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ऑल इंडिया रेडियो के नामकरण की 90वीं वर्षगाँठ पर कार्यक्रम 8 जून 2025 को

विशेष  रिपोर्ट
                                                         ऑल इंडिया रेडियो के नामकरण की 90वीं वर्षगाँठ पर                                                                      ‘‘रेडियो पर हिंदी पत्रकारिता : विविध आयाम’’ विषय पर विषय-विशेषज्ञ से वार्ता कार्यक्रम 8 जून 2025 को

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के अंतर्गत ‘रेडियो पर हिंदी पत्रकारिता : विविध आयाम’ विषय पर एक विशेष विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 8 जून 2025, रविवार को शाम 5:00 बजे किया जाएगा। इस आयोजन का विशेष महत्व इस तथ्य से भी जुड़ा है कि इस वर्ष ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (All India Radio) के नामकरण की 90वीं वर्षगाँठ भी मनाई जा रही है, जो रेडियो के ऐतिहासिक योगदान को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।

यह कार्यक्रम ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा), आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्य प्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इन्स्टिच्यूशन, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय तथा सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, मधुराक्षर आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

इस विशेषज्ञ वार्ता में विषय-विशेषज्ञ के रूप में श्री विनय राज तिवारी आमंत्रित हैं, जो एक वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पूर्व उप निदेशक (भारतीय सूचना सेवा) और अधिवक्ता के रूप में हिंदी पत्रकारिता और रेडियो के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं।

श्री तिवारी का योगदान विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत, विशेषकर सिक्किम और मिजोरम में हिंदी पत्रकारिता के प्रचार-प्रसार में अत्यंत सराहनीय रहा है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण से हिंदी पत्रकारिता को रेडियो के क्षेत्र में नई ऊर्जा और दिशा मिल सकती है।

कार्यक्रम में वार्ताकार एवं मंच संचालक की भूमिका डॉ. शैलेश शुक्ला निभाएंगे, जो स्वयं वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, साहित्यकार एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक हैं।

डॉ. शुक्ला के निर्देशन में यह वार्ता और भी अधिक रोचक और ज्ञानवर्धक बन जाएगी।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेडियो पत्रकारिता में हिंदी भाषा के ऐतिहासिक योगदान, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करना है। इसके अंतर्गत रेडियो प्रसारण में हिंदी समाचार, फीचर, वार्ता, विज्ञापन और श्रोताओं के जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही ऑल इंडिया रेडियो के नामकरण की 90वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इसके ऐतिहासिक सफर, विकास यात्रा और हिंदी पत्रकारिता में योगदान को भी याद किया जाएगा। यह आयोजन इस बात को भी रेखांकित करेगा कि डिजिटल युग में रेडियो पत्रकारिता किस प्रकार नए अवसरों और चुनौतियों का सामना कर रही है और इसमें हिंदी भाषा किस प्रकार अपनी उपस्थिति को सशक्त बना रही है।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. कल्पना लालजी (राष्ट्रीय संयोजक, सृजन मॉरीशस), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री (संस्थापक-संपादक, मधुराक्षर), प्रो. रतन कुमारी वर्मा (जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज), डॉ. हृदय नारायण तिवारी (एकलव्य विश्वविद्यालय), श्री कपिल कुमार (वरिष्ठ पत्रकार, सृजन यूरोप), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (राष्ट्रीय संपादक, सृजन मॉरीशस), श्री अरुण नामदेव (राष्ट्रीय संपादक, सृजन अमेरिका), शालिनी गर्ग (राष्ट्रीय संपादक, सृजन कतर), प्रो. आशा शुक्ला (संरक्षक) और प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (मार्गदर्शक) सहित अनेक विद्वानों का योगदान भी सुनिश्चित किया गया है।

इस कार्यक्रम के आयोजन में श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (मुख्य संयोजक एवं संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) और श्री प्रशांत चौबे (संयोजक, अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) की सक्रिय भूमिका रही है, जो कार्यक्रम की सफलता के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।

कार्यक्रम के महत्व को समझते हुए आयोजकों ने हिंदी पत्रकारिता, रेडियो जगत और सामाजिक विज्ञान से जुड़े सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों और भाषा प्रेमियों से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सहभागी बनने का आग्रह किया है। यह आयोजन न केवल हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा, बल्कि रेडियो पत्रकारिता के नए युग में हिंदी की भूमिका को और अधिक प्रासंगिक एवं प्रभावशाली बनाने में भी मददगार होगा। कार्यक्रम की समस्त जानकारी और पंजीकरण विवरण अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 के आधिकारिक लिंक https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर उपलब्ध हैं।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

आयोजकों का विश्वास है कि यह आयोजन हिंदी भाषा के क्षेत्र में रेडियो पत्रकारिता की विविधता, संभावनाओं और चुनौतियों पर सार्थक संवाद स्थापित करेगा और हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नई ऊँचाइयाँ देगा।




‘राजभाषा हिंदी और बैंकिंग : विविध आयाम’ विषय पर विषय-विशेषज्ञ से वार्ता वार्ता 7 जून 2025 को

7 जून को 7वें विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर विशेष रिपोर्ट
राजभाषा हिंदी और बैंकिंग : विविध आयाम’ विषय पर आयोजित होगी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ वार्ता

7 जून, 2025 को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर ‘राजभाषा हिंदी और बैंकिंग : विविध आयाम’ विषय पर एक विशेष विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन किया जा रहा है।

 

यह कार्यक्रम हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर 30 मई 2025 से 30 जून 2025 तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के अंतर्गत होगा। यह कार्यक्रम ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा), आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह), अमरावती ग्रुप ऑफ इन्स्टिच्यूशन, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय सहित सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप और मधुराक्षर जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएँ और संस्थान भी सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।

 

इस कार्यक्रम के अंतर्गत विषय-विशेषज्ञ के रूप में गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राजभाषा गौरव पुरस्कार से सम्मानित डॉ. साकेत सहाय, वरिष्ठ लेखक, भाषाकर्मी एवं मुख्य प्रबंधक (राजभाषा), पंजाब नेशनल बैंक, अंचल कार्यालय, हैदराबाद आमंत्रित हैं।

डॉ. सहाय हिंदी, जनसंचार और बैंकिंग के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखते हैं और 500 से अधिक लेख एवं समीक्षाएँ राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित कर चुके हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया : भाषिक संस्कार एवं संस्कृति’, ‘जन बैंकिंग: ई-बैंकिंग’ और ‘वित्त, बैंकिंग व भाषा: विविध आयाम’ शामिल हैं। वे हिंदी भाषा में वित्तीय एवं बैंकिंग विषयों को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। डॉ. सहाय ने भारतीय वायु सेना एवं बैंकिंग उद्योग में कार्य करते हुए भाषा, संचार, वित्त एवं सोशल मीडिया जैसे विषयों पर 100 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र भी प्रस्तुत किए हैं।

कार्यक्रम में वार्ताकार और मंच संचालक के रूप में डॉ. शैलेश शुक्ला उपस्थित रहेंगे, जो वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, साहित्यकार और ‘सृजन ऑस्ट्रेलिया’, ‘सृजन मॉरीशस’, ‘सृजन अमेरिका’, ‘सृजन यूरोप’, ‘सृजन मलेशिया’ और ‘सृजन थाईलैंड’ जैसी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के वैश्विक प्रधान संपादक भी हैं।

कार्यक्रम का आयोजन 7 जून 2025 को शाम 7:30 बजे निर्धारित किया गया है। इस वार्ता का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में राजभाषा हिंदी के विविध आयामों पर गहन विमर्श करना है, ताकि हिंदी भाषा का प्रयोग बैंकिंग सेवाओं में और अधिक सशक्त हो सके। इसके अंतर्गत ई-बैंकिंग, डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय शब्दावली, ग्राहक सेवा में हिंदी भाषा की भूमिका, राजभाषा कानूनों का अनुपालन, तथा तकनीकी शब्दावली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

