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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतु कविता – दबे रंग की स्त्री

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प्रेम रखती हैं
सुझाव देने वाली
स्त्रियाँ सभी
एक अरसे से
अनुभव पिया है सबने।

गर्भवतियों को
दी जाने वाली सलाह में
सबसे पहले आता है
समाधान रंगभेद का।

सुनो बहन
ज़रूरी है गौरवर्ण
कैसे देगी जन्म
एक गोरी संतान को
दबे रंग की स्त्री।

डरती हाँ हाँ करती है
चाहे जो भी हो
ज़रूर देगी जन्म
गौर वर्ण की संतान
दबे रंग की स्त्री।

पड़ता नहीं खाना पूरा
जिसकी थल पर
पिलाते रोज़ अब नारियल पानी
ज़रूर देगी जन्म
गौर वर्ण की संतान
दबे रंग की स्त्री।

लाते हैं खरीद कर
महंगी केसर की डिबिया
देते घूँट घूँट रखवारी में
ज़रूर देगी जन्म
गौर वर्ण की संतान
दबे रंग की स्त्री।

हावी  विषमताओं को
सन्तुलित करने का ज़िम्मा
उठाना है स्त्री के गर्भ  को,
समय साक्षी है कि
क्या होगा अगर
नहीं दे पाई जन्म
गोरी संतान को
एक दबे रंग की स्त्री।

Last Updated on January 20, 2021 by pragyajha8

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