मोटनक छन्द “भारत की सेना”
(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत जीवट के।। माँ को निज शीश नवा कर के।माथे रज भारत की धर […]
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(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत जीवट के।। माँ को निज शीश नवा कर के।माथे रज भारत की धर […]
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(गीतिका छंद) मास सावन की छटा सारी दिशा में छा गयी।मेघ छाये हैं गगन में यह धरा हर्षित भयी।।देख मेघों को सभी चातक विहग उल्लास में।बूँद पाने स्वाति की पक्षी
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