी कैटेगरी दृष्टिहीन चंडीगढ़