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अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी सम्मान योजना

“अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी सम्मान योजना”

उद्देश्य
हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका आदि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं एवं विश्व की विभिन्न संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में 30 मई 2025 से 30 मई 2026 तक मनाए जा रहे ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष – 2025-26’ के अंतर्गत आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी सम्मान योजना का उद्देश्य शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं भाषा-प्रेमियों को ‘हिंदी भाषा में शोध’ एवं “हिंदी भाषा और तकनीक” विषय पर समकालीन विमर्श हेतु प्रोत्साहित करना है, साथ ही डॉ. शैलेश शुक्ला की विचारधारा, तकनीकी दृष्टि एवं अनुभवजन्य विश्लेषण पर आधारित शोध-सामग्री पर विमर्श का सृजन कराना है।

शोध सम्मान विवरण 
शोध रत्न सम्मान : 1 (एक)
शोध विभूषण सम्मान : 2 (दो)
शोध भूषण सम्मान : 5 (पाँच)
शोध श्री सम्मान : 11 (ग्यारह)

विशेष : इस योजना में प्राप्त सभी उच्च गुणवत्ता वाले आलेखों को ISBN युक्त पुस्तक / शोध-पत्रिका / डिजिटल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।

आधार-पुस्तक

पुस्तक का नाम : हिंदी भाषा और तकनीक
लेखक : डॉ. शैलेश शुक्ला

प्रकाशक : न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ
प्रकाशन वर्ष : 2024, आईएसबीएन : 978-81-949867-3-7
पुस्तक (निशुल्क) नीचे दिए गए लिंक
और सामने दिए गए क्यू आर कोड पर उपलब्ध है :- https ://tinyurl.com/BookByDrShaileshShukla

शोध सम्मान योजना  की शर्तें और दिशानिर्देश
1. शोधपरक समीक्षात्मक आलेख हेतु शब्द सीमा : 3000 से 5000 शब्द
* संरचना : आलेख में निम्न अनुभाग अनिवार्य रूप से सम्मिलित हों :-
* सारांश (Abstract) : 250–300 शब्द
* भूमिका / प्रस्तावना
* लेखन का उद्देश्य
* समकालीन संदर्भ में पुस्तक की प्रासंगिकता
2. लेखक परिचय : डॉ. शैलेश शुक्ला
* शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि
* पत्रकारिता, शिक्षण, राजभाषा व डिजिटल लेखन में योगदान
* पूर्व लेखन कार्यों की झलक
3. पुस्तक की संरचना और सामग्री का अवलोकन
* अध्याय संरचना (12 अध्यायों की सूची और उद्देश्य)
