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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
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रामशरण सेठ की कविता – ‘पिता’

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पिता,पिता होता है
पिता का रिश्ता अजीब होता है।

संसार में रिश्ता दूजा नहीं होता
फिर बाप का रिश्ता अनमोल होता है ।

वह उस बरगद के पेड़ जैसा होता है 
जो सबको अपने छांव में रखता है।

कष्ट तब होता है जब उस
बरगद की देख-भाल वाला कोई नहीं होता है।

सब मतलब के यार होते हैं
बरगद तो बस सबको छांव देता है।

वही छोटे-छोटे पौधों को
सींचता पालता पोषता है।

बड़े होने पर वही पौधे
छोड़ देते हैं साथ उसका।

उन पौधों को नहीं मालूम 
वह भी कभी अकेले होंगे।

उनके भी आस-पास ।
कोई नहीं होगा ।।

शरण! पिता,पिता होता है।
पिता का रिश्ता अजीब होता है।।

संपर्क :  मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश, मोबाईल : 9452373213, ईमेल पता : [email protected]*

❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️ भारत

Last Updated on January 4, 2021 by srijanaustralia

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