तोटक छंद “विरह”
तोटक छंद “विरह” सब ओर छटा मनभावन है।अति मौसम आज सुहावन है।।चहुँ ओर नये सब रंग सजे।दृग देख उन्हें सकुचाय लजे।। सखि आज पिया मन माँहि बसे।सब आतुर होयहु अंग […]
तोटक छंद “विरह” सब ओर छटा मनभावन है।अति मौसम आज सुहावन है।।चहुँ ओर नये सब रंग सजे।दृग देख उन्हें सकुचाय लजे।। सखि आज पिया मन माँहि बसे।सब आतुर होयहु अंग […]
तिलका छंद “युद्ध” गज अश्व सजे।रण-भेरि बजे।।रथ गर्ज हिले।सब वीर खिले।। ध्वज को फहरा।रथ रौंद धरा।।बढ़ते जब ही।सिमटे सब ही।। बरछे गरजे।सब ही लरजे।।जब बाण चले।धरणी दहले।। नभ नाद छुवा।रण