कार्यक्रम की विशेषता यह भी है कि हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष और अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह के उत्सव में यह आयोजन ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ के अवसर पर किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और वैश्विक विषयों से जुड़कर कैसे भारतीय समाज और वैश्विक हिंदी समाज में सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।

कार्यक्रम में डॉ. कल्पना लालजी (राष्ट्रीय संयोजक, सृजन मॉरीशस), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री (संस्थापक-संपादक, मधुराक्षर), प्रो. रतन कुमारी वर्मा (जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज), डॉ. हृदय नारायण तिवारी (एकलव्य विश्वविद्यालय), श्री कपिल कुमार (वरिष्ठ पत्रकार, सृजन यूरोप), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (राष्ट्रीय संपादक, सृजन मॉरीशस), श्री अरुण नामदेव (राष्ट्रीय संपादक, सृजन अमेरिका), शालिनी गर्ग (राष्ट्रीय संपादक, सृजन कतर), ब्राउस की पूर्व कुलगुरु माननीय प्रो. आशा शुक्ला (संरक्षक) और मॉरीशस स्थित विश्व हिंदी सचिवालय के पूर्व महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (मार्गदर्शक) सहित अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और विद्वानों की सहभागिता रहेगी।

 

कार्यक्रम के आयोजन के लिए मुख्य संयोजक के रूप में श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) तथा संयोजक श्री प्रशांत चौबे (संस्थापक-निदेशक, अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह आयोजन हिंदी भाषा के संवर्धन एवं बैंकिंग क्षेत्र में उसकी महत्ता को रेखांकित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश-विदेश में हिंदी के प्रयोग को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम के समस्त विवरण और पंजीकरण की जानकारी के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के आधिकारिक लिंक https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर भी उपलब्ध है। आयोजकों ने हिंदी प्रेमियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सभी व्यक्तियों से इस महत्वपूर्ण संवाद का हिस्सा बनने का अनुरोध किया है, ताकि हिंदी भाषा के वैश्विक परिदृश्य में एक नया आयाम स्थापित किया जा सके।

यह कार्यक्रम ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इसके सहयोगी संस्थानों में त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज्म, बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्यप्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज (प्रयागराज), शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय (सूरजपुर), सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, मधुराक्षी आदि पत्रिकाएँ एवं संस्थाएँ शामिल हैं। इस बहुआयामी आयोजन से हिंदी भाषा, पत्रकारिता और साहित्य को वैश्विक मंच पर नया आयाम मिलने की संभावना प्रबल है।

उन्होंने न केवल यूके में हिंदी लेखन, संपादन और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि भारतीय संस्कृति को भी विश्व पटल पर सशक्त किया है। उनके अनुभवों से श्रोतागण हिंदी पत्रकारिता के वैश्विक आयामों को समझने का एक दुर्लभ अवसर प्राप्त करेंगे।

कार्यक्रम का मंच संचालन और वार्तालाप वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला करेंगे।

डॉ. शुक्ला का नाम हिंदी पत्रकारिता, साहित्य और राजभाषा के क्षेत्र में एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हिंदी के विकास, प्रचार-प्रसार एवं वैश्वीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उनके संयोजन में यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक बनने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े संयोजकों में मॉरीशस की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. कल्पना लालजी, कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, प्रो. रतन कुमारी वर्मा, डॉ. हृदय नारायण तिवारी, श्री कपिल कुमार, डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, श्री अरुण नामदेव और शालिनी गर्ग जैसे अनुभवी और समर्पित विद्वान शामिल हैं। इनके साथ संरक्षक के रूप में इंदौर के महु में स्थित भीम राव अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की  पूर्व कुलगुरु माननीय प्रो. आशा शुक्ला और मॉरीशस स्थित  विश्व हिंदी सचिवालय के पूर्व महासचिव  माननीय प्रो. विनोद कुमार मिश्र का मार्गदर्शन भी इस आयोजन को विशिष्ट नेतृत्व प्रदान कर रहा है।

यह कार्यक्रम हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है, जिसमें यूके में हिंदी के विविध आयामों को समझने और वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के भविष्य की दिशा तय करने के लिए विशेषज्ञों के अनुभवों और विचारों को साझा किया जाएगा। कार्यक्रम के सभी विवरणों के लिए आयोजकों द्वारा लिंक https://srijanaustralia.srijansansar.com/ भी उपलब्ध कराया गया है।

यह आयोजन निश्चित ही हिंदी पत्रकारिता के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा, जिससे हिंदी प्रेमियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा को और भी व्यापक बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

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और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

 न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन तथा अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन विश्वस्तरीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता की स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ मंच पर लाकर संवाद, विमर्श और नवाचार की दिशा में एक निर्णायक पहल करेगा। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है, बल्कि डिजिटल युग में उसके बदलते स्वरूप को भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनाता है। यह महीना निश्चित रूप से हिंदी के लिए एक नई जागरूकता, आत्मगौरव और अंतरराष्ट्रीय संवाद का उत्सव सिद्ध होगा।




‘यूके में हिंदी: विविध आयाम’ विषयक वार्ता का भव्य आयोजन 6 जून को

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह-2025 के अंतर्गत ‘यूके में हिंदी: विविध आयाम’ विषयक वार्ता का भव्य आयोजन

हिंदी पत्रकारिता के 200 गौरवशाली वर्षों के अवसर पर 30 मई 2025 से 30 मई 2026 तक ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष-2025-26’ के रूप में भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 30 मई से 30 जून 2025 तक ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह-2025’ के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की शृंखला में 6 जून 2025 को शाम 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार) ‘यूके में हिंदी: विविध आयाम’ विषय पर एक महत्वपूर्ण वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह आयोजन छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 352वीं वर्षगाँठ के अवसर पर किया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रगौरव के लिए विशेष महत्व रखता है।

यह कार्यक्रम ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इसके सहयोगी संस्थानों में त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज्म, बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्यप्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज (प्रयागराज), शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय (सूरजपुर), सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, मधुराक्षी आदि पत्रिकाएँ एवं संस्थाएँ शामिल हैं। इस बहुआयामी आयोजन से हिंदी भाषा, पत्रकारिता और साहित्य को वैश्विक मंच पर नया आयाम मिलने की संभावना प्रबल है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, मुख्य सचिव कथा (यूके) एवं ‘द पुरवाई’ पत्रिका के प्रधान संपादक श्री तेजेंद्र शर्मा आमंत्रित हैं।

उन्होंने न केवल यूके में हिंदी लेखन, संपादन और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि भारतीय संस्कृति को भी विश्व पटल पर सशक्त किया है। उनके अनुभवों से श्रोतागण हिंदी पत्रकारिता के वैश्विक आयामों को समझने का एक दुर्लभ अवसर प्राप्त करेंगे।

कार्यक्रम का मंच संचालन और वार्तालाप वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला करेंगे।

डॉ. शुक्ला का नाम हिंदी पत्रकारिता, साहित्य और राजभाषा के क्षेत्र में एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हिंदी के विकास, प्रचार-प्रसार एवं वैश्वीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उनके संयोजन में यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक बनने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े संयोजकों में मॉरीशस की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. कल्पना लालजी, कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, प्रो. रतन कुमारी वर्मा, डॉ. हृदय नारायण तिवारी, श्री कपिल कुमार, डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, श्री अरुण नामदेव और शालिनी गर्ग जैसे अनुभवी और समर्पित विद्वान शामिल हैं। इनके साथ संरक्षक के रूप में इंदौर के महु में स्थित भीम राव अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की  पूर्व कुलगुरु माननीय प्रो. आशा शुक्ला और मॉरीशस स्थित  विश्व हिंदी सचिवालय के पूर्व महासचिव  माननीय प्रो. विनोद कुमार मिश्र का मार्गदर्शन भी इस आयोजन को विशिष्ट नेतृत्व प्रदान कर रहा है।

