भटकती आत्मा
भटकती आत्मा! चौबीसों घण्टे,नकारात्मकता से युक्तरोज़ाना ख़बरों में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों और मृत्यु-दर के

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया
भटकती आत्मा! चौबीसों घण्टे,नकारात्मकता से युक्तरोज़ाना ख़बरों में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों और मृत्यु-दर के
प्रेम!आजकल प्रभावित है…उपभोक्तावादी बाजारी संस्कृतिऔर फिल्मी देह बाजारी से।फलिभूत कर्ज और उधारी से।रोज नए फूल खिलते,तन से तन
डर कर,थक,ऊब करवह प्रत्येक स्त्री!जो आत्महत्या करके मर गई;कमल और कुमुदिनी थी। और जो जिंदा रह गईफिक्र में
मेरी हार्दिक इच्छा है कि लोग भूल जाएंँ,पपड़ियों की तरह उधड़ते,पंखुड़ियों की बिखरते,उद्वेलित नश्वरता की क्षणभंगुरता में झड़ता
अस्ताचलगामी सूर्य के अवसान पर,मध्य में जीवन की प्रवाहमान सरिता शान्त स्तंभित!मूकदर्शक मैंने देखा,उसका म्लान मुख अचंभित!एक तरफ