Sushil Kumar Sharma - article on प्रेमचंद

प्रेमचंद आज भी हमारे बीच हैं: साहित्य से समाज के आईने तक

प्रेमचंद आज भी हमारे बीच हैं: साहित्य से समाज के आईने तकभारतीय चेतना के पुरोधा मुंशी प्रेमचंद का साहित्य वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों का भी सशक्त दस्तावेज प्रो. सुशील […]

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