न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

डॉ. श्याम लाल गौड़ की कविता – ‘स्त्री विमर्श’

Spread the love
image_pdfimage_print
स्त्री नहीं श्री है, जिसे तुम रुलाते।
 रुठ अगर वो जाये तो उसको काली समझो।।
जो अबला कही जाती, उसे बल का भंडार समझो ।
अपने रक्त से पोषण करने वाली, करुणा अवतार समझो ।।
स्त्री नहीं…
श्री सुख-समृद्धि यदि चाहो तो उसे न रूलावो,
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते का सूत्र अपनावो।
उसकी भावनाओं को ना ठेस पहुंचाओ,
उसके आदर को अहसान न समझो ।।
स्त्री नहीं…
उसके त्याग को न भूलो तुम,
उसके जीवन के महत्ता नहै कम।
वह तुमसे किये का उपकार ना चाहती,
उसे तुम मां बेटी बहू कुछ तो समझो।।
स्त्री नहीं…
 उसके बिना न यज्ञ होते, न कर्मों का कोई ठिकाना।
 कैसे बिन उसका जीवन हो पूरा,
उसे तुम मुक्ति का कारण समझो ।।
स्त्री नहीं…
 वो न होती तो जन्म कैसा हमारा,
पापों के प्रायश्चित अवसर न मिलता।
 जन्म चौरासी का चक्कर न काटो,
उसको तुम तारण का कारण ही समझो।।
स्त्री नहीं…
स्त्री बिन पुरुष का न कोई ठिकाना,
उसके मान का आदर क्या करेगा जमाना।
उसे तुम समस्या  न, समाधान ही मानो।
 उसे अपने जीवन का आधार समझो।।
स्त्री नहीं…
संपर्क : डॉ. श्याम लाल गौड़, श्री जगद्देव सिंह संस्कृत महाविद्यालय सप्त ऋषि आश्रम हरिद्वार, -स0प्रवक्ता, मोबाईल : 9368760732, ईमेल पता : [email protected]

Last Updated on January 4, 2021 by srijanaustralia

Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

123

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों और भविष्य पर होगा व्यापक विमर्श

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों

Leave a Comment

error: Content is protected !!