मुझे क्या ! मालूम था कि तुझे,
मुझसे मोहब्बत थी इतनी।
अगर साहस और प्रेम भाव थे पास तेरे ।
कह देने में गुनाह क्या थी।।
नदी की धारा बहती है,
वो भी कुछ कहती है ।।
हिलोरें भरती है, गुन – गुन- गुनगुनाती है ,
दिल मे तरंगे जब उठती है ,
वो भी अपनी फरियादें कुछ सुनाती हैं ।।
दिल में मोहब्बत , होठों पे कयामत ,
यह क्या हुई….. इबादत ?
मोहब्बत होती है , निभाने की।
प्यार की ललक को छुपाई नहीं जाती ।।
ये मदहोश शीतल मस्त पवन,
सन -न -न -न पुरवैया बहे ,
फिर भी ,
अपने अन्तर्मन की बात कहे,
जैसे लगी खुशियोँ से भर आया आँगन!
विस्मित हुआ अब मेरा मन ।।
क्यों? दे दी तुने! एक पल में प्यार की ,
अपनी आहुति काश !! एक बार कहा होता…!
अगर थी मुझसे मोहब्बत…..
तो सीखो ! उस नदी की धारा से,
जो बिन रुके-झुके, बिन थमें-मिलने को,
व्याकुल हो उठती है ,अपने उस प्रियतम किनारा से।।
ओह ! तुमने ये कैसी भूल की।
काश!एक बार कहा होता!
ये जीवन संसार हमारा और तुम्हारा होता ।।
नूतन सिन्हा
पटना बिहार ।।
Last Updated on January 20, 2021 by nutansinha139
- नूतन कमारी सिन्हा
- निजी शिक्षिका
- लिट्रा वैली स्कूल पटना
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- नूतन सिन्हा पत्थर गली ,कच्ची तालाब गर्दनीबाग पटना







