न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

अजय कुमार पाण्डेय की नई कविता, इंतजार-आखिर कब तक,

Spread the love
image_pdfimage_print

मोमबत्ती हाथ में लेकर चले सब एक दिन,

इक दर्द के साथ हम सब चले थे एक दिन।

दुखी अनगिनत चेहरे, दर्द पारावार सा

इक नए प्रारंभ का सब स्वप्न पाले एक दिन।

एक स्वर बस गूंज रहा था इस सकल ब्रम्हांड में

यूँ लगा अब सृष्टि बदलेगी सकल ब्रह्माण्ड में।

आंधियों में जोर था, वो लौ भी शायद बुझ गयी

सिसकियां बस रह गयी, शायद सकल ब्रम्हांड में।

हैवानियत क्या इस कदर हावी हुए अब जा रही

इंसान की इंसानियत पराजित ज्यों हुए जा रही

है ये किसका दोष, आरोप अब किस पर मढ़ें

क्यूँ कर ये चेतना,  अब सुप्त सी होती जा रही।

स्तब्ध है अवनि यहां, स्तब्ध अंबर आज है

जाने कैसा आज ये फैला बवंडर आज है।

बूँद बादल की भी ना जाने कहाँ अब खो गयी

ढूंढता है रास्ता दिनकर भी यहां अब आज है।

शर्म से शायद दिनकर भी यहां क्या छुप गया

क्षोभ से भरकर के स्वयं क्या वो रुक गया।

कौन अब उसको बुलाये इस घने अंधकार में

जाने उसका भी तेज शायद शर्म से आज झुक गया।

और कितनी देर है सारा गगन है पूछता

न्याय की आवाज से सारा चमन है गूंजता।

न्याय से ही मात्र अब अवसाद शायद न रुके

जाने क्यों इस धरा को ना राह कोई सूझता।

आओ सब मिल यहां अन्याय का प्रतिकार करें

हो सुरक्षित ये धरा प्रण आज ये स्वीकार करें

वर्ना कहीं ना देर हो जाये यही इंतजार में

अब कृष्ण फिर ना आएंगे इस विकल संसार में।

जगत जननी की रक्षा का प्रण आज करना होगा

सभ्यता-असभ्यता से एक अब चुनना होगा

वरना विकल हो सृष्टि जब आपे से बाहर जाएगी

ना मिलेगा रास्ता,  शून्य सा सब हो जाएगा।।

✍️©️अजय कुमार पाण्डेय, हैदराबाद

30सितंबर,2020

 

Last Updated on November 20, 2020 by skshastri2

Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

image_20260921_102530

रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Leave a Comment

error: Content is protected !!