* तकनीकी शब्दावली, उपशीर्षक, और विशेषताएँ
* भाषा और शैली की विशेषता
4. पुस्तक की प्रमुख विषयवस्तु का विश्लेषण
यह खंड 4.1 से 4.8 तक विभाजित हो सकता है :
4.1 हिंदी भाषा का डिजिटल प्रवेश
4.2 सोशल मीडिया में हिंदी
4.3 हिंदी टाइपिंग व फॉन्ट्स
4.4 सॉफ्टवेयर, ऐप्स और AI में हिंदी
4.5 डिजिटल शिक्षा, प्रकाशन और अनुवाद में हिंदी
4.6 ब्लॉगिंग, यूट्यूब व डिजिटल साहित्य
4.7 SEO और सोशल मीडिया मार्केटिंग में हिंदी
4.8 भविष्य की दिशा और चुनौतियाँ
5. लेखन शैली एवं प्रस्तुति का विश्लेषण
* भाषा की सहजता, शैली की वैज्ञानिकता
* शब्दों का चयन, संप्रेषणीयता
* तकनीकी विषयों की सरलीकरण क्षमता
6. विषय की गहराई और प्रामाणिकता
* तकनीकी स्रोतों की प्रस्तुति
* अनुभवजन्य उदाहरणों का समावेश
* लेखक की व्यावहारिक दृष्टि
7. समसामयिक प्रासंगिकता और शोधयोग्यता
* पुस्तक का शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्त्व
* डिजिटल युग में हिंदी के लिए इसका उपयोग
* नीतिगत निर्माण में संभावित योगदान
8. तुलनात्मक विवेचन (वैकल्पिक)
* अन्य हिंदी तकनीकी पुस्तकों या डिजिटल हिंदी लेखन से तुलना
* नवीनता और विशिष्टता का निर्धारण
9. पुस्तक की विशेषताएँ और सीमाएँ
* पुस्तक की सकारात्मक विशेषताएँ
* संभावित कमियाँ (यदि हों तो संतुलित ढंग से)
10. निष्कर्ष
* संपूर्ण मूल्यांकन का सार
* हिंदी भाषा और तकनीक के यथार्थ और संभावनाओं पर लेखक की पकड़
* भविष्य के शोध के लिए प्रेरणा
11. संदर्भ / ग्रंथ सूची
* प्रयुक्त स्रोत
* उद्धरण और टिप्पणियों के संदर्भ
* प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत 300–800 शब्दों का विश्लेषण करें।
* पुस्तक से प्रासंगिक उद्धरणों का प्रयोग करें।
* तटस्थ, शोधपरक और विद्वत्तापूर्ण भाषा का उपयोग करें।
* संदर्भ सूची (References) – APA शैली में या अन्य मानक अनुसंधान शैली में
12. तकनीकी प्रारूप :
* Font : यूनिकोड फॉन्ट (मंगल / निर्मला / कोकिला / कोई और युनिकोड फॉन्ट)
* स्पेस : 1.5
* प्रविष्टि हेतु फॉर्मैट : MS Word (Doc)
* भाषा : केवल हिंदी
13. प्रविष्टि जमा करने की अंतिम तिथि : 25 जुलाई 2025 तक
* प्रविष्टियाँ भेजने का माध्यम : ईमेल : [email protected]
* ईमेल विषय (Subject Line) :-
“अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी सम्मान योजना हेतु शोधपरक समीक्षात्मक आलेख प्रतियोगिता हेतु प्रविष्टि”

