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स्त्री जब खुश होती है बर्तन माजते माजते कपड़े धोते-धोतेरोटी बेलते बेलते सब्जी में छोका लगाते लगातेभी गुनगुनाती है कभी अकेले खामोश चारदीवारी में भी गुनगुनाती है सुबह से शाम […]
स्त्री जब खुश होती है बर्तन माजते माजते कपड़े धोते-धोतेरोटी बेलते बेलते सब्जी में छोका लगाते लगातेभी गुनगुनाती है कभी अकेले खामोश चारदीवारी में भी गुनगुनाती है सुबह से शाम […]
अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता पुरस्कार से नवाजे गए साहित्यकार गोविंद अवस्थी रचनाकार का नाम: Sahity पदनाम: Seva संगठन: सच की दस्तक ईमेल पता: देव क्लासेस अलीगढ़ रामघाट रोड[email protected] पूरा डाक पता:
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अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता पुरस्कार से नवाजे गए साहित्यकार गोविंद अवस्थी उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ शहर के युवा साहित्यकार एवं समाजसेवी गोविंद अवस्थी जी वर्तमान में इंजीनियरिंग के छात्र हैं
छुई मूई के भाँति अप्रत्याशित और खूबसूरत है प्रेम की प्रकृति जिसमें लज्जा है, सज्जा है और औषधीय प्रवृति भी,मगर इतना सुलभ नहीं है किसी का प्रेम पाना,अगर सच में
अंतरराष्ट्रीय देशभक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता तव चरणार्पित बाईस अनमोल भाषा रत्नों से जड़ी अनोखा हार, अर्पित है हे माँ तव चरणों में उपहार। बीच में चमक रही है राजभाषा हिन्दी। जैसे
अंतरराष्ट्रीय देशभक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता तेरे मेरुता तो है ही अमित महान अगाध- अनंत भूमंडल की- आभा हो तुम हे भारत माता। तेरी अगम्य अमित चेतना की कैसी
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।। ग़ज़ल ।।बचपन से भरा कौन मेरा ख्वाब ले गया ।अम्मा की गोद जन्नत-ए-नवाब ले गया ।। कागज़ की कई कश्तियां पानी का किनारा ।।ये कौन दुश्मनी में बेहिसाब ले
मेरी कविताओं के बस सिरे नहीं मिलते.. शुरुआत मिलती है क्यूँ अंत नहीं मिलते.. रंगीन पतंग सी उड़ के पहुँचती है दूर… पीछे लौट नहीं पाती,है कैसी मजबूर.. मुरझाये फूलों
कोरोना काल अवसर या अभिशाप माना कि करोना काल ने कहर है बरसाया। न जाने कितने लोगों को घर पर बैठाया, कई लोगों को अपनों से बिछड़ाया, उन्हें रुलाया,
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