न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

अंतरराष्ट्रीय प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु प्रेषित कविता कविता का शीर्षक-1 प्रेम..! 2 प्रेम का संसार ऐसे ही..

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अंतरराष्ट्रीय प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता-
सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय पत्रिका

1. कविता का शीर्षक :- प्रेम…!

अनुभूति का अद्भुत संगम है
       प्रेम…!
संवेदनाओं और स्वानुभूति का
      मनोरम संसार है
         प्रेम…
दो दिलों के बेतार-तारों को
        जोड़ता है प्रेम…
दो जिस्म एक जान के जज़्बे को जगाता है
         प्रेम..
दो हृदयों के अंतर्मन में
       प्रेम-ज्योति जगाकर
         स्नेह को अंतःसंचरित करता
              वो है प्रेम…

रोम-रोम को रोमांचित कर..
     सहृदयों के हृदय में

      प्रेम-लहर को निरंतर आगे बढ़ाता
           वो है प्रेम…!

दो दिलों के निकट आने की अभिलाषा को
    स्नेह-स्नेह स्नेहिल कर जाता…
      वो है प्रेम…!!

मन में अनेकों भाव जगाता..
   कभी अपनों से मिलता..
      कभी उनसे दूर करके
         स्नेह-प्रेम के बंधन को अटूट बनाने में
           समय की मार को सहने
             आगे बढ़ने की राह
                दिखाता है प्रेम…!

अपने-पन को
    स्वानुभूति के राग से झंकृत कर
       दिलों के बेतार-तार में..
         धड़कन को धड़कना सिखाता है प्रेम..!

अनुभूति से अभिव्यक्ति का
    मार्ग प्रशस्त कर
      अनेक अवसर..
         बार-बार लाता है प्रेम..

कभी हँसाता-
    कभी रुलाता
     कभी प्रेम-सरोवर में
       गोते लगाने के अवसर
       बनाता है प्रेम..!

कभी अवसर को लंबा करके
    प्रेम-परीक्षा..
       समय दर समय देता रहता है
           प्रेम…!

कभी कसौटी पर खरा उतरता…
   कभी बेलौस-सा..
     इधर-उधर भटकता..
       प्रेम का ये कैसा जहान?
         जहाँ अपनों का अपनापन..
            जाने क्यों वीरान ?

दिखावटीपन के इस कलिकाल ने
     स्वार्थों की इस आँधी में
        जाने कितने रिश्ते यहाँ से वहाँ
           वहाँ से जाने कहाँ-कहाँ?
              वक्त बेवक्त भटकते
               और
                  भ्रमित होते रहे
                   छल-कपट की इस दुनियां ने
                     जाने कितनों के घर-संसार को
                        गाहे बगाहे नेस्तानाबूत किया..

अर्थतंत्र के झंझावात के झंझट ने
    जाने कितने प्रेमी युगलों के
       जहान को वीरान किया..?
          समय की मार ने उनको
             बेवक्त ही बेझार किया?

अर्थ की कसौटी पर
     प्रेम को परखने वालों की
       इन पारखी नजरों ने…
         जाने कितने प्रेमी-हृदयों के सपनों को
            बे-समय ही मार दिया..

प्रेम-कसौटी को…
     दरकिनार कर
        आगे बढ़ने वालों ने
            जाने कितनों के
                प्रेमियों के मनो-संसार को
                   झार-झार किया
                      आखिर ऐसा क्यों
              और
                   कब तक होता रहेगा?

प्रेम…!
     क्या केवल कसौटी का मोहताज़ ?
       या वो मन का ताज़
          अपनों के मन पर हमेशा करता रहता है राज
              हृदय से हृदय में चोरी चोरी चुपके चुपके
                  बनाता अपना एक अद्भुत संसार..!

केवल
    और केवल…!
       शायद यही संभावनों का भव..
          जीवन का राग..
        बेशर्तों का संचार-संचरण
           नित-प्रति आलोडन-विलोडन करता
               निरंतर आगे बढ़ता रहेगा ये प्रेम…!!