यह कार्यक्रम हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है, जिसमें यूके में हिंदी के विविध आयामों को समझने और वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के भविष्य की दिशा तय करने के लिए विशेषज्ञों के अनुभवों और विचारों को साझा किया जाएगा। कार्यक्रम के सभी विवरणों के लिए आयोजकों द्वारा लिंक https://srijanaustralia.srijansansar.com/ भी उपलब्ध कराया गया है।

यह आयोजन निश्चित ही हिंदी पत्रकारिता के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा, जिससे हिंदी प्रेमियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा को और भी व्यापक बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

 न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन तथा अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन विश्वस्तरीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता की स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ मंच पर लाकर संवाद, विमर्श और नवाचार की दिशा में एक निर्णायक पहल करेगा। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है, बल्कि डिजिटल युग में उसके बदलते स्वरूप को भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनाता है। यह महीना निश्चित रूप से हिंदी के लिए एक नई जागरूकता, आत्मगौरव और अंतरराष्ट्रीय संवाद का उत्सव सिद्ध होगा।




अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 का भव्य शुभारंभ : राजदूत अखिलेश मिश्रा के आशीर्वचनों से होगा भव्य उद्घाटन

अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 का भव्य शुभारंभ : राजदूत अखिलेश मिश्रा के आशीर्वचनों से होगा भव्य उद्घाटन
हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते हुए तथा आने वाले समय की संभावनाओं को दिशा देने के उद्देश्य से ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ का आयोजन 30 मई से 30 जून तक पूरे एक महीने तक वैश्विक स्तर पर किया जा रहा है। इस भव्य आयोजन की परिकल्पना न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा की गई है, जिसमें विश्व के विभिन्न देशों की हिंदी संस्थाएँ, विश्वविद्यालय, पत्रिकाएँ और विद्वान शामिल हो रहे हैं। आयोजन का शुभारंभ 30 मई 2025 को सायं 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार) होगा और यह शुभारंभ समारोह गूगल मीट के माध्यम से वर्चुअल रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें हिंदी जगत की कई विशिष्ट विभूतियाँ भाग लेंगी।

इस भव्य उद्घाटन समारोह में माननीय श्री अखिलेश मिश्रा, भारत सरकार के आयरलैंड स्थित राजदूत, अपने विशेष आशीर्वचन के साथ आयोजन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जी.पी. प्रसाईं शुभकामनाएं प्रेषित करेंगे तथा प्रो. कन्हैया त्रिपाठी (डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय), प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस), प्रो. हरीश कुमार (महाराजा दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक), प्रो. पूरन चंद टंडन (दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. पवन कुमार जैन (कुलपति, एकलव्य विश्वविद्यालय) एवं प्रो. आशा शुक्ला (पूर्व कुलपति, ब्राउस, महू सहित अनेक प्रतिष्ठित वक्ता हिंदी पत्रकारिता के विविध पहलुओं पर अपने विचार प्रकट करेंगे। समापन पुनः श्री अखिलेश मिश्रा द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन और अंत में प्रो. जी.पी. प्रसाईं का अध्यक्षीय वक्तव्य दिया जाएगा।

यह उद्घाटन कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता के एक वैश्विक मंच के रूप में आयोजित हो रहा है, जहाँ विभिन्न देशों के विद्वान, शोधकर्ता, पत्रकार, विद्यार्थी और मीडिया विश्लेषक भागीदारी करेंगे। आयोजन की विशेषता यह है कि पूरे माहभर दैनिक संगोष्ठियाँ, अंतरराष्ट्रीय शोध संवाद, विशेष व्याख्यान, पुस्तक विमोचन, पत्रिकाओं के विशेषांक, हिंदी और मीडिया पर आधारित प्रशिक्षण सत्र, रचनात्मक प्रतियोगिताएं और अनुवाद कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनका सीधा प्रसारण डिजिटल मंचों पर किया जाएगा।
इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 का भव्य शुभारंभ की कार्यक्रम सूची इस प्रकार है 

7:30 – 7:35          : कार्यक्रम का शुभारंभ

7:35 – 7:40          : सभी गणमान्य अतिथियों का परिचय   एवं स्वागत – कार्यक्रम संचालक

7:40 – 7:45          : आशीर्वचन – श्री अखिलेश मिश्रा (राजदूत, आयरलैंड)

7:45 – 7:50          : शुभकामनाएं – प्रो. जी.पी. प्रसाईं, माननीय कुलपति, त्रिपुरा विश्वविद्यालय

7:50 – 8:00          : प्रो. कन्हैया त्रिपाठी, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय

8:00 – 8:10          : प्रो. विनोद कुमार मिश्रा, पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालयमॉरीशस एवं अधिष्ठाता, साहित्य                                                          संकाय, त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्याल

8:10 – 8:20          : प्रो. हरीश कुमार, विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक 

8:20 – 8:30          : प्रो. पूरन चंद टंडन, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली विवि, एवं निदेशक, भारतीय अनुवाद परिषद

8:30 – 8:40           : प्रो. पवन कुमार जैन, माननीय कुलपति, एकलव्य विश्वविद्यालय

8:40 –  8:50          : प्रो. आशा शुक्ला, माननीय पूर्व कुलपति, ब्राउस, महु, इंदौर, मध्य प्रदेश

8:50 – 9:00           : मुख्य अतिथि का संबोधन श्री अखिलेश मिश्रा, माननीय राजदूत, आयरलैंड

9:00 – 9:10           : अध्यक्षीय वक्तव्य – प्रो. जी.पी. प्रसाईं, माननीय कुलपति, त्रिपुरा विश्वविद्यालय

9:10 – 9:15            : धन्यवाद ज्ञापन – संचालक डॉ. शैलेश शुक्ला, वैश्विक प्रधान संपादक, सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह 

 न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन तथा अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन विश्वस्तरीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता की स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ मंच पर लाकर संवाद, विमर्श और नवाचार की दिशा में एक निर्णायक पहल करेगा। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है, बल्कि डिजिटल युग में उसके बदलते स्वरूप को भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनाता है। यह महीना निश्चित रूप से हिंदी के लिए एक नई जागरूकता, आत्मगौरव और अंतरराष्ट्रीय संवाद का उत्सव सिद्ध होगा।




अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 : वैश्विक स्तर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का भव्य आयोजन

अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 : वैश्विक स्तर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का भव्य आयोजन

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गरिमामयी यात्रा के स्मरणीय अवसर पर एक अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय आयोजन “अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025” का आयोजन 30 मई से 30 जून 2025 तक किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन  के सहयोग से यह आयोजन त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा, आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्य प्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इन्स्टिच्यूशन, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, प्रयागराज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, मधुराक्षर जैसी विश्व की अग्रणी अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रिकाओं और कई वैश्विक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में विविध स्तरों पर आयोजित किया जा रहा है। इस पूरे आयोजन का उद्देश्य वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक, समकालीन और भविष्यगत भूमिका पर विमर्श, शोध, विश्लेषण और उत्सव के माध्यम से एक व्यापक संवाद स्थापित करना है।

पूरे माह भर चलने वाले इस उत्सव के अंतर्गत 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ, वैश्विक शोध लेखन प्रतियोगिताएँ, हिंदी पुस्तकों का लोकार्पण, ऑनलाइन कार्यशालाएँ, कवि सम्मेलन, लेखन कार्यशालाएं, तकनीकी कार्यशालाएं,लेखकों के साथ बातचीत, युवा पत्रकारों हेतु प्रशिक्षण कार्यशालाएं,  दूरदराज क्षेत्रों में हिंदी पत्रकारिता पर सेमिनार, थीम आधारित पोस्टर प्रतियोगिताएँ, हिंदी ब्लॉगिंग और पॉडकास्टिंग से जुड़े नवाचारों पर प्रदर्शनियाँ, और विशेषांक/विचार गोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं। इन आयोजनों में प्रयागराज, बरेली (रूहेलखंड), दमोह (मध्यप्रदेश), त्रिपुरा (पूर्वोत्तर भारत), पंजाब, थाईलैंड, मॉरीशस, मलेशिया, अमेरिका, कतर, ऑस्ट्रेलिया आदि में हाइब्रिड मोड में संगोष्ठियाँ आयोजित होंगी, जिनमें सैकड़ों शोधार्थी, पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और भाषाविद् प्रतिभागिता करेंगे।