मौलिकता (Originality)
1. आलेख स्वयं लिखा गया होना चाहिए।
2. 100% मौलिक (Plagiarism-free) हो। पुस्तक से कुछ भी उद्धृत करने पर संदर्भ अवश्य दिया जाए।
3. AI जनरेटेड कंटेंट, कॉपी-पेस्ट लेख को अस्वीकार कर दिया जाएगा।
4. आयोजक मंडल द्वारा प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर से जांच की जाएगी।

शोध सम्मान योजना  हेतु शोधपरक समीक्षात्मक आलेखों के संभावित  विषयों की सूची
प्रतियोगिता हेतु लेखक / शोधार्थीगण / प्राध्यापकगण निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक या पुस्तक ‘हिंदी भाषा और तकनीक’ की शोधपरक समीक्षा पर आधारित अन्य संबंधित विषय का चयन कर सकते हैं :-
1. डॉ. शैलेश शुक्ला के लेखन में इंटरनेट युग और हिंदी भाषा की पहचान
2. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के आलोक में डिजिटल सामग्री निर्माण और उपभोग का विश्लेषण
3. सोशल मीडिया में हिंदी की शक्ति : डॉ. शैलेश शुक्ला की आलोचनात्मक दृष्टि
4. ई-कॉमर्स और हिंदी का संबंध : डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के संदर्भ में
5. हिंदी टाइपिंग तकनीक : डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुभवों की समीक्षा
6. यूनिकोड और तकनीकी मानकीकरण पर डॉ. शैलेश शुक्ला का योगदान
7. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक में फोनेटिक बनाम इनस्क्रिप्ट की तुलना
8. हिंदी फॉन्ट्स का विकास : डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि से
9. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा प्रस्तुत हिंदी टाइपिंग साक्षरता की चुनौतियाँ और समाधान
10. डॉ. शैलेश शुक्ला के विश्लेषण में सोशल मीडिया ब्रांडिंग में हिंदी की भूमिका
11. सोशल मीडिया मार्केटिंग टूल्स की समीक्षा : डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति के आधार पर
12. डॉ. शैलेश शुक्ला के विचारों में सामाजिक अभियानों में हिंदी की शक्ति
13. ग्रामीण भारत में डिजिटल हिंदी का प्रसार : डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टिकोण से
14. डॉ. शैलेश शुक्ला के विश्लेषण में युवाओं की डिजिटल संस्कृति और हिंदी
15. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी : डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक का विश्लेषण
16. हिंदी अनुवाद तकनीकों पर डॉ. शैलेश शुक्ला का शोधपरक मूल्यांकन
17. नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग में हिंदी की संभावनाएँ : डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुसार
18. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक में रोबोटिक्स और हिंदी भाषा का संगम
19. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा रचित हिंदी-अनुवाद में सांस्कृतिक अंतर्वस्तु की भूमिका
20. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में डिजिटल प्रकाशन : लेखक, पाठक और प्लेटफॉर्म
21. हिंदी डिजिटल पाठकों की प्रवृत्तियाँ : डॉ. शैलेश शुक्ला की अंतर्दृष्टि
22. ई-शिक्षा में हिंदी भाषा का स्थान : डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के आलोक में
23. हिंदी और SEO के तकनीकी पक्ष : डॉ. शैलेश शुक्ला की समीक्षा
24. भविष्य की ओर हिंदी और तकनीक : डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक का विमर्शात्मक विश्लेषण
25. डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुभवों में डिजिटल पत्रकारिता और हिंदी भाषा का परिदृश्य
26. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में पॉडकास्ट, यूट्यूब और डिजिटल साहित्य में हिंदी की भूमिका
27. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक के आलोक में मोबाइल ऐप्स और हिंदी भाषा का प्रयोग
28. डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति में डिजिटल हिंदी कविता और छवि प्रस्तुति की प्रवृत्तियाँ
29. ब्लॉगिंग संस्कृति और हिंदी अभिव्यक्ति : डॉ. शैलेश शुक्ला की वैचारिक पृष्ठभूमि
30. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा प्रतिपादित हिंदी की डिजिटल लेखन शैली और भाषा प्रवाह
31. राजभाषा नीति और तकनीकी साधनों का समन्वय : डॉ. शैलेश शुक्ला का विश्लेषण
32. डॉ. शैलेश शुक्ला के अनुसार सरकारी संस्थानों में तकनीकी हिंदी का व्यवहारिक पक्ष
33. डॉ. शैलेश शुक्ला के विचारों में हिंदी के तकनीकी टूल्स का प्रशिक्षण पक्ष
34. डॉ. शैलेश शुक्ला की कृति में डिजिटल हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता
35. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में डिजिटल साहित्य की गुणवत्ता और प्रामाणिकता
36. डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा प्रतिपादित टेक्स्ट, इमेज और वीडियो रूप में हिंदी की बहुविधता
37. डॉ. शैलेश शुक्ला के आलेखों में तकनीकी नवाचार और हिंदी साहित्य का समन्वय
38. डॉ. शैलेश शुक्ला की पुस्तक में हिंदी तकनीक की चुनौतियाँ और सुधार के सुझाव
39. हिंदी भाषा में नवाचार और स्टार्टअप की भूमिका : डॉ. शैलेश शुक्ला की अंतर्दृष्टि
40. डॉ. शैलेश शुक्ला की दृष्टि में हिंदी का डिजिटलीकरण : एक समीक्षात्मक अध्ययन
एवं पुस्तक की शोधपरक समीक्षा पर आधारित अन्य कोई भी संबंधित विषय