    अंतरराष्ट्रीय प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता-
       सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय पत्रिका

                 2. कविता शीर्षक :
                     प्रेम का संसार ऐसे ही…!

प्रेम लगन है
        प्रेम अगन है
          प्रेम में सारी दुनिया मगन है।
प्रेम आस है
           प्रेम में विश्वास है
             प्रेम में अपने हमेशा आस-पास है।
प्रेम मुक्ति में युक्ति है
           प्रेम रुह का रुह में संगम है।
प्रेम एक छुवन है
          प्रेम दिलों को जोड़ने का अद्भुत एहसास है।
प्रेम में चाहत जगना..
           दिलों के बेतार तारों का
              यो सहज जुड़ जाना
               हवा के झोंके-सा
                  एक-दूजे में समा जाना।

प्रेम में मादकता है
          प्रेम में मस्तमौलापन है।
प्रेम में सुगबुगाहट है
           दिलों में गुनगुनाहट है
               प्रेम में आहट है।
प्रेम में तरंग है
          प्रेम में रंग है।
प्रेम में भावनाओं का संगम
           प्रेम में सुमधुर स्वप्नों का संगम।
प्रेम में संगदिलों की दिल्लगी
         प्रेम में अहसासों का प्रस्फुटन
              प्रेम में जज़्बातों का स्फुरण..!
प्रेम ने जाने
           कहाँ कहाँ की यादों का कारवाँ बनाया..!!
              क़दम क़दम बढ़ते रहे
प्रेम फलता फूलता रहा…
           प्रेम ने सितम सहा
               अपनों का भी ग़म रहा।
वक्त बे वक्त याद आते रहे
       प्रेम की जोत मन में जगाते रहे..!
प्रेम का संसार ऐसे ही..!
     निरंतर छुवन से भुवन तक
        चलता रहे..!

          चलता रहे…!!

            बस ऐसे ही चलता रहे….!!!

 

घोषणा :-
मेरे द्वारा स्वरचित मौलिक और अप्रकाशित 2 कविताएं अंतरराष्ट्रीय प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता के लिए प्रेषित कर रहा हूँ।इन्हें स्वीकृति कर अनुग्रहित करे..!!
धन्यवाद..!
डॉo मुकेश कुमार शर्मा ‘सुदीप’

प्रेषक :-

डॉ. मुकेश कुमार शर्मा (‘सुदीप’)
असिस्टेंट प्रोफेसर स्नातकोत्तर हिंदी विभाग
महात्मा गांधी सरकारी आर्ट्स कॉलेज, चालक्करा, माही (UT पुदुच्चेरी)भारत
पिन कोड 673311
मोबाईल – 09660325669
ईमेल- [email protected]
स्थायी पता :-
डॉ० मुकेश कुमार शर्मा S/o श्री मांगीलाल शर्मा
गाँव- परकियाखेड़ी खेड़ी, पोस्ट – शादी
तहसील- बेगूं, जिला- चित्तौड़गढ़, राज्य- राजस्थान
भारत
मोबाईल नम्बर-9660325669
पिन-312023

Last Updated on January 6, 2021 by sharmamk1985

  • डॉ० मुकेश कुमार शर्मा 'सुदीप'
  • असिस्टेंट प्रोफेसर स्नातकोत्तर हिंदी विभाग
  • महात्मा गांधी सरकारी आर्ट्स कॉलेज, चालक्करा, माही (UT पुदुच्चेरी)-673311
  • [email protected]
  • डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ('सुदीप'),असिस्टेंट प्रोफेसर स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, महात्मा गांधी सरकारी आर्ट्स कॉलेज, चालक्करा, माही (UT पुदुच्चेरी)भारत पिन कोड 673311 मोबाईल - 09660325669 ईमेल- [email protected]
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4 thoughts on “अंतरराष्ट्रीय प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु प्रेषित कविता कविता का शीर्षक-1 प्रेम..! 2 प्रेम का संसार ऐसे ही..”

  1. बहुत ही अच्छी कविता है वर्तमान स्थिति के परिपेक्ष्य में नारी के पात्र को दर्शाया गया है

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