मनहरण घनाक्षरी “होली के रंग”
मनहरण घनाक्षरी “होली के रंग” (1) होली की मची है धूम, रहे होलियार झूम,मस्त है मलंग जैसे, डफली बजात है। हाथ उठा आँख मींच, जोगिया की तान खींच,मुख से अजीब […]
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मनहरण घनाक्षरी “होली के रंग” (1) होली की मची है धूम, रहे होलियार झूम,मस्त है मलंग जैसे, डफली बजात है। हाथ उठा आँख मींच, जोगिया की तान खींच,मुख से अजीब […]
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मौक्तिका (रोती मानवता)2*14 (मात्रिक बहर)(पदांत ‘मानवता’, समांत ‘ओती’) खून बहानेवालों को पड़ जाता खून दिखाई,जो उनके हृदयों में थोड़ी भी होती मानवता।पोंछे होते आँसू जीवन में कभी गरीबों के,भीतर छिपी
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