न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

पटाखा मुक्त इको-फ्रेंडली दीपावली मनायें

Spread the love
image_pdfimage_print

• आसिया फ़ारूकी

हमारा देश भारत त्योहारों का देश है। तमाम सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता होने के बावजूद सभी सुंदर सुवासित सुमनों की भांति एक सूत्र में गुंजे हुए हैं। प्रेम, आत्मीयता और मधुरता के साथ सभी एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर देश की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं करते हैं। वर्ष भर कहीं न कहीं कोई त्योहार लोग मनाते ही रहते हैं। इसी कड़ी में रोशनी का त्योहार दीपावली सभी का मन मोह लेता है। दीपावली खुशियां मनाने और प्रेम बांटने का त्योहार है जिसमें सभी लोग पटाखे, फुलझड़ी जलाकर खुशियां प्रकट करते हैं।
कॅरोना काल अभी चल ही रहा है , देखते ही देखते दीपावली भी आ गयी। अभी हम कॅरोना से मुक्त नहीं हो सके , जन-जीवन अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दीपावली की तैयारियां चल रही हैं। बच्चे-बड़ों सभी का दिवाली को लेकर विषेष उत्साह होता है। दुःख की बात बस यही है कि कॅरोना काल में हजारों लोगों के घरों के दीये बुझ गये। इस महामारी नें त्योहारों की ख़ूबसूरती को कम कर दिया। ऊपर से किसानों द्वारा पराली जलाने से वातावरण में धुंध छायी है जिससे बच्चों, बूढ़ों एवं बीमार व्यक्तियों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है साथ आंखों में जलन का भी एहसास हो रहा है। इसलिए जागरूकता इसी में है कि इस वर्ष सब सुखमय, सुरक्षित दीपावली मनायें। होली के बाद कॅरोना ने अपने पैर जमा दिये और सारे त्योहारों की ख़ूबसूरती कम कर दी। कॅरोना और संचारी रोगों के लिये हम भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार हैं। हम अपने त्यौहारों में बेमतलब गंदगी कर वातावरण को प्रदूषित बना देते हैं। हमें सोचना होगा सुरक्षित दीपावली मनायें जिससे लोगों को नुकसान न पहुँचे। कोविड का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। अब हमें सुरक्षित रहने की कामना और हिदायतें देने की ज़रूरत पड़ने लगी है। आखिर कौन सा त्योहार लोगों को जोख़िम में डालने के लिये बन सकता है? कोई नहीं । उसे ऐसा हम बनाते हैं। दीवाली तो सिर्फ़ खुशियों और दीपों का त्यौहार है। ज़हरीले धुएं और शोर वाले पटाख़े तो इसमें हमने ज़बरदस्ती जोड़ दिये। कोशिश यह की जानी चाहिये कि हम त्योहार शांति से मनाएँ और गंदगी न फैलाएं। लेकिन पटाखे जलाने से दीपावली के अगले दिन नज़ारा क्या होता है? चारों ओर धुएँ का ग़ुबार और पटाख़ों का कूड़ा। हम प्रधानमंत्री जी के चलाये गये स्वच्छ भारत अभियान में दीपावली के त्योहार को भी शामिल करें। दीपावली में अहंकार और बुराइयों को जलाना ज़्यादा ज़रूरी है, न कि वातावरण को प्रदूषित करने वाले हानिकारक पटाखों को। अगर फ़िर भी पटाखे ही जलाने हैं, तो बाजार में अब ईको फ्रेंडली पटाखे भी मौजूद हैं। जो रिसाईकिल हो जाने वाले पेपर से बनें होते हैं। इनमें धुआं और शोर बेहद कम होता है। जबकि रोशनी अधिक होती है। हम इनका प्रयोग कर सकते हैं। अगर दीपावली के दिन ख़ुशियों से ज़्यादा हम लोगों को बीमारियाँ और प्रदूषित वातावरण देते जायेंगे तो एक दिन ये त्योहार अपना महत्व खो देंगें। इसलिये हम खुद और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये हर सम्भव प्रयास करें। दीपावली के दिन बाहर के अंधेरों को ख़त्म करने के लिए जलाया गया दीप हमें रोशनी देने के साथ-साथ आँखों को भी ठंडक देता है। लेकिन अपने मस्तिष्क के अंदर के अँधेरे को ख़त्म करने के लिये हमें अंतर्मन में दीप जलाने की जरूरत है। ये दीप है ध्यान और नवल ज्ञान सृजन का। इस दीप से अपने अंदर ज्ञान, विज्ञान, मानवीय मूल्यों, प्रकृति से सह सम्बंध और स्नेह शांति का उजाला फैलेगा। इस उजाले से हम दुनिया में खुशियों की, समृद्धि की, सहकारिता और सहिष्णुता की भावना विकसित कर सकेंगे। इको फ्रेंडली दीपावली मनाकर हम प्रकृति, पर्यावरण और प्राणियों के जीवन की रक्षा कर दुनिया को खुबसूरत बना सकेंगे।
•••
( राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका )
फ़तेहपुर ( उत्तर प्रदेश )

Last Updated on November 14, 2020 by navneetkshukla013

  • आसिया फ़ारूकी
  • प्रधानाध्यापक
  • बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश
  • [email protected]
  • प्राथमिक विद्यालय अस्ती, नगर क्षेत्र, फतेहपुर
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

प्रतीकात्मक छवि

साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम है यह सम्मेलन-डॉ विकास दवे

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम

प्रतीकात्मक छवि

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा साहित्यिक पत्रिकाओं

प्रतीकात्मक छवि

जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श – डॉ. शैलेश शुक्ला

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के

Leave a Comment

error: Content is protected !!