सम्मान समारोह 
सभी विजेताओं की घोषणा हमारे ऑनलाइन मंचों पर की जाएगी और एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। सभी सम्मानित किए गए प्रतिभागियों को प्रबंधन द्वारा निर्धारित सम्मानित राशि के बराबर या अधिक मूल्य की पुस्तकें उनके दिए गए डाक पते पर प्रेषित की जाएंगी। भारत से बाहर के विजेताओं के मामले में डाक खर्च देय होगा।
प्राप्त हुए गुणवत्तापूर्ण आलेखों का प्रकाशन एवं लोकार्पण
* प्रतियोगिता के सभी उच्च गुणवत्ता वाले आलेखों को ISBN युक्त पुस्तक / शोध-पत्रिका / डिजिटल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
* चयनित लेखों के संकलन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकार्पण किया जाएगा।
प्रतियोगिता पंजीकरण शुल्क
कोई शुल्क देय नहीं है। यह सम्मान योजना पूर्णतः निःशुल्क है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
निर्णायकों का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।
इस शोधपरक आलेख लेखन प्रतियोगिता से संबंधित समस्त जानकारी आयोजक मंडल द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार की गई है, तथापि इसमें दी गई सूचनाएँ बिना किसी पूर्व सूचना के संशोधित की जा सकती हैं। आयोजक मंडल द्वारा प्रस्तुत नियम, पुरस्कार विवरण एवं अन्य जानकारी पूरी सावधानी से प्रदान की गई है, परंतु किसी भी प्रकार की त्रुटि, विसंगति या परिवर्तन की स्थिति में आयोजक संस्था की उत्तरदायित्व सीमित रहेगा।
प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत किए गए आलेख उनके स्वयं के विचार, विश्लेषण एवं निष्कर्ष हैं, जिनकी संपूर्ण वैचारिक जिम्मेदारी लेखक की होगी। आयोजक संस्था इन विचारों से आवश्यक नहीं कि सहमत हो। किसी भी प्रकार की सामग्री में यदि कॉपीराइट या बौद्धिक संपदा अधिकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित लेखक की होगी, न कि आयोजक संस्था की।
यह अंतरराष्ट्रीय शोध सम्मान योजना शोध एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है, इसका कोई वाणिज्यिक लाभ आयोजक संस्था द्वारा नहीं लिया जा रहा है। प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है और पुरस्कार/प्रकाशन केवल योग्यता के आधार पर निर्णयित किए जाएंगे। पर्याप्त संख्या में गुणवत्तापूर्ण आलेख न प्राप्त होने की स्थिति में आयोजक संस्थाओं के प्रबंधन द्वारा प्रतियोगिता रद्द की जा सकती है।

न्यायक्षेत्र
यदि इस प्रतियोगिता से संबंधित किसी सूचना, निर्णय या निष्कर्ष से कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसका निवारण केवल लखनऊ (उत्तर प्रदेश) न्यायक्षेत्र में ही किया जाएगा।
संपर्क
ईमेल : [email protected]
वेबसाइट : SrijanAustralia.SrijanSansar.com
पूनम चतुर्वेदी शुक्ला
संस्थापक-निदेशक
अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन एवं
न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन
प्रशांत चौबे
संस्थापक-निदेशक
अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन




प्रयागराज में हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के अवसर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 22-23 जून को

प्रयागराज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों को समर्पित भव्य आयोजन

प्रयागराज, जून 2025। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा के सुअवसर 30 मई 2025 से 30 मई 2026 तक न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशनद्वारा मनाए जा रहे ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष – 2025-26’ के विभिन्न कार्यक्रमों की शृंखला के अंतर्गत एक ऐतिहासिक और बहुआयामी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 22-23 जून 2025 को प्रयागराज स्थित जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) में किया जा रहा है।

यह आयोजन न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से, देश-विदेश की अनेक शैक्षणिक, सांस्कृतिक और पत्रकारिता संस्थाओं के सहभाग से संपन्न हो रहा है। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय है— प्रयागराज की हिंदी पत्रकारिता : प्रवृत्तियाँ, चुनौतियाँ और संभावनाएँ, जो कि हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रयागराज की ऐतिहासिक भूमिका और भविष्य की दिशा को रेखांकित करेगा।

यह दो दिवसीय संगोष्ठी हाइब्रिड मोड में आयोजित की जा रही है, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, पत्र-पत्रिकाओं, शोध संस्थानों और मीडिया संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।

इसमें त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर (पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा), बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज्म, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह), अमरावती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन (वाराणसी), थाईलैंड हिंदी परिषद, आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, और सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप  जैसी अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भागीदारी कर रही हैं।

इस संगोष्ठी की अंतरराष्ट्रीय आयोजन समिति की संरक्षक प्रो. आशा शुक्ला (पूर्व कुलगुरु, ब्राउस, इंदौर) हैं, जबकि मार्गदर्शक की भूमिका में प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस एवं अधिष्ठाता, साहित्य संकाय, त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय) हैं।

इस संगोष्ठी की अंतरराष्ट्रीय आयोजन समिति के के अध्यक्ष एवं संरक्षक डॉ. शैलेश शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक हैं।