 

एक माह से अधिक समय तक चलने वाले इस ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता-माह’ का उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता की दशा-दिशा, डिजिटल माध्यमों में हिंदी की सशक्त उपस्थिति, सोशल मीडिया में हिंदी की भूमिका, नागरिक पत्रकारिता, आंचलिक पत्रकारिता की चुनौतियाँ और संभावनाएँ, तकनीकी नवाचारों में हिंदी का स्थान, और पत्रकारिता में नैतिकता जैसे मुद्दों पर समसामयिक और अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है। इन संगोष्ठियों में प्राप्त लेखों को आईएसबीएन युक्त पुस्तकों एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाएगा जिनका लोकार्पण वैश्विक स्तर पर किया जाएगा। आयोजन की संयोजिका पूनम चतुर्वेदी शुक्ला, संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, ने बताया कि प्रत्येक संगोष्ठी को हिंदी के एक प्रमुख विषय से जोड़ा गया है जिससे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी पत्रकारिता के योगदान पर एक समग्र दृष्टिकोण सामने लाया जा सके।

 

 

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की एक विशेष पहल है “अंतरराष्ट्रीय शोधपरक समीक्षात्मक आलेख लेखन प्रतियोगिता” जो डॉ. शैलेश शुक्ला की चर्चित पुस्तक हिंदी भाषा और तकनीक” पर केंद्रित है। इस प्रतियोगिता में वैश्विक स्तर पर शोधार्थी, विद्यार्थी, लेखक, भाषा प्रेमी, शिक्षक भाग ले सकते हैं। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य हिंदी और तकनीक के समागम पर शोध को बढ़ावा देना और डिजिटल युग में हिंदी की बदलती भूमिका पर विमर्श को गहराई देना है। प्रतियोगिता पूर्णतः निःशुल्क है और उत्कृष्ट आलेखों को सम्मानित करने के साथ-साथ प्रकाशित भी किया जाएगा। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार राशि के अतिरिक्त पुस्तकें भी भेंट की जाएँगी।

 

कार्यक्रमों की पूरी सूची में प्रयागराज की हिंदी पत्रकारिता, रूहेलखंड में डिजिटल पत्रकारिता, मध्यप्रदेश में हिंदी साहित्य और मीडिया, थाईलैंड में डिजिटल मीडिया, पूर्वोत्तर भारत की मीडिया चुनौतियाँ, छत्तीसगढ़ और पंजाब में डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी पत्रकारिता की भूमिका जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इन सभी आयोजनों में प्राप्त शोध आलेखों का संकलन पुस्तकों में प्रकाशित होगा जिनमें प्रो. आशा शुक्ला, डॉ. शैलेश शुक्ला, प्रो. हरीश अरोड़ा, प्रो. विनोद कुमार मिश्र, प्रो. रतन कुमारी वर्मा, डॉ. आकांक्षा मिश्र, डॉ. हृदयनारायण तिवारी, डॉ. कन्हैया त्रिपाठी सहित अनेक संपादक और सह-संपादकगण कार्य कर रहे हैं।



इन आयोजनों को डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्यापक प्रचार मिल रहा है और हिंदी पत्रकारिता से जुड़े संगठनों, विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई है।

 

इस अभियान ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता केवल जीवित ही नहीं बल्कि सशक्त, आधुनिक और वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान बना रही है। आयोजकों ने अपील की है कि सभी हिंदीप्रेमी, शोधार्थी, पत्रकार, शिक्षाविद और युवा इस वैश्विक प्रयास का हिस्सा बनें और हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली भविष्य की नींव में अपना योगदान दें।

 

अधिक जानकारी हेतु ईमेल: [email protected] और वेबसाइट: https://srijanaustralia.srijansansar.com के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।

पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

संस्थापक-निदेशक

अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन एवं

न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन

प्रशांत चौबे

संस्थापक-निदेशक

अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन




अंतरराष्ट्रीय शोध आलेख प्रतियोगिता

अंतरराष्ट्रीय शोध आलेख प्रतियोगिता

उद्देश्य

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका आदि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं एवं विश्व की विभिन्न संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में 30 मई से 30 जून 2025 तक मनाए जा रहे ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के अंतर्गत आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय शोधपरक समीक्षात्मक आलेख लेखन प्रतियोगिता का उद्देश्य शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं भाषा-प्रेमियों को हिंदी भाषा और तकनीक”  विषय पर समकालीन विमर्श हेतु प्रोत्साहित करना है, साथ ही डॉ. शैलेश शुक्ला  की विचारधारा, तकनीकी दृष्टि एवं अनुभवजन्य विश्लेषण पर आधारित शोध-सामग्री एवं विमर्श का सृजन कराना है।

                     पुरस्कार विवरण

    पुरस्कार श्रेणी                 : राशि (INR)

प्रथम पुरस्कार                : ₹3100/-

द्वितीय पुरस्कार              : ₹2100/-

तृतीय पुरस्कार                : ₹1100/-

           प्रोत्साहन पुरस्कार (5)         : ₹551/- प्रति विजेता

विशेष : प्रतियोगिता में प्राप्त सभी उच्च गुणवत्ता वाले आलेखों  को ISBN युक्त पुस्तक / शोध-पत्रिका / डिजिटल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।

आधार-पुस्तक

पुस्तक का नाम : हिंदी भाषा और तकनीक
लेखक : डॉ. शैलेश शुक्ला
प्रकाशक : न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ
प्रकाशन वर्ष : 2024, आईएसबीएन : 978-81-949867-3-7

पुस्तक नीचे दिए गए लिंक और क्यू आर कोड – दोनों पर उपलब्ध है :- https://tinyurl.com/BookByDrShaileshShukla 

 

प्रतियोगिता की शर्तें और दिशानिर्देश

  1. शोधपरक समीक्षात्मक आलेख हेतु शब्द सीमा : 2500 से 5000 शब्द
  2. संरचना : आलेख में निम्न अनुभाग अनिवार्य रूप से सम्मिलित हों :-
    • सारांश (Abstract): 250–300 शब्द
    • बीज शब्द (Key Words): 8–10
    • परिचय (Introduction)
    • मुख्य आलेख (Main Body) – तर्क, विश्लेषण, उदाहरण, तुलनाएँ आदि सहित
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • संदर्भ सूची (References) – APA शैली में या अन्य मानक अनुसंधान शैली में
    • तकनीकी प्रारूप : Font: यूनिकोड फॉन्ट (मंगल / निर्मला / कोकिला / कोई और युनिकोड फॉन्ट)
    • स्पेस : 1.5
    • प्रविष्टि हेतु फॉर्मैट : MS Word (Doc)
    • भाषा : केवल हिंदी
  3. प्रविष्टि जमा करने की अंतिम तिथि : 25 जून 2025 शाम 6 बजे तक
    • प्रविष्टियाँ भेजने का माध्यम: ईमेल: [email protected]
    • ईमेल विषय (Subject Line) :-

हिंदी भाषा और तकनीक पुस्तक पर आधारित शोधपरक समीक्षात्मक आलेख प्रतियोगिता हेतु प्रविष्टि” 

मौलिकता (Originality)

  1. आलेख स्वयं लिखा गया होना चाहिए।
  2. 100% मौलिक (Plagiarism-free) हो। पुस्तक से कुछ भी उद्धृत करने पर संदर्भ अवश्य दिया जाए।
  3. AI जनरेटेड कंटेंट, कॉपी-पेस्ट लेख को अस्वीकार कर दिया जाएगा।
  4. आयोजक मंडल द्वारा प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर से जांच की जाएगी।

 

