न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

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डिजिटल युग में हिंदी का वैश्विक वितान

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हिंदी दिवस पर विशेष

डिजिटल युग में हिंदी का वैश्विक वितान

 प्रो. सुशील कुमार शर्मा

         भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि किसी सभ्यता की चेतना, स्मृति और पहचान का वाहक है। विश्व की प्राचीनतम जीवित भाषाओं में से एक, हिंदी आज केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल क्रांति के संक्रमण में उसका वैश्विक वितान निरंतर विस्तारित हो रहा है।

एथनोलॉग के 2024-2025 के आंकड़ों के अनुसार:

         हिंदी विश्व की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसके कुल भाषी लगभग 609 मिलियन हैं। इनमें 345 मिलियन मातृभाषी और 264 मिलियन द्वितीय भाषी हैं, जो हिंदी को अंग्रेजी और मंदारिन चीनी के बाद विश्व परिदृश्य में एक अद्वितीय स्थान देता है। इन 609 मिलियन में अगर हिंदी की बोलियों और उर्दू जो कि बोलने में लगभग हिंदी के समान ही है, तो हिंदी बोलने और समझने वालों की संख्या 100 करोड़ से अधिक सिद्ध होती है।

वैश्विक भाषिक परिदृश्य में हिंदी का स्थान:

         हिंदी की संख्यात्मक ताकत ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार-  528 मिलियन लोग हिंदी को अपनी मातृभाषा मानते हैं, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 43.6 प्रतिशत है। जब द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी बोलने वालों, हिंदी की बोलियों और उर्दू बोलने वालों की संख्या को जोड़ा जाता है, तो यह संख्या 1 बिलियन अर्थात 100 करोड़ को पार कर जाती है। हिंदी का यह विशाल भाषिक आधार उसे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक अपार बाजार और अवसर प्रदान करता है। नेपाल में भी एक चौथाई से अधिक जनसंख्या हिंदी बोलती है और फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम और त्रिनिदाद में भी हिंदी भाषी समुदाय मौजूद हैं, जो इसके वैश्विक विस्तार का प्रमाण हैं।

डिजिटल भारत और हिंदी का विस्तार:

         इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया और कांतार की संयुक्त रिपोर्ट इंटरनेट इन इंडिया 2025 के अनुसार-  भारत में सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2025 में 958 मिलियन तक पहुँच गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से ग्रामीण भारत द्वारा संचालित है, जहाँ 548 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ता निवास करते हैं। रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत के 98 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ता भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री का उपभोग करते हैं और हिंदी इनमें सबसे अधिक पसंद की जाने वाली भाषा है। शहरी भारत में भी 57 प्रतिशत उपयोगकर्ता भारतीय भाषाओं में सामग्री की खपत करना पसंद करते हैं, जिसमें हिंदी की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि डिजिटल क्रांति ने हिंदी को केवल बचाया नहीं, बल्कि उसे नई ऊर्जा प्रदान की है।

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हिंदी:

         डिजिटल मंचों पर हिंदी सामग्री का विस्फोटक विकास अभूतपूर्व है। यूट्यूब पर भारत विश्व का सबसे बड़ा बाजार है, जहाँ लगभग 500 मिलियन उपयोगकर्ता सक्रिय हैं। हिंदी इस मंच की प्रमुख भाषा के रूप में स्थापित है। कोफ्लुएंस रिपोर्ट के अनुसार- भारत के 68.2 प्रतिशत डिजिटल सामग्री निर्माता हिंदी को अपनी प्राथमिक भाषा के रूप में उपयोग करते हैं। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार- यूट्यूब क्रिएटर इकोसिस्टम ने भारतीय जीडीपी में 16,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया है और 9.3 लाख से अधिक फुल टाइम नौकरियों को समर्थन प्रदान किया है। इस आर्थिक विस्तार का एक बड़ा हिस्सा हिंदी सामग्री निर्माण के कारण ही संभव हुआ है। विकिपीडिया पर हिंदी की उपस्थिति भी बढ़ रही है। जुलाई 2003 में लॉन्च हुए हिंदी विकिपीडिया में अप्रैल 2026 तक लगभग 169,000 लेख हैं और यह प्रति माह 50 से 70 मिलियन पेज व्यूज प्राप्त करता है। यद्यपि हिंदी के भाषिक आधार की तुलना में यह संख्या अपर्याप्त है, फिर भी जनवरी 2016 से जनवरी 2021 के बीच हिंदी विकिपीडिया की हिस्सेदारी भारत में 2 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई है, जो एक सकारात्मक प्रवृत्ति दर्शाता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी:

         कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हिंदी की उपस्थिति तेजी से मजबूत हो रही है। गूगल के जेमिनी मॉडल वर्तमान में नौ भारतीय भाषाओं में कार्य करता है और 100 से अधिक भारतीय भाषाओं को समझने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। गूगल डीपमाइंड के वरिष्ठ निदेशक मनीष गुप्ता के अनुसार- जेमिनी लगभग 29 भारतीय भाषाओं के बेंचमार्क में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला मॉडल है। सितंबर 2025 में, गूगल ने गूगल सर्च के ए.आई. मोड को वैश्विक स्तर पर हिंदी में उपलब्ध कराया, जिससे हिंदी भाषी उपयोगकर्ता अब अपनी भाषा में जटिल प्रश्न पूछ सकते हैं और ए.आई. संचालित उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। ओपन ए. आई. के जीपीटी-5 ने भी 12 भारतीय भाषाओं में उन्नत प्रदर्शन लाया है और भारत ओपन ए.आई. का अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। इसके अतिरिक्त, भारत में लगभग 28 बड़े भाषा मॉडल ऐसे हैं, जिनमें भारतीय भाषा क्षमताएँ उपलब्ध हैं। बेंगलुरु का स्टार्टअप सर्वम ए.आई. सभी 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं के लिए ए.आई. मॉडल विकसित कर रहा है, जो संप्रभु ए.आई. की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका सर्वम विजन मॉडल भारतीय लिपियों के ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन में वैश्विक मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन करता है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भाषिनी (सरकारी पहल):

