गरीमा से रहो
जब कोई दे रही है बिंदियाॅ ,
हरे कांच की चुडियाॅ
कोई लगा रही है कुंकुंम
तो परहेज क्यों ?
महिलाओंका यह बचपन का हक है ।
अपना हक अदा करना है ।
नही है जब तेरा पती दुनिया मे
तुझे दुगनी जिम्मेदारी
संभालनी है ।
समाज मे तुम्हे आम महिला
की तरह रहना है ।
पतीविहिन औरोतों पर
पहले अपार बंधन थे ।
अन्याय ,अत्याचार ,जुलुम होते थे ।
अब समाज तुम्हे अपना रहा है ।
समाज मे स्थान दे रहा है ।
तो फिर क्यों दूर भाग रही हो ?
अपना हक हासिल करो।
अपने हक का सम्मान से स्विकार करो ।
अपना अस्तित्व संभालो ।
अपना व्यक्तित्व निखारो ।
नारी,तुम जीवन मे गरीमा से रहो ।
मीना खोंड
हैद्राबाद
Last Updated on April 5, 2021 by meenakhond
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