प्रतियोगिता हेतु शोधपरक समीक्षात्मक आलेखों के विषयों की सूची

प्रतियोगिता हेतु लेखक / शोधार्थीगण / प्राध्यापकगण निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक या पुस्तक ‘हिंदी भाषा और तकनीक’ की शोधपरक समीक्षा पर आधारित अन्य संबंधित विषय का चयन कर सकते हैं :-

1. डॉ. शैलेश शुक्ला के लेखन में इंटरनेट युग और हिंदी भाषा की पहचान

2. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के आलोक में डिजिटल सामग्री निर्माण और उपभोग का विश्लेषण

3. सोशल मीडिया में हिंदी की शक्ति: डॉ. शैलेश शुक्ला की आलोचनात्मक दृष्टि

4. ई-कॉमर्स और हिंदी का संबंध: डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के संदर्भ में

5. हिंदी टाइपिंग तकनीक: डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुभवों की समीक्षा

6. यूनिकोड और तकनीकी मानकीकरण पर डॉ. शैलेश शुक्ला का योगदान

7. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक में फोनेटिक बनाम इनस्क्रिप्ट की तुलना

8. हिंदी फॉन्ट्स का विकास: डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि से

9. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा प्रस्तुत हिंदी टाइपिंग साक्षरता की चुनौतियाँ और समाधान

10. डॉ. शैलेश शुक्ला के विश्लेषण में सोशल मीडिया ब्रांडिंग में हिंदी की भूमिका

11. सोशल मीडिया मार्केटिंग टूल्स की समीक्षा: डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति के आधार पर

12. डॉ. शैलेश शुक्ला के विचारों में सामाजिक अभियानों में हिंदी की शक्ति

13. ग्रामीण भारत में डिजिटल हिंदी का प्रसार: डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टिकोण से

14. डॉ. शैलेश शुक्ला के विश्लेषण में युवाओं की डिजिटल संस्कृति और हिंदी

15. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी: डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक का विश्लेषण

16. हिंदी अनुवाद तकनीकों पर डॉ. शैलेश शुक्ला का शोधपरक मूल्यांकन

17. नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग में हिंदी की संभावनाएँ: डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुसार

18. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक में रोबोटिक्स और हिंदी भाषा का संगम

19. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा रचित हिंदी-अनुवाद में सांस्कृतिक अंतर्वस्तु की भूमिका

20. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में डिजिटल प्रकाशन: लेखक, पाठक और प्लेटफॉर्म

21. हिंदी डिजिटल पाठकों की प्रवृत्तियाँ: डॉ. शैलेश शुक्ला की अंतर्दृष्टि

22. ई-शिक्षा में हिंदी भाषा का स्थान: डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के आलोक में

23. हिंदी और SEO के तकनीकी पक्ष: डॉ. शैलेश शुक्ला की समीक्षा

24. भविष्य की ओर हिंदी और तकनीक: डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक का विमर्शात्मक विश्लेषण

25. डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुभवों में डिजिटल पत्रकारिता और हिंदी भाषा का परिदृश्य

26. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में पॉडकास्ट, यूट्यूब और डिजिटल साहित्य में हिंदी की भूमिका

27. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के आलोक में मोबाइल ऐप्स और हिंदी भाषा का प्रयोग

28. डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति में डिजिटल हिंदी कविता और छवि प्रस्तुति की प्रवृत्तियाँ

29. ब्लॉगिंग संस्कृति और हिंदी अभिव्यक्ति: डॉ. शैलेश शुक्ला की वैचारिक पृष्ठभूमि

30. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा प्रतिपादित हिंदी की डिजिटल लेखन शैली और भाषा प्रवाह

31. राजभाषा नीति और तकनीकी साधनों का समन्वय: डॉ. शैलेश शुक्ला का विश्लेषण

32. डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुसार सरकारी संस्थानों में तकनीकी हिंदी का व्यवहारिक पक्ष

33. डॉ. शैलेश शुक्ला के विचारों में हिंदी के तकनीकी टूल्स का प्रशिक्षण पक्ष

34. डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति में डिजिटल हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता

35. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में डिजिटल साहित्य की गुणवत्ता और प्रामाणिकता

36. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा प्रतिपादित टेक्स्ट, इमेज और वीडियो रूप में हिंदी की बहुविधता

37. डॉ. शैलेश शुक्ला के आलेखों में तकनीकी नवाचार और हिंदी साहित्य का समन्वय

38. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक में हिंदी तकनीक की चुनौतियाँ और सुधार के सुझाव

39. हिंदी भाषा में नवाचार और स्टार्टअप की भूमिका: डॉ. शैलेश शुक्ला की अंतर्दृष्टि

40. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में हिंदी का डिजिटलीकरण: एक समीक्षात्मक अध्ययन

एवं पुस्तक की शोधपरक समीक्षा पर आधारित अन्य कोई भी संबंधित विषय

पुरस्कार वितरण

सभी विजेताओं की घोषणा हमारे ऑनलाइन मंचों पर की जाएगी और एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। निर्धारित पुरस्कार राशि के बराबर या अधिक मूल्य की पुस्तकें विजेताओं के दिए गए डाक पते पर प्रेषित की जाएंगी। भरत से बाहर के विजेताओं के मामले में डाक खर्च देय होगा।

प्राप्त आलेखों का प्रकाशन एवं लोकार्पण

  • प्रतियोगिता के सभी उच्च गुणवत्ता वाले आलेखों को ISBN युक्त पुस्तक / शोध-पत्रिका / डिजिटल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
  • चयनित लेखों के संकलन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकार्पण किया जाएगा।

प्रतियोगिता पंजीकरण शुल्क

कोई शुल्क देय नहीं है। प्रतियोगिता पूर्णतः निःशुल्क है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस शोधपरक आलेख लेखन प्रतियोगिता से संबंधित समस्त जानकारी आयोजक मंडल द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार की गई है, तथापि इसमें दी गई सूचनाएँ बिना किसी पूर्व सूचना के संशोधित की जा सकती हैं। आयोजक मंडल द्वारा प्रस्तुत नियम, पुरस्कार विवरण एवं अन्य जानकारी पूरी सावधानी से प्रदान की गई है, परंतु किसी भी प्रकार की त्रुटि, विसंगति या परिवर्तन की स्थिति में आयोजक संस्था की उत्तरदायित्व सीमित रहेगा।

प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत किए गए आलेख उनके स्वयं के विचार, विश्लेषण एवं निष्कर्ष हैं, जिनकी संपूर्ण वैचारिक जिम्मेदारी लेखक की होगी। आयोजक संस्था इन विचारों से आवश्यक नहीं कि सहमत हो। किसी भी प्रकार की सामग्री में यदि कॉपीराइट या बौद्धिक संपदा अधिकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित लेखक की होगी, न कि आयोजक संस्था की।

यह प्रतियोगिता शोध एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है, इसका कोई वाणिज्यिक लाभ आयोजक संस्था द्वारा नहीं लिया जा रहा है। प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है और पुरस्कार/प्रकाशन केवल योग्यता के आधार पर निर्णयित किए जाएंगे। पर्याप्त संख्या में गुणवत्तापूर्ण आलेख न प्राप्त होने की स्थिति में आयोजक संस्थाओं के प्रबंधन द्वारा प्रतियोगिता रद्द की जा सकती है।

न्यायक्षेत्र

यदि इस प्रतियोगिता से संबंधित किसी सूचना, निर्णय या निष्कर्ष से कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसका निवारण केवल लखनऊ (उत्तर प्रदेश) न्यायक्षेत्र में ही किया जाएगा।

संपर्क

ईमेल : [email protected]    वेबसाइट : SrijanAustralia.SrijanSansar.com

 

पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

संस्थापक-निदेशक

अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन एवं

न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन

 