मुख्य संयोजक की भूमिका में श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन) हैं, जबकि संयोजक  हैं श्री प्रशांत चौबे, वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के संस्थापक-निदेशक।

संगोष्ठी में देश-विदेश के अनेक विशिष्ट वक्ता और विद्वान सहभाग करेंगे, जिनमें प्रो. असीम कुमार मुखर्जी (अध्यक्ष, शासी निकाय, जगत तारन कॉलेज), प्रो. आशिमा घोष (प्राचार्या), प्रो. कुमार वीरेन्द्र सिंह (अध्यक्ष, राजभाषा कार्यान्वयन समिति), डा. रविनंदन सिंह (वरिष्ठ साहित्यकार), डा. धनंजय चोपड़ा (मीडिया अध्ययन केंद्र), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, संपादक, मधुराक्षर एवं सह आचार्य, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, डॉ. शशि दूकन (वरिष्ठ ब्रोडकास्टर, मॉरीशस), कपिल कुमार (संपादक, सृजन यूरोप अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, बेल्जियम), अरुण नामदेव (राष्ट्रीय संपादक, सृजन अमेरिका अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, डलास, अमेरिका), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (राष्ट्रीय संपादक, सृजन मॉरीशस अंतरराष्ट्रीय पत्रिका) आदि प्रमुख हैं।

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यह संगोष्ठी न केवल प्रयागराज की पत्रकारिता पर केंद्रित होगी, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के वैश्विक विस्तार, डिजिटल मीडिया के प्रभाव, भाषा-संवर्द्धन और नई पीढ़ी की भूमिका जैसे ज्वलंत विषयों पर भी विमर्श प्रस्तुत करेगी। कार्यक्रम से संबंधित समस्त जानकारी, पंजीकरण लिंक, और ऑनलाइन सहभाग हेतु विवरण https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर उपलब्ध हैं। फ़ेसबुक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों से भी इस वैश्विक कार्यक्रम से जुड़ा जा सकता है।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

 न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन तथा अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन विश्वस्तरीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता की स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ मंच पर लाकर संवाद, विमर्श और नवाचार की दिशा में एक निर्णायक पहल करेगा। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है, बल्कि डिजिटल युग में उसके बदलते स्वरूप को भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनाता है। यह महीना निश्चित रूप से हिंदी के लिए एक नई जागरूकता, आत्मगौरव और अंतरराष्ट्रीय संवाद का उत्सव सिद्ध होगा। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान और भविष्य के पुल की भांति कार्य करेगा तथा प्रयागराज को एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता विमर्श के केंद्र में स्थापित करेगा। यह कार्यक्रम हिंदी के गौरव को अंतरराष्ट्रीय पटल पर नए शिखर तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास है।




हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता : विविध आयाम” विषयक अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन 17 जून को

राजमाता जीजाबाई की 352वीं पुण्यतिथि पर

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता : विविध आयाम” विषयक अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन

17 जून 2025 को शाम 8:40 बजे (भारतीय समय) भारतवर्ष की महान प्रेरणास्त्रोत, मराठा स्वराज्य की शिल्पकार और छत्रपति शिवाजी महाराज की मातृशक्ति राजमाता जीजाबाई की 352वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता को समर्पित एक अत्यंत विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ की विविध कार्यक्रम श्रृंखला का हिस्सा है, जो 30 मई 2025 से 30 जून 2025 तक हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर संचालित हो रहा है।

यह संवाद “हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता : विविध आयाम” विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें हिंदी पत्रकारिता के साहित्यिक सरोकार, विमर्श की परंपरा, भाषा का सौंदर्यशास्त्र और साहित्यिक अभिव्यक्ति के नवीन माध्यमों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस अवसर पर आमंत्रित विषय-विशेषज्ञ होंगे वरिष्ठ आलोचक, संपादक एवं शिक्षाविद डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, जो मधुराक्षर पत्रिका के संस्थापक-संपादक हैं तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फगवाड़ा में सह-आचार्य (हिंदी) के रूप में कार्यरत हैं।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला द्वारा किया जाएगा।

