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काव्य सागर -2

जै मां काली

जै जगदंबै जै माँ काली, जै जगदंबै जै माँ काली ,वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

जै जगदंबै जै माँ काली, जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

पारिजात का पुष्प और पल्लव प्रणव ध्यान कि धन्य तूं न्यारी!! जै जगदंबै जै माँ काली जै जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

समनिष्ठा कि जागृति ज्योति आत्म बोध कि साहस शक्ति विघ्न विनासक मंगल कारी!! जै जगदंबै जै माँ काली जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

आदि मध्य अवसान अनंत तुम्हीं युग जीवन कि संचारी!!

जै जगदंबै जै माँ काली ,जै जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

सौम्य, साधना ,भाग्य ,भविष्य ,निर्भय निर्झर जीवन कल्याणी!!

जै जगदंबै जै माँ काली जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

उत्कर्ष ,उत्सर्ग, निश्चय, निष्कर्ष विश्व पुरुष कि प्रगति प्रतिष्ठा शुभ ही शुभ कि लक्ष्मी हो तुम दुष्ट दलन कि दुर्गा काली!!

जै जगदंबै जै माँ काली जै जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश




भक्ति सागर

 

शिवोहं शिवोहं शिवोहं चिता भस्म भूषित श्मसाना बसे हंम शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।

अशुभ देवता मृत्यु उत्सव हमारा शुभोंह शुभोंह शुभोंह शुभोंह शिवोहं शिवोहं शिवोहं ।।

भूत पिचास स्वान सृगाल कपाल कपाली संग साथ हमारे स्वरों हम
स्वरों हम, स्वरों हम ,शिवोहं शिवोहं शिवोहं ।।

गले सर्प माला जटा गंग धारा मुकुट मुंड माला देवों हंम, देवों हम,
देवोँ हम ,देवोँ हम शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।

डमरू त्रिशूल शीश चंद्र धरे हम पहने मृग छाला कैलाशम बसेंह
शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।

देवता दानव सब शरण हमारे जगत कल्याण धैर्य ध्यान त्रिनेत्र धरे हम देव तत्व की शक्ति अक्षुण सृष्टि रहे सुरक्षित विषपान करें हम विषपान करे हम विष पान शिवोहं शिवोहं
शिवोहं ।।

अकाल का काल महामृत्युंजओ हम
दुख क्लेश हर्ता विघ्न विनाशक हम
पार्वती अर्ध अर्धागिनी अर्ध नारीश्वरों हम अर्धनारीश्वरों हम अर्ध नारीश्वरों हम शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।

वसहा बैल नंदी है वाहन हमारा
रौद्र रुद्र तांडव दुष्ट संघार कारक
औघड़ रूप धरे हम औघड़ रूप धरे हम औघड़ रूप धरें हम शिवोहं शिवोहं
शिवोहं शिवोहं।।

पकवान मिष्टान्न नही प्रिय मुझको
भांग धतूर बेल पत्रम प्रिये हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।

महादेव ,शिव शंकर, भोला ,गङ्गाधर
आशुतोष पंचाछरी मंत्र ॐ नमः
शिवायः से रीझे हम शिवोहं शिवोहं
शिवोहं शिवोहं।।

पाप शाप विनाशक मोक्ष मुक्ति
प्रदायक कलयुग जीव उपकार
में हम द्वादस ज्योतिर्मय ज्योतिर्लिंग
बसे हम बसे हम शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।

नांदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश




तपोवन

तपोवन

शौर्य प्रखर निखर सूरज पूर्णिमा चन्द्र
हलाहल विष भरा जहां मधुर मिठास अमृत जैसा।।

ऊंचाई गौरी शंकर पर्वत गहराई समुद्र अंतर मन प्रशांत प्रतिदिन मंथन सागर जैसा।।

राष्ट्र समाज दृष्टि दिशा दृष्टिकोण
शाश्वत पुरस्कार वर्तमान में यत्नो रत्नों जैसा।।

प्रतिदिन सत्संग नकारात्मक सकारात्मक के प्रतिकर्षण का
नव चमत्कार उजियार जैसा।।

विश्वाश आश आशाओं आकाश जन चकोर की अभिलाषा जीवन मार्ग उत्सर्ग उत्कर्ष जैसा।।

जीवन तप तपोवन की गमक गन ग्राम जैसा शिव नारायण ब्रह्म त्रिदेव
संपूर्णता की साहस शक्ति जैसा।।

ईश्वर से यही प्रार्थन ना विराम थके ना हारे जब तक पहुंच ना जाये भारत के
जन जन मन द्वारे जीवन के मौलिक
मूल्यों जैसा।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।




अनुष्ठान

अनुष्ठान

अनुष्ठान जीवन का चलता रहे
शौम्य शांत संचारित संस्कार
करता रहे।।

भ्रम अनिश्चय का अँधेरा हटे
राष्ट्र समाज गौरव मान प्रकाशित
होता रहे।।

जीवन कि तपस्या का पुण्य प्रताप
प्रसाद युग युवा पीढ़ी का धन्य धरोहर
बनता रहे।।

अनमोल अनूठा पल परम्परा नई परंपरा संपत्ति समय राष्ट्र समाज सत्य
सिद्धान्त फलता फूलता रहे।।

