नमन तुमको देश मेरा
सूर्य चंदा और तारे
के सुखद मनहर नजारे
हैं सजाते देश को नित
स्वर्ण किरणों के सहारे,
गोधुली जिसकी सुहानी
सुखद है जिसका सवेरा
नमन तुमको देश मेरा ।
अहा! पर्वत और घाटी
धन्य अपनी धूल माटी
अर्चना मे लिप्त जिसकी
वेदमंत्रों के सुपाठी,
देवताओं की धरा यह
साधु-संतो का बसेरा
नमन तुमको देश मेरा ।
हम चले सबको जगाने
जागरण का गीत गाने
विश्व गुरु था देश अपना
विश्व गुरु फिर से बनाने,
चल पड़े हैं हम धरा से
अब मिटाने को अँधेरा
नमन तुमको देश मेरा ।
अनन्त प्रसाद ‘रामभरोसे’
ग्राम पोस्ट-सागरपाली
जिला-बलिया
277506
E mail – [email protected]
Mobile-9838408017
उपर्युक्त रचना मेरी मौलिक, स्वरचित है। इसपर किसी तरह का कापीराइट विवाद नहींं है।
अनन्त प्रसाद’रामभरोसे’
Last Updated on January 4, 2021 by anantprasadrambharose
- अनन्त प्रसाद 'रामभरोसे'
- पूर्व प्रवक्ता
- व्यक्तिगत
- [email protected]
- ग्राम-पोस्ट- सागरपाली ,जिला- बलिया ,पिनकोड-277506







