न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता

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अंतराष्ट्रीय प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता ।
( 1 )

” देखो मेरे नाम सखी “

प्रियतम की चिट्ठी आई है देखो मेरे नाम सखी
विरह वेदना अगन प्रेम की लिक्खी मेरे नाम सखी ।
आसमान में काले बादल कैसे उमड़ घुमड़ आए
अंधकार में एक बदरिया लिक्खी मेरे नाम सखी ।
कुंकूम बिंदिया चूड़ी कंगना पायल की झंकार बजी
हर धड़कन में उनकी खुशबू लिक्खी मेरे नज़्म सखी 
कर्तव्यों की पगडंडी पर मन की गागर मचल गई
पनघट की सब चुहल बाजियां लिक्खी मेरे नाम सखी ।
हाथों में मेंहदी साजन की सुर्ख महावर पैरों में
साँसो में संदल की खुशबू लिक्खी मेरे नाम सखी ।
चन्द्र किरण बनकर तुम मेरे चंचल मन उपवन में आई
चंदा की सारी शितलता लिक्खी मेरे नाम सखी ।
अंग अंग में तपन लगे है अनुबंधों की गांठ खुली
भीतर बाहर की सब मस्ती लिक्खी मेरे नज़्म सखी ।

रचना पूर्णतः मौलिक अप्रकाशित एवं अप्रसारित
………
नाम- अनिल गुप्ता
पदनाम – प्रधान संपादक
संगठन – महाकाल भ्रमण
पता – 8, कोतवाली रोड़ उज्जैन
मोबाइल – 9039917912
ईमेल – [email protected]
…………
( 2 )

” प्यार के दीपक जलेगें “

प्यार के दीपक जलेगें फिर कभी
रोशनी में हम जिएंगे फिर कभी ।।                       फूल की खुशबू से मधुबन खिल गया
लाज के घुंघट उठेगें फिर कभी।
भा गई आँखों को रसवंती अदा
रूप के प्याले पिएगें फिर कभी।
झांक ले आँखों मे आँखे डालकर
शब्द को रास में गुथेगें फिर कभी।
हम तेरे आँचल से लिपट जाएगें
साज की सरगम सुनेंगे फिर कभी।
आओ आपस मे बहारें बाँट ले
प्यार की बारिश करेगें फिर कभी।
…….
रचना पूर्णतः मौलिक अप्रकाशित एवं अप्रसारित

नाम- अनिल गुप्ता
पदनाम – प्रधान संपादक
संगठन – महाकाल भ्रमण
पता – 8, कोतवाली रोड़ उज्जैन
मोबाइल – 9039917912
ईमेल – [email protected]
………
( 3 )

” आप क्यूं खामोश है “

जल रही जालिम जवानी आप क्यूं खामोश है
उठ रही दिल मे रवानी आप क्यूं खामोश है ।

शोख चंचल सी अदाएं आपको दिखती नही
लुट रही मेरी जवानी आप क्यूं खामोश है ।

आपकी सूरत के सिवा कुछ नही भाता मुझे
हो गई हूं में दिवानी आप क्यूं खामोश है ।

दिल के दर्दों को भुलाना मेरे बस में अब नही
सब यही कहते है जानी आप क्यूं खामोश है ।

अपने दामन पर लिखी है आंसुओं से सींचकर
प्यार की अनुपम कहानी आप क्यूं खामोश है ।

आँख न फेरो सनम अब रंग में रंग लो मुझे
हो गई हूं में सयानी आप क्यूं खामोश है ।
………….

रचना पूर्णतः मौलिक अप्रकाशित एवं अप्रसारित

नाम- अनिल गुप्ता
पदनाम – प्रधान संपादक
संगठन – महाकाल भ्रमण
पता – 8, कोतवाली रोड़ उज्जैन
मोबाइल – 9039917912
ईमेल – [email protected]

Last Updated on January 15, 2021 by mahakalbhramannews

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