जीवन समय समाज नित नव संग्राम के महारथी सार शात्र शत्र का मार्ग दर्शन करते रहे।।

सौभाग्य अभिमान का समय
काल नित्यका वर्तमान भविष्य
मार्ग दर्शन करता रहे ।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।




जीवन संग्राम

जीवन का मौलिक मूल्य राष्ट्र

जीवन यात्रा का एक अहम पड़ाव अविरल निर्मल निश्छल निरपेक्ष निर्विकार समाज राष्ट्र हित अनुष्ठान।।

त्याग तपस्या सोच कर्म धर्म दायित्व बोध प्रखर निखर परिणाम।पल प्रति पल वर्तमान पीढ़ी युग की संस्कृति सांस्कार प्रेरक पुरस्कार।।

उद्घोष हर हृदय आल्लादित भाव बोध कर्म क्रांति का संबाद सांचार नित निरंतर नव युग मर्यादा मुल्यों
के नैतिकता पथ का दिग्दर्शक प्रकाश।।

युवा युग चेतना जागरण राष्ट्र निर्माण
सांस्कृतिक पूंजी धन्य धरोहर चल मनोहर मनुहार।।

आभा मंडल से दैदीप्यमान शब्द स्वर समन्वय साहित्य वास्तव वास्तविकता की अतीत वर्तमान का दर्पण भाव।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।




जीवन का मौलिक मूल्य

जीवन का मौलिक मूल्य राष्ट्र

जीवन यात्रा का एक अहम पड़ाव अविरल निर्मल निश्छल निरपेक्ष निर्विकार समाज राष्ट्र हित अनुष्ठान।।

त्याग तपस्या सोच कर्म धर्म दायित्व बोध प्रखर निखर परिणाम।पल प्रति पल वर्तमान पीढ़ी युग की संस्कृति सांस्कार प्रेरक पुरस्कार।।

उद्घोष हर हृदय आल्लादित भाव बोध कर्म क्रांति का संबाद सांचार नित निरंतर नव युग मर्यादा मुल्यों
के नैतिकता पथ का दिग्दर्शक प्रकाश।।

युवा युग चेतना जागरण राष्ट्र निर्माण
सांस्कृतिक पूंजी धन्य धरोहर चल मनोहर मनुहार।।

आभा मंडल से दैदीप्यमान शब्द स्वर समन्वय साहित्य वास्तव वास्तविकता की अतीत वर्तमान का दर्पण भाव।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।




साहित्य और समय

साहित्य और समय

समय प्रबाह परिस्थिति परिवेश वर्त्तमान की दृष्टि दिशा मार्ग है।।

साहित्य भाव झरना झील नदियां
सिंधु समागम नित्य निरंतता अक्षुण अक्षय उजियार है।।

शब्द ओजस्वी ओज जन जन
मन का आनंद अनुराग राष्ट्र चेतना
क्रांति है।।

संगठित वैचारिक मंथन का अमृतपान
भाँवो की अभिव्यक्ति जन जन का
आवाहन नित्य निरंतर संस्कृति सांस्कार है।।

वर्तमान जन मन की अभिव्यक्ति नित्य निरंतर जीवन मे कल्पना का याथार्त संसार है।।

युग सृष्टि दृष्टि सत्यार्थ महायज्ञ पल
पल जीवन अनंत ईश्वर सत्य प्रदत्त
का आचरण व्यवहार प्रतिविम्ब उजियार है।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।




हिन्दू नव वर्ष

हिन्दू नव वर्ष मनाए–

चलो हिन्दू नव वर्ष मनाए
आशाओं, विश्वास का
उत्साह उमंग चाह प्रसंग के
नए सुबह का अलख जगाए
चलो हिन्दू नव वर्ष मनाए।।

उत्कर्ष,हर्ष दुःख दर्द के बीते पल
कि यादों के संग कदम बढ़ाए
चलों उत्कृष्ट नव वर्ष बनाए
चलो हिन्दू नव वर्ष मनाए ।।

त्यागो घृणा द्वेष को प्रेम
शांति निर्मल, निर्झर ,अविरल
धारा बहाए अखिल ब्रह्मांड में
प्रकृति ,प्राणि ब्रह्म सत्य का
संदेश जगाए।
चलो हिन्दू नव वर्ष मनाए।।

साहस शक्ति के युवा युग
मानवता मूल्यों के पथ प्रकाश में
नव युग का दीप जलाए भय भ्रम
अंधकार मिटाए।
चलों हिन्दू नव वर्ष मनाए।।

धर्म ,सद्कर्म ,से अभिनंदन
नव वर्ष का मानव मुख
मण्डल पर मुस्कान जगाए
मानव मुल्यों की गमग गीत
गाये।
चलो हिन्दू नववर्ष मनाए।।

सांसों में आश धड़कनों में
उठती तरंग है भाग्य भगवान
राम आगमन का जागृति जागरण
मधुर बयार बहाए।
चलों हिन्दू नव वर्ष मनाएं।।

साध्य साधना के पग पग
माँ की आराधना के पल पहर शक्ति की भक्ति भाव नवदुर्गा दुर्लभ भान भाष्कर नव वर्ष उगाए।
चलों हिन्दू नव वर्ष मनाएं।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।




है माँ

आदि शक्ति अम्बे जगदम्बे

आराधना खंड

हे देवी माँ

तू भय भव भंजक
जगत कल्याणी
दुष्टो की दुर्गा काली
भक्तो की रखवाली
शक्ति दे मुझे अपनी
भक्ति का भाव भाग्य दे !!

माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का वर
वरदान दे!!

खोजता भटकता
सारे जहां में
आ गया हूँ
तेरे द्वार
तेरे ज्योति के
उजियार में !!

जिंदगी की दुस्वारिया
बहुत मैं आ गया
जिंदगी चाहतों
की राह में
तेरी ममता
आँचल की छाव में !!

माँ शारदेय
मैं आया तेरे
द्वार तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!

माँ शारदेय
मैं आया
तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!

माँ शारदेय
मैं आया
तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!

हो गया हो
गर कही
अपराध
तेरी सेवा पूजा
सत्कार में
तेरा ही वात्सल्य हूँ
कर छमा
दया का आशिर्बाद दे !!

तू तो जग
जननी सद्गुण ही
जानती तू
अपनी संतान में
मेरे दुर्गुणों को
सद्गुणों में निखार दे !!

माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते मैं
तेरी संतान सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!

लालसा बहुत
मानवीय स्वभाव मैं
तेरी भक्ति का भाव
शक्ति धन धान्य में ,
मेरी चाहत
सिर्फ तू रहे
आत्म प्रकाश में
आत्म के प्रकाश में !!

माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!

साध्य साधना
आराधना मेरी
कर्म धर्म ज्ञान
के बैभव
बैराग्य में ,
माँ मेरी तू अपनी
ध्यान ज्ञान की भक्ति
की शक्ति का
मुझे वर दान दे !!

माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते मैं
तेरी संतान सुन
पुकार
मेरी कामना का वर
वरदान दे!!

तू भय भव
भंजक जग कल्याणी
दुष्टो की दुर्गा काली
भक्तो की रखवाली
शक्ति दे अपनी
भक्ति का भाव
भाग्य दे !!

माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का वर
वरदान दे!!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी (पीताम्बर )




हे माँ

हे माँ

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला
दुःख हरने वाली
जग कल्याणी
जय अम्बे जय जगदम्बे !!

तू सीता सावित्री
पार्वती विघ्नेश्वरी
भुनेश्वरी बाघम्बरी
चंडी चंडिका
मनसा महिमा
मनोकामना!!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला
दुःख हरने वाली
जग कल्याणी
जय अम्बे जय जगदम्बे !!

तू लक्ष्मी गौरी
शिवा वैष्णवी
रुक्मणि राधा
राधा ब्राह्मी
भाग्य विधाता !!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला
दुःख हरने वाली
जग कल्याणी
जय अम्बे जय जगदम्बे !!

तू माँ शारदा
स्वप्नेश्वरी वगलामुखी
कर्णिका काली
तू छाया माया
निद्रा क्वचिदपि
न भवति कुमाता !!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला
दुःख हरने वाली
जग कल्याणी
जय अम्बे जय जगदम्बे !!

तू रिद्धि सिद्धि
हरसिद्धि सत्य
सप्त श्रृंगी माता
तू कामाख्या
जग जननी
जग विख्याता !!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला
दुःख हरने वाली जग
कल्याणी जय
अम्बे जय जगदम्बे !!

तू सर्वेश्वरी कमलेश्वरी
ब्राह्मणी रुद्राणी
ज्वाला माता
दक्षिणेश्वर काली
महालक्मी
मुम्बा देवी धन धान्य
सुतान्यहम की दाता !!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला दुःख
हरने वाली जग
कल्याणी जय
अम्बे जय जगदम्बे !!

तू सुरेश्वरि अशुरेश्वरी
इंद्राणी करुणेश्वरी
माहेश्वरी दिगम्बरी
श्वेताम्बरी
ललितेश्वरी नारायणी
क्रोध छमा की माता !!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला दुःख
हरने वाली जग कल्याणी
जय अम्बे जय जगदम्बे !!

तू भ्रामरी भैरवी
शनिश्चरी मीनाक्षी
अनसूया धात्री
धारिणी जग
तारणी माता!!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला दुःख
हरने वाली जग
कल्याणी जय
अम्बे जय जगदम्बे !!

तू चिंत्तपूर्णी
छिन्नमस्तिका
सिद्धेश्वरी चामुंडा
चामुंडेश्वरी
रामेश्वरी मातेश्वरी !!

तू अवनि अवतारी
पर्वत की बाला
दुःख हरने वाली
जग कल्याणी
जय अम्बे जय जगदम्बे !!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी (पीताम्बर )