कौन दिसा के वासी तुम?
[प्रियतम के दूर होने से मन की उत्कंठा भिन्न भिन्न रूपों में प्रियतम की कल्पना करता हुआ उदास है अर्थात् जीवन में जीवनसाथी की निकटता का आभास ही सुखद अनुभव है। दूर- दराज सीमा पर डटे भारतीय सैन्यबल और उनके परिवार को समर्पित है- कौन दिसा के वासी तुम?]
तुम बिन दिन सब सूने,
रतिया भी भयी निरासी
साँझ के सब सुरंग धुले,
प्रभात आभा अलसाती।
वन कुसुम मन नहीं भाते,
मन बगिया फैली उदासी।
पंछीन कलरव कटु लागे,
अम्बर की छिनी उजाली।
शीत समीर कंटक चुभे,
वसंत में कहाँ हरियाली।
सावन भी अब सुना लगे,
कोई ऋतु न मोहे भाती।
तारों भी जगमग विहीन ,
चाँद की धुंधली चाँदनी।
रवि तेज निस्तेज मलिन,
अंशु माला की टूटी लाली।
हर प्राण थाह में लगा रहे
कब मिले मुझे तेरी राही
जान भी तुम अंजान हो तुम
अनंत मेरी तलाश भी तुम
कौन दिसा के वासी तुम?
कवयित्री परिचय –
मीनाक्षी डबास “मन”
प्रवक्ता (हिन्दी)
राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार शिक्षा निदेशालय दिल्ली भारत
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माता -पिता – श्रीमती राजबाला श्री कृष्ण कुमार
प्रकाशित रचनाएं – घना कोहरा, रिमझिम मोबाइल देवता,4 नया सवेरा (हाईकू), 5 बादल, 6 मेरी सहेलियां भाग -1, 7 शब्द संसार, 8 मेरी सहेलियां भाग- 2, 9 पगडंडियां, 10 मजदूरों की मजदूरी, 11 सीढ़ी, 12 धागा, 13 स्त्रियों के बाल, 14 रेखाओं में मजदूर, 15 वीर राणा प्रताप, 16 भारत के पूत, 17 नवजीवन वरदान, 18 कोरोना काल, 19 गढ़वाल राइफल का वीर 20 मृग तृष्णा,21 बन शक्ति,22 शाख से छूटा पत्ता,23 लो थाम प्रिय, 24 बेटी, 25 मुझे उस ओर जाना है, 26 कौन हो तुम, 27 प्रिय छवि, 28 कुछ कोलाब, 29 मेरे राम
उद्देश्य – सरकारी कार्यालयों में कामकाज की प्राथमिक भाषा बनाने हेतु हिंदी का प्रचार – प्रसार l
Last Updated on May 21, 2021 by mds.jmd
- मीनाक्षी डबास "मन"
- प्रवक्ता (हिन्दी)
- शिक्षा निदेशालय,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली भारत
- [email protected]
- राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार शिक्षा निदेशालय ,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली, भारत








1 thought on “कौन दिसा के वासी तुम?”
बहुत उत्तम