मौक्तिका (जो सत्यता ना पहचानी)
मौक्तिका (जो सत्यता ना पहचानी)2*9 (मात्रिक बहर)(पदांत ‘ना पहचानी’, समांत ‘आ’ स्वर) दूजों के गुण भारत तुम गाते,अपनों की प्रतिभा ना पहचानी।तुम मुख अन्यों का रहे ताकते,पर स्वावलम्बिता ना पहचानी।। […]
मौक्तिका (जो सत्यता ना पहचानी) Read More »




