मीनाक्षी डबास की नई कविता: रिमझिम-रिमिझम
रिमझिम रिमझिम बरसे फुहार मन नाचे मेरा करे पुकार l रिमझिम रिमझिम बरसो पानी भू पर लिख दो फिर नई कहानी रिमझिम रिमझिम कदम बढ़ाए डालों को तुम चलो भिगोएं […]
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हाइकु (ये बालक कैसा) अस्थिपिंजरकफ़न में लिपटाएक ठूँठ सा। पूर्ण उपेक्ष्यमानवी जीवन काकटु घूँट सा। स्लेटी बदनउसपे भाग्य लिखेमैलों की धार। कटोरा लिएएक मूर्त ढो रहीतन का भार। लाल लोचनअपलक
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सार छंद “भारत गौरव” जय भारत जय पावनि गंगे, जय गिरिराज हिमालय;सकल विश्व के नभ में गूँजे, तेरी पावन जय जय।तूने अपनी ज्ञान रश्मि से, जग का तिमिर हटाया;अपनी
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