न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

हमरा तिरंगा

Spread the love
image_pdfimage_print

 

अन्तरराष्ट्रीय देशभक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता में प्रेषित मेरी प्रविष्टि-
स्वरचित, मौलिक,सर्वथा अप्रकाशित एवं अप्रसारित
देशभक्ति गीत—
शीर्षक-“हमरा तिरंगा”

हमरा तिरंगा गगन में लहराए रे
हमरा तिरंगा..हमरा तिरंगा
इस झंडे में तीन रंग साजें
जी तीन रंग साजैं..
सब रंग महिमा से भरके बिराजैं..
जी भरके बिराजैं..
इसपे मनवा भी वारि-वारि जाए रे..
हमरा तिरंगा ………लहराए रे
हमरा तिरंगा

भगवा रंग कहे वीरों की गाथा जी वीरों की गाथा
सबहि नवाएं उनको जी माथा
हां उनको जी माथा ..
देस की खातिर प्राणों को लुटवाए रे..
हमरा तिरंगा……….लहराए रे
हमरा तिरंगा

रंग सफेद का सबसे ही नाता
जी सबसे ही नाता..
मिलके रहो ये संदेसा सुनाता
संदेसा सुनाता..
मन का कबूतर चिहुंके उड़ा जाए रे..
हमरा तिरंगा……….लहराए रे
हमरा तिरंगा …

खेतों में सबके ही झूमे हरियाली
जी झूमे हरियाली..
झोली रहे ना किसी की भी खाली..
किसी की भी खाली..
ये हरा रंग हमें तो बतलाए रे
हमरा तिरंगा ……..लहराए रे
हमरा तिरंगा

चक्र बना बीच हौले से बोले
जी हौले से बोले..
चौबीसों घंटे चलो मेरे भोले
चलो मेरे भोले..
चलना होगा समय न निकल जाए रे..
हमरा तिरंगा ……..लहराए रे
हमरा तिरंगा

——

स्वरचित देशभक्ति गीत
रचना तिथि-9-1-2021
रचयिता-
डा.अंजु लता सिंह ‘प्रियम’
नई दिल्ली

Last Updated on January 9, 2021 by anjusinghgahlot

  • डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'
  • उपाध्यक्ष-राष्ट्रीय महिला काव्य मंच,द.दिल्ली इकाई मंच
  • प्रतिभा विकास मिशन
  • [email protected]
  • C-211,212,paryawaran complex,saidulajab,N.Delhi-30
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

fafa

हिंदी पत्रकारिता का वैश्विक विस्तार: विरासत, विकास और भविष्य का विराट विमर्श

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱हिंदी पत्रकारिता का वैश्विक विस्तार: विरासत, विकास और भविष्य का विराट विमर्श डॉ. शैलेश

123

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों और भविष्य पर होगा व्यापक विमर्श

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों

Leave a Comment

error: Content is protected !!