यह संवाद विशेष रूप से हिंदी पत्रकारिता में साहित्यिक दृष्टि के योगदान, विचारधारा और संवेदना को रेखांकित करेगा, जो समकालीन डिजिटल युग में भी अपनी सशक्त उपस्थिति बनाए हुए है। कार्यक्रम में यह विचार भी प्रमुखता से सामने लाया जाएगा कि किस प्रकार राजमाता जीजाबाई जैसी प्रेरणादायी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से प्राप्त नारी चेतना आज के साहित्यिक लेखन और पत्रकारिता में दृष्टिगोचर होती है।

कार्यक्रम का आयोजन भारत के साथ-साथ विश्वभर की प्रमुख संस्थाओं और पत्रिकाओं के सहयोग से हो रहा है, जिनमें त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज्म, एकलव्य विश्वविद्यालय, अमरावती ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, थाईलैंड हिंदी परिषद, और आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन प्रमुख हैं।

साथ ही, सृजन समूह की अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएं — सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, सृजन मलेशिया, सृजन कतर और मधुराक्षर — इस वैश्विक आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम के प्रमुख आयोजकों में मुख्य संयोजक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला, अध्यक्ष एवं संरक्षक डॉ. शैलेश शुक्ला, राष्ट्रीय संयोजक डॉ. कल्पना लालजी (संपादक – सृजन मॉरीशस), संयोजक श्री प्रशांत चौबे (संस्थापक – अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन), और सह संयोजकों में डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, डॉ. हृदय नारायण तिवारी, प्रो. रतन कुमारी वर्मा, श्री कपिल कुमार, श्री अरुण नामदेव, शालिनी गर्ग आदि जैसे विविध अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हैं।

मार्गदर्शक के रूप में प्रो. विनोद कुमार मिश्रा और संरक्षक के रूप में प्रो. आशा शुक्ला की भूमिका उल्लेखनीय रहेगी।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

 न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन तथा अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन विश्वस्तरीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता की स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं को एक साथ मंच पर लाकर संवाद, विमर्श और नवाचार की दिशा में एक निर्णायक पहल करेगा। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है, बल्कि डिजिटल युग में उसके बदलते स्वरूप को भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनाता है। यह महीना निश्चित रूप से हिंदी के लिए एक नई जागरूकता, आत्मगौरव और अंतरराष्ट्रीय संवाद का उत्सव सिद्ध होगा।




विविध आयामों में विस्तार लेती वैश्विक हिंदी पत्रकारिता : विशेषज्ञ वार्ता की ऐतिहासिक प्रस्तुति

विविध आयामों में विस्तार लेती वैश्विक हिंदी पत्रकारिता : विशेषज्ञ वार्ता की ऐतिहासिक प्रस्तुति

16 जून 2025, शाम 6 :00 बजे (भारत समय) — अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 के अंतर्गत आयोजित एक महत्वपूर्ण संवादमूलक कार्यक्रम “हिंदी की वैश्विक पत्रकारिता : विविध आयाम” ने वैश्विक मंच पर हिंदी पत्रकारिता के प्रभाव, समस्याएं, अवसरों और सांस्कृतिक दायित्वों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया। यह कार्यक्रम पत्रकारिता की 200 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा का एक विचारोत्तेजक और दूरगामी पड़ाव सिद्ध हुआ।

यह सारगर्भित संवाद न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इसके आयोजन में त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर – पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमेनिटीज़ एंड जर्नलिज्म (बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी), आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह), थाईलैंड हिंदी परिषद, सृजन समूह की अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएं (मॉरीशस, यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, थाईलैंड, कतर), जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय आदि संस्थानों की सक्रिय सहभागिता रही।

 

हिंदी पत्रकारिता के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नए विमर्श  : मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित रहे डॉ. जवाहर कर्नावट (निदेशक, अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र, रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल), जिन्होंने हिंदी पत्रकारिता के वैश्विक स्वरूप की बहुआयामी पड़ताल की। उन्होंने डिजिटल माध्यमों, प्रवासी पत्रकारिता, भाषिक विविधता, राजनीतिक-सांस्कृतिक संवाद, नई पीढ़ी की सहभागिता और वैश्विक पाठक-समुदाय की