“उलाहना”
अनायास ही..
बड़े ही सहजता से कह दिया मैंने
कि तुमने मुझे दिया क्या है..
जबकि..
चेतन मन को खबर है
कि मेरे उपर तुमने
न्योछावर कर दिया है
संचित निर्मल प्रेम और स्नेह
समर्पित कर दिया अपना देह
मेरे उफनते जज़्बातों को..
समा लिया तुमने
अपने अपनत्व के असीम सागर में
ना तुफानों की परवाह की तुम
और ना ही साहिलों का फ़िक्र
संग चल दिए राह – ए – सफ़र में
हर्फ़ – दर – हर्फ़ में है इसका ज़िक्र
राह – ए – उलफ़्त में जगह दिया
मेरे ख्यालों को अपने ख्यालों में..
सुनो.. लौटा दो मुझे
नश्वर चीज के लिए दिए गए
उलाहने के एक एक शब्द
क्योंकि हमारे तुम्हारे बीच की
रूहानी संबंध ही तो चिरंतन है।।
Last Updated on January 19, 2021 by ajay1991ks
- डॉ. अजय कुमार
- असिस्टेंट प्रोफेसर
- पटना काॅलेज, पटना
- [email protected]
- अंग्रेजी विभाग, पटना काॅलेज,पटना, बिहार







