डॉ. उर्वशी भट्ट की कविता – ‘मनुष्यता’

डॉ.उर्वशी भट्ट की यह कविता कोरोना के इस संकट के समय में ‘ मनुष्यता ‘ के विमर्श को अहम मानती हुई, मनुष्यता के वरण को ही मनुष्य का एकमात्र सरोकार मानती है। – नरेश शांडिल्य, सह संपादक – काव्य, सृजन ऑस्ट्रेलिया मनुष्यता दुर्दान्त होता है कभी कभी नियति का वार स्तब्ध कर देने की हद तक अप्रत्याशित …

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