न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

*प्रेम मिलन की ऋतु आयी है वासंती*

Spread the love
image_pdfimage_print

*प्रेम मिलन की ऋतु आयी है वासंती*
***********************************

रचयिता :

*डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव*
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

 

चलो मिलन का गीत,वसंती कुछ गायें।
राग वसंती धुन आओ,मिल के सजायें।

ये मधुमास मनोहर,मन भावन कितना।
प्रेम मिलन का ये,अनुपम क्षण कितना।

दुर्लभ जीवन में ये,क्षण पायें या न पायें।
आयें मिलके इस,पल को सुखद बनायें।

खिल गईं कलियां,हर डाली बहुत सुहाए।
भौंरे मचल मचल,फूलों पर आएं मंडराए।

फूल एवं कलियाँ,सब देखो कैसे मुस्कायें।
गुलशन का माली,देख छटा मन में हर्षाये।

पतझड़ चला गया,ऋतु वसंत आगमन से।
रंग वसंती छा गया,चहुँ ओर घर आँगन में।

खिलीहै खेतों में सरसो,पीताम्बर ये धरती।
सोंधी मिट्टी से धूल उड़े,बागां में बौर लगती।

मन का कोना कोना,यह प्रसन्न प्रफुल्लित।
प्रेम मिलन के लिए,यह व्याकुल उद्वेलित।

क्यों न मिलन फिर,यह दोनों का हो जाये।
प्रेम मिलन से धरती,अम्बर खुश हो जाये।

विरह की अब कोई,बात नहीं है प्रियतम।
मौसम और ऋतु की, सौगात है प्रियतम।

इस सुख से वंचित ही,फिर क्यों रहा जाये।
चलो मिलन के गीत,वसंती तो गाया जाये।

तुम हो प्रेयसी प्राण हमारी,मैं तेरा प्रियतम।
स्वागत है इस ऋतु वसंत में,तेरा स्वागतम।

 

रचयिता :

*डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव*
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-नार्थ इंडिया
एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता,प.बंगाल
संपर्क : 9415350596

Last Updated on March 2, 2021 by dr.vinaysrivastava

  • डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
  • वरिष्ठ प्रवक्ता
  • पी बी कालेज
  • [email protected]
  • 156 - अभय नगर, प्रतापगढ़ सिटी, उ.प्र., भारत- 230002
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

प्रतीकात्मक छवि

साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम है यह सम्मेलन-डॉ विकास दवे

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम

प्रतीकात्मक छवि

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा साहित्यिक पत्रिकाओं

प्रतीकात्मक छवि

जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श – डॉ. शैलेश शुक्ला

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के

Leave a Comment

error: Content is protected !!