प्रशांत चौबे

संस्थापक-निदेशक

अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन




लेखकों एवं रचनाकारों हेतु आवश्यक निर्देश

हमसे संपर्क करने के लिए आपका हार्दिक आभार

आपकी भेजी गई सभी प्रकार की रचनाएं ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह’ के अंतर्गत प्रकाशित होने वाली किसी भी एक / एक से अधिक पत्रिका / पत्रिकाओं में प्रकाशित की जा सकती है।

ज्ञात हो कि ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह’ जिसके अंतर्गत विश्व के विभिन्न देशों पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं – सृजन यूरोप’, ‘सृजन कुवैत’, ‘सृजन कतर’, ‘सृजन नेपाल’, ‘सृजन भारत’, ‘सृजन संसार’, ‘सृजन मलेशिया’, ‘सृजन मॉरीशस’, ‘सृजन थाईलैंड’, ‘सृजन अमेरिका’,आदि का प्रकाशन किया जाता है।  

पत्रिकाओं के अतिरिक्त आपकी रचनाओं / लेखों / सभी प्रकार की लिखित सामग्री का प्रयोग ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ और उसकी सहयोगी संस्थाओं / व्यक्तियों द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं / पुस्तकों में भी किया जा सकता है।

कहीं भी प्रकाशन होने की स्थिति में प्रकाशन उपरांत संबंधित रचनाकार को उसके द्वारा दिए गए संपर्क विवरण अनुसार सूचित किया जाएगा।

आप अपनी रचनाएं “सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका में प्रकाशन” हेतु भी भेज सकते हैं।

सृजन ऑस्ट्रेलिया में प्रकाशन हेतु साहित्यिक रचनाएं, शोध पत्र और गतिविधियों की रिपोर्ट *केवल* सृजन ऑस्ट्रेलिया की वेबसाईट के माध्यम से ही स्वीकार की जाएंगी।
साहित्यिक रचनाएं, शोध पत्र और गतिविधियों की रिपोर्ट भेजने हेतु लिंक https://srijanaustralia.srijansansar.com/साहित्यिक-रचनाएं-शोध-आले/ 

‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह’ के अंतर्गत प्रकाशित होने वाली पत्रिकाओं में प्रकाशन हेतु साहित्य की सभी विधाओं में रचनाएं केवल वर्ड फॉर्मैट में युनिकोड फॉन्ट में टाइप की हुई ही स्वीकार की जाती हैं। 

‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह’  साहित्य और संस्कृति के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में आपसी मेलजोल और भाईचारे को बढ़ाने के लिए कार्य करता है। हमारे प्रकाशन समूह में ऐसी कोई भी रचना स्वीकार नहीं की जाती जिसमें किसी व्यक्ति, समूह, संस्थान, जाति, धर्म, देश, परंपरा के विरुद्ध कोई बात प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कही गई हो। 

‘शोध आलेख’ के संदर्भ में निम्नलिखित मानदंडों का कड़ाई से पालन आवश्यक है :-

  1. वर्डफॉर्मैट में युनिकोड फॉन्ट प्रयोग करते हुए 
  2. भाषिकएवं व्याकरणिक रूप से त्रुटिरहित हो 
  3. शोधआलेख में कोई भी सूचना बिना संदर्भ के न हो 
  4. आलेखका स्वरूप निम्न प्रकार का हो 
  • शोधआलेख का शीर्षक
    • लेखक का नाम, उनकी संबद्धता, मोबाईल एवं ईमेल पता
    • सार (250-300) शब्दों में
    • कीवर्ड / बीज शब्द (6-10)
    • परिचय
    • साहित्य समीक्षा
    • शोध विधि
    • परिणाम और चर्चा
    • निष्कर्ष
    • आभार (वैकल्पिक)
    • संदर्भ सूची 

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पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

संस्थापक-निदेशक

न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं

अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन




रिहाई कि इमरती

रिहाई कि इमरती –

स्वतंत्रता किसी भी प्राणि का जन्म सिद्ध अधिकार है जिसे कभी छीना नहीं जा सकता हां कभी कभी प्राणि विशेष कर मनुष्य अपने अहंकार शक्ति दंभ के उत्कर्ष में एक दूसरे को परतंत्र अवश्य बनाते है कभी वर्चस्व के लिए कभी सर्वस्व के लिए युद्ध लड़ कर एक दूसरे को परतंत्र बनाने कि होड़ लगी रहती है तो कभी कभी व्यक्ति खुद के बुने के जाल का परतंत्र हो जाता है तो कभी कभी धोखे फरेब के चाल का शिकार बन परतंत्रता से भयाक्रांत रहता है।

प्रस्तुत कहानी सत्य घटना पर आधारित ऐसे ही एक गुसाग्र छात्र के परतंत्रता के भय को दर्शाती वर्तमान समय को सत्य का दर्पण दिखाती है।

कानपुर में नगरपालिका कानपुर द्वारा कमजोर वर्ग के लिए बनाई गई कॉलोनी के ब्लाक नंबर 33/1 के मकान में रहता साधारण परिवार जिसके मुखिया बैंक ऑफ बड़ौदा में वॉचमैन बोले तो चौकीदार पद पर कार्यरत बासुदेव मणि त्रिपाठी मगर उन्हें कोई नाम से नही जानता था अधिकतर लोग उन्हें देवता के ही नाम से जानते थे देवता सम्बोधन देने वालों ने उन्हें ऐसे ही नहीं देवता बना दिया था दान वीर कर्न एवं शिवी भी कलयुग में शायद उनके स्तर के होते साफ़गोई क्रोध दुर्वासा जैसा लेकिन पल भर में करुणा के सागर जैसा उछाह भरा ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे कहा जाय तो जथा नाम तथा गुण बासुदेव उर्फ देवता।

परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे एव एक पुत्री थी परिवार अक्सर गांव ही रहता गांव उत्तर प्रदेश पूर्वांचल का अंतिम जनपद देवरिया का अंतिम गांव था रतनपुरा ।

परिवार रहे या ना रहे भीड़ भाड़ सदा बना रहता था कोई न कोई रहता ही था बहुत दिनों तक भाई के दामाद के भाई भगवान मिश्र साथ रहते थे लेकिन ऐसी परिस्थितियों ने जन्म लिया जिसके कारण बड़े बेटे को गांव से कानपुर लाना पड़ा और परिवार भी रखना विवसता बन गयी ।

वर्ष उन्नीस सौ बहत्तर में देवता अपना परिवार कानपुर अपने साथ रहने के लिए बुलाया देवता नाम के ही देवता नही थे स्वभाव के देवता ही थे एक तो उनके पास सदा बेवजह कि खाने पीने वालो कि भीड़ लगी रहती थी कोई नौकरी के लिए आता कोई किसी मदद लिए आता स्वंय बहुत छोटे पद पर कार्य करते थे देवता लेकीन उनसे लोंगो को ऊम्मीदे बहुत थी बहुत कम वेतन मिलता पैसे के लिए परेशान रहते मगर परिवार के अलावा खाने वालों की भीड़ लगी रहती आलम ये था की अक्सर भीड़ के कारण फर्श पर लोंगो को सोना पड़ता लगता ये था की किसी विगड़े रईस या राजनेता का परिवार ही 33/1 में रहता है ।

ऊपर नेक राम गुप्ता एव प्रभुदयाल शुक्ल रहते थे गुप्ता जी तो कभी कभार आते मगर प्रभुदयाल शुक्ला जी बराबर आते जाते रहते उन्होंने ही बासुदेव मणि त्रिपाठी का नाम देवता रखा था जिस नाम से चर्चित थे ।

सामने एक राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल में कार्यरत बलिया जनपद कि मिडवाइफ रहती थी जिससे देवता एव प्रभुदयाल शुक्ल का छत्तीस का आंकड़ा था।

एका एक एक दिन शाम को देवता अपने साथ अट्ठाइस तीस वर्ष के ठिनगे कद काठी के व्यक्ति को साथ लेकर आये घर मे पहले से ही भीड़ थी माँ ने पूछा ये कौन है पति देवता ने बताय ये है चंद्रेदेखर शर्मा जौनपुर लवाईन खुटहन के निवासी है पत्थर कालेज में डॉ गोविंदा के अंडर दाल पर पी एच डी करते है बहुत कुशाग्र स्कॉलर है समय समाज में युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