         भारत सरकार ने भाषा और प्रौद्योगिकी के संगम को संस्थागत रूप देने के लिए जुलाई 2022 में डिजिटल इंडिया भाषिनी का शुभारंभ किया। यह राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित एक ए.आई. संचालित भाषा अनुवाद मंच है। भाषिनी का उद्देश्य- भारतीय नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं तक आसान पहुँच प्रदान करना है। वर्तमान में भाषिनी 57 भाषाओं में सेवाएँ प्रदान करती है, जिनमें 22 भारतीय और 35 विदेशी भाषाएँ सम्मिलित हैं। इसके मोबाइल ऐप को 1.2 मिलियन से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में भाषिनी का उल्लेख करते हुए कहा था कि वे हिंदी में भाषण देते हैं, लेकिन भाषिनी के माध्यम से तमिलनाडु के लोग उसे तमिल में वास्तविक समय में सुनते हैं। यह तकनीक न केवल भाषा की दीवार गिराती है, बल्कि भारत की बहुभाषिक एकता को मजबूत करती है। भाषिनी की सहायता से संसद के सदस्य अपने भाषणों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में वास्तविक समय में अनुवादित कर सकते हैं। इसका उपयोग न्याय प्रणाली, कृषि परामर्श, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में भी किया जा रहा है।

प्रवासी हिंदी भाषियों का वैश्विक नेटवर्क:

         हिंदी का वैश्विक वितान केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और खाड़ी देशों में फैला हिंदी भाषी प्रवासी समुदाय लगभग 190 मिलियन लोगों का है, जो डिजिटल मंचों पर हिंदी सामग्री की माँग का एक बड़ा स्रोत है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिएटर्स जैसे मिस्टरबीस्ट ने अपनी सामग्री को हिंदी में डब किया है और उनके हिंदी चैनल को भारत में 4.7 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स प्राप्त हुए हैं। यूट्यूब की रिपोर्ट के अनुसार- भारत के 77 प्रतिशत जेन जी उपयोगकर्ता अन्य भाषाओं से अनुवादित या डब की गई सामग्री देखते हैं, जिसमें हिंदी प्राथमिक माध्यम है। यह केवल मनोरंजन का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि हिंदी एक सेतु की भूमिका निभा रही है, जो विभिन्न भाषाई क्षेत्रों को आपस में जोड़ती है।

चुनौतियाँ और अवसर:

         यद्यपि हिंदी का डिजिटल विस्तार प्रोत्साहनकारी है, कई चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं। वैश्विक बड़े भाषा मॉडल मुख्य रूप से अंग्रेजी पर प्रशिक्षित हैं और हिंदी सहित भारतीय भाषाएँ इन मॉडलों में कम प्रतिनिधित्व रखती हैं। कोड मिक्सिंग यानी हिंग्लिश, बोली रूप, और स्थानीय संदर्भों को समझने में वैश्विक ए.आई. मॉडल अभी असंगत रहते हैं। भाषिनी का सार्वजनिक निवेश अब तक लगभग 4.3 मिलियन डॉलर रहा है, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अपर्याप्त माना जाता है। हिंदी डिजिटल सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा के बीच भी एक अंतराल है, जिसे पाटने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है। देवनागरी लिपि की तकनीकी अनुकूलता, कीबोर्ड इनपुट की सुगमता, और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन जैसी तकनीकों की सटीकता में भी सुधार की गुंजाइश है। इन चुनौतियों के बावजूद, अवसर असीमित हैं। भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र यूपीआई, ई-गवर्नेंस प्लेटफार्म जैसे उमंग, और डिजिटल शिक्षा पहल, सभी हिंदी के माध्यम से लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुँच रहे हैं।

निष्कर्षत:

         डिजिटल युग ने हिंदी के लिए एक अभूतपूर्व अवसर पैदा किया है। 958 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं वाला भारत, ए.आई. संचालित भाषा तकनीकी, सरकारी पहल जैसी भाषिनी और एक सशक्त प्रवासी समुदाय, ये सभी कारक मिलकर हिंदी को वैश्विक डिजिटल परिदृश्य की एक प्रमुख भाषा बना रहे हैं। यह आवश्यक है कि भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी के निवेश में वृद्धि की जाए, डिजिटल सामग्री की गुणवत्ता में सुधार हो और हिंदी भाषी समुदाय डिजिटल साक्षरता के साथ आगे बढ़े। डिजिटल युग में हिंदी का वैश्विक वितान केवल एक भाषिक घटना नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत उत्थान का प्रतीक है, जो भविष्य में और अधिक विस्तार पाने वाला है। जिस प्रकार अंग्रेजी ने औद्योगिक क्रांति के युग में वैश्विक वर्चस्व स्थापित किया, उसी प्रकार डिजिटल क्रांति के युग में हिंदी अपना स्थान बना सकती है, बशर्ते कि इस दिशा में ठोस और दीर्घकालिक प्रयास किए जाएँ। हिंदी को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने हेतु भाषाई विविधता और डिजिटल नवाचार जोड़ना आवश्यक है।

Last Updated on September 10, 2026 by srijanaustralia

  • प्रो. सुशील कुमार शर्मा
  • वरिष्ठ आचार्य (हिंदी) एवं  संकायाध्यक्ष, मानविकी एवं भाषा संकाय
  • मिज़ोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय
  • [email protected]
  • मिज़ोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईजोल- 796004
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