आजाद नगर के में द्विवेदी जी के मकान में किराए पर रहते थे द्विवेदी जी कि लड़की इनके पास पढ़ने लिखने अक्सर इनके पास आती थी मकान मालिक कि लड़की होने के कारण ये बहुत गम्भीरता एवं लगन से उसे पढ़ाते वह बहुत दिनों से लापता है।

द्विवेदी जी ने इन्हें अपनी पुत्री भगाने के आरोप में इन्हे नामजद किया है ये बेचारा भागा भागा फिर रहा है इसकी जान आफत में पड़ी है जमानत हो नही पा रही है अब ये यही रहेंगे जब तक जमानत नही हो जाती एव इनकी व्यवस्था उचित नही हो जाती।
वास्तव में देखने सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा भय दहसत से भयाक्रांत एवं स्वतन्त्र देश के स्वतन्त्र नागरिक कि फरेब एवं भरोसा टूटने कि गुलामी को अपने ही देश कि कानून व्यवस्था से थी वास्तव में चंद्रशेखर शर्मा अपने समय काल के सर्वश्रेष्ठ एवं होनहार युवा छात्र थे और अपने काल में आदर्श अनुकरणीय थे।

देवता के सामने किसी कि नही चलती कोई कर भी क्या सकता था चंद्रेदेखर शर्मा उर्फ सी एस शर्मा देवता के परिवार के अंग बन गए।

देवता उनके जमानत के लिए सी एस शर्मा के साथ दौड़ने लगे धीरे धीरे चंद्रशेखर शर्मा एव देवता का परिवार एक दूसरे परिवार के लग भग अंग बन गए जिसके कारण सी एस शर्मा के ससुराल गांव के सदस्यों का देवता के परिवार में लगभग पारिवारिक सदस्य कि तरह आना जाना शुरू हो गया सी एस शर्मा का विवाह निशा नाम कि लड़की से हुआ था जो मार्कण्डेय शर्मा कि पुत्री थी और उनका परिवार बंगला नंबर चालीस कैंट वाराणसी में रहता में रहता था एवं दो साले थे सी एस शर्मा के जिसमें नरेंद्र शर्मा पी टी टीचर् सीतापुर में कार्यरत थे दूसरा बेटा अध्ययनरत था अपने कार्य के दौरान बहुत दिनों तक वाराणसी रहने का शुभअवसर प्राप्त हुआ है आर्कण्डे शर्मा के परिवार को बहुत खोजने कि बहुत कोशिश कि किंतु कोई पता नही चल सका ।

चंद्रशेखर शर्मा उर्फ सी एस शर्मा के जमानत के लिए भाग दौड़ जारी थी मगर इतना चर्चित केश था कि कोई जज या वकील जल्दी इस केश में हाथ डालने को तैयार नही था ।

बड़ी मुश्किल से उस दौर के सबसे बड़े तेज तर्रार वकील जिनके बारे में मशहूर था कि जजों कि खाट खड़ी कर देते है अपनी कुशाग्रता से और उलझे एवं संगीन पेचीदा मामलों में भी निश्चित कोई न कोई राह निकाल देते है ने सी एस शर्मा के जमानत के लिए बातौर वकील पैरबी करने के लिए हांमी भरी।

खास बात सी एस शर्मा के केश में इतनी ही थी कि उनको द्विवेदी जी एवं उनके परिवार को छोड़कर जिनके किराएदार थे सी एस शर्मा को छोड़कर सी एस शर्मा को कोई पहचानता नही था सी एस शर्मा ने होशियारी इतनी अवश्य किया था कि अपना कोई फ़ोटो नही रखा द्विवेदी जी के घर किरायेदार के रूप में नहीं छोड़ रखा था ।

पुलिस के पास सिर्फ लड़की भगाने वाले की हुलिया के रूप में सी एस शर्मा कि हुलिया थी जैसे लंबाई कद काठी रंग आदि।

पुलिस के पास उस दौर में अपराधी का स्केच बनाने कि बहुत सुविधा भी नही थी अतः सी एस शर्मा थोड़ी बहुत सावधानी से बचते रहे ।

वकील नन्दलाल जायसवाल ने जमानत कि फूलप्रूफ योजना बनाई जिसके अंतर्गत किसी भी सुविधा जनक दिन पर सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा को कानपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आत्मसमर्पण करना था ।

जिस उचित दिन को नन्दलाल जैसवाल ने निर्धारित किया था उस दिन देवता कानपुर जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायलय में हाजिर हुये और स्वंय को सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा बताया जज ने उन्हें पुलिस कस्टडी में दे दिया और पुलिश ने रिमांड पर लेने हेतु प्रार्थना पत्र दिया।

जज ने सुनवाई व्यस्तता के कारण लंच के बाद करने के लिए समय दिया जिला जज को अन्य विवादों कि सुनवाई में बिलम्ब हो गया और शाम हो गयी न्यायालय समाप्त हो उठने वाला था तब जिला जज के सज्ञान में पुलिस ने सी एस शर्मा के रिमांड पर सुनवाई हेतु आवेदन विचारार्थ प्रस्तुत किया विद्वान न्यायाधीश ने सी एस शर्मा को रिमांड पर दे दिया जब विद्वान न्यायाधीश उठने लगे तब एडवोकेट नन्दलाल जयसवाल ने जज साहब से निवेदन किया कि उनकी बात सिर्फ सुन ले बाद में जो निर्णय लेना हो ले।

नन्दलाल जायसवाल ने कहा योर आनर जिस चंद्रशेखर शर्मा उर्फ सी एस शर्मा को रिमांड पर देने हेतु आप द्वारा आदेशित किया गया है वह तो न्यायलय में कभी हाज़िर ही नही हुआ पुलिस कि कस्टडी में जो व्यक्ति है वह है बासुदेव मणि त्रिपाठी उर्फ देवता बैंक ऑफ बड़ौदा में वॉचमैन पद पर कार्यरत और बासुदेव मणि त्रिपाठी उर्फ देवता के पहचान के सारे उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत कर दिया ।

अब प्रश्न यह था माननीय विद्वान न्यायाधीश के समक्ष कि वह क्या करे क्या न करे चंद्रशेखर शर्मा उर्फ सी एस शर्मा के केश कि सुनवाई होती रही उन्हें न्यायलत में हाज़िर मानकर एव रिमांड पर भी देने का आदेश दे दिया कड़ाके कि ठंठ में विद्वान न्यायाधीश महोदय पशीने से नहा गए नन्दलाल जायसवाल के विषय मे मशहूर था कि किसी भी बिगड़े से विगड़े केश को चुटकी में हल कर देते है सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा के केश में भी उनके दिमागी कसरत ने चमत्कार कर दिया विद्वान न्यायाधीश के पास दो ही विकल्प बचे थे एक कि वह पुलिस से कहे कि असली सी एस शर्मा को पकड़ कर न्यायालय में तत्काल हाज़िर करे जो पुलिस के लिए लगभग असंभव था क्योकि लगभग एक वर्ष में पुलिस चंद्रशेखर शर्मा को पहचान तक नही पाई थी हाज़िर करना तो बहुत बड़ी बात थी दूसरा चंद्रशेखर शर्मा कि बेल ग्रांट करे विद्वान न्यायाधीश ने सी एस शर्मा कि बेल ग्रांट कर दी ।

शाम को देवता मूंग कि इमरती चंद्रेदेखर शर्मा को जमानत मिलने कि खुशी में लेकर आये जिसे सब ने छक कर खाया मैंने जीवन मे पहली बार मूंग कि इमरती का स्वाद लिया ।

सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा को पुलिस के दहसत खौफ कि गुलामी से आज़ादी मिली और स्वतन्त्र होकर आजादी से रहने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ और उनकी सामान्य जीवन चर्या शुरू हुई और धीरे धीरे वो देवता के परिवार के अभिन्न अंग बन गए और देवता के परिवार के हर छोटे बड़े विचारों एव व्यवहारों में साझीदार हो गए ।

इसी दौरान आसाम से एक व्यक्ति जो असम में किसी सेठ के यहॉ नौकरी करता था सेठ का आठ हजार रुपया लेकर भागा और कानपुर देवता के घर पहुंचा रहने वाला वह बिहार के दर्जी पट्टी या कही वही का रहने वाला था उसने अपना आठ हजार रुपया देवता को दिया की नही इस तथ्य कि जानकारी मुझे भलीभाँति नही है किंतु सी एस शर्मा अवश्य उस पैसे के लिए बी डी तिवारी जो नेशनल सुगर इंस्टीट्यूट कानपुर में काम करते थे के साथ मिलकर देवता पर कुछ दबाव बनाया यह सोची समझी साजिश थी या खुराफात मैं अब तक नही समझ पाया।

कुछ दिन बाद वह व्यक्ति पुनः पता नही कहा चला गया
सी एस शर्मा न्यायालय से जमानत मिलने के बाद अपनी पत्नी निशा शर्मा को लेकर आये और देवता के परिवार के साथ रहने लगे कुछ दिनों उपरांत उनकी पत्नी ने एक खूबसूरत कन्या रत्न को जन्म दिया जिसका नाम बड़े प्यार से दीपा रखा ।

सन उन्नीस सौ चौहत्तर लगभग दो वर्षों के बाद मेरे यज्ञों पवित सांस्कार में शर्मा जी एव उनकी पत्नी निशा शर्मा मेरे गांव रतनपुरा देवरिया भी आये एकदम पारिवारिक सदस्य की तरह ।

सी एस शर्मा के चाचा बीमार हुये और कानपुर इलाज के लिए आये तब उन्हें उरसिला अस्पताल में एडमिट कराया गया उनकी सेवा मैंने भी बहुत किया ।

सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा के साथ मुझे बहराई च मक्का अनुसंधान फार्म पर जाने का अवसर प्राप्त हुआ शर्मा जी को अपने रिसर्च के कार्य से जाना था बहराई च मक्का फार्म पर कुछ शोध से संबंधित कार्य था सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा का शोध विषय था जेनेटिक्स और विषय था डाले दालो के प्रजाति को जेनेटिकली अत्यधिक उत्पादक बनाना था एवं उनके एक्सपर्ट थे भारत के मूर्धन्य कृषि विज्ञानी डॉ गोविंदा जो कानपुर पत्थर कालेज में प्लांट पैथोलॉजी पढ़ाते थे सन उन्नीस सौ चौहत्तर में पत्थर कालेज को उत्तर प्रदेश का संभवतः पहला पंडित चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय बनाया गया और उसके पहले कुलपति डॉ कैलाश नाथ कौल उर्फ के एन कौल जो तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा जी के मामा लगते थे को बनाया गया उनकी विशेषता ये थी कि वे सिर्फ कुकुरमुत्ता एवं दही है खाते यानी मशरूम एवं दही उस जमाने में उनका दैनिक भोजन भी चर्चा का विषय था।

सी एस शर्मा सन उन्नीस सौ पछत्तर में 33/1 छोड़कर गोविंद नगर किराए के अलग मकान में रहने लगे उसके बाद देवता के परिवार से उनका संबंध टूट गया
मै अपने सेवा के दौरान वाराणसी और फैजाबाद पदस्थापित रहा एवं जौनपुर से भी घनिष्ठ संबंध था उस समय बहुत से ऐसे मेरे मित्रो ने चंद्रशेखर शर्मा से मिलवाने के लिए दबाव बनाया लेकिन संयोग शायद नहीं बन पाया लेकिन यह अवश्य स्पष्ट हो गया कि सी एस शर्मा उर्फ चंद्रशेखर शर्मा द्विवेदी जी कि लड़की भगाने के केश से बरी हुए और भारतीय स्टेट बैंक में कृषि अधिकारी नियुक्त हुए और उच्च पद से सेवा निवृत्त हुए साथ ही साथ उनके बचपन के बहुत से मित्रो ने इस बात कि तस्दीक किया कि चंद्रशेखर शर्मा अपने समय काल के बहुत मेधावी प्रदेश स्तरीय छात्र थे जिसके कारण जौनपुर और शाहगंज खुटहन लवाईन का नाम रौशन था।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उतर प्रदेश।।




शुभारंभ है इस्वी सन शुभारम्भ 2023

नव वर्ष 2023 कि शुभकामनाएं-

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
लुका छिपी सूरज की बहुत ठंड है।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
शहरों गलियों फुटपाथों पर सोया भूखा जीवन ठिठुर ठिठुर कर तंग है।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
भोर कोहरे कि चादर ओढ़े
आकाश शीत लहर है।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
किसान गावं का संसय में
श्रम व्यर्थ का भय हैं ।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
बीते वर्ष के शुख दुःख हर्ष विषाद
याद संग है।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
वैश्विक मनवावता कही भुखमरी
कुपोषण संक्रमण से लडती कही
यर्थ का जंग है ।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ है
आने वाला पल प्रहर नई चुनौती अवसर उपलब्धि का आगमन शुभ आशा अभिलाषा
अंत नहीं अनंत पथ हैं।।

शुभारम्भ है शुभारम्भ हैं
जाने कितनो को खोया बीते वर्ष ने आने वाला शुख़ शांति वैभव कि आशाओं का अंतर्मन है।।

शुभारम्भ को शुभ बनाए घृणा द्वेष जंगो के मैदानों को त्यागे मानवता कि अलख जगाए बैर भाव में करुणा क्षमा दया कि
अलख जगाए ।।

शुभ आगमन को शुभारम्भ
बनाए मन से गाए शुभारम्भ है शुभारम्भ है।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उतर प्रदेश।।




हिंदी

 

अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस –

अंतर्मन अभिव्यक्ति है
हृदय भाव कि धारा है
पल प्रहर बहने
और निखरने दो
हिंदी तो अपनी बोली है
इसे जन जन मन से ही
निकलने दो।।

पग अवनी के साथ
मां हिंदी जैसी
आत्म साथ
ममता जननी जैसी है।।

रुदन और मुस्कान
वात्सल्य का स्नेह नेह
जन्म जीवन के
संग साथ साथ ही
चलने दो।।
हिंदी अपनी इसे
जन मन से ही निकलने दो।।

हिंदी आ अह क़ से ज्ञ जन्म जीवन अनुभूति
हिंदी धन्य धरोहर है
पल प्रहर प्रभा
दिवस संध्या निशा
नित्य निरंतर
उदय उजियार को बढ़ने दो।।

स्वर व्यंजन
शब्द अक्षर
साहस करुणा
प्रेम रौद्र
रस छंद अलंकार
गीत काव्य
नाटक कहानी
अतीत वर्तमान
इतिहास वर्णनकरती है
हिंदी तो अम्बर अवनी हैं।।

अटल भाष्य भाव
अंतरराष्ट्र वैश्विक मानवता
प्रवाह
युग चेतना जागरण
जागृति भाव
गौरव गरिमा अपनी है।।

माथे कि बिंदिया
मां भारती श्रृंगार
आचार व्यवहार
मन भावो कि
धारा नित्य निरंतर
बहती हैं।।

काल समय वक़्त
साक्ष्य गवाह
हिंदी मानवता
कि शाहोदरी भगिनी हैं ।।

जनपद क्षेत्र कि
बोली भाषा
कि आत्म प्रभाव
सम्मोहनी हैं।।

प्रस्फुटित
निखार प्रखर है
राष्ट्र भाव
हिंदी खोजती पहचान
राष्ट्र भाषा की
गौरव गरिमा कि
चाहत मिलनी और संवरनी हैं।।

संस्कृत से जन्मी
व्याकरण
समास कहावत
और मुहावरों से
सुसज्जित बोली
भाषा बोली
भाषाओं कि
अलबेली धरणी है।।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उतर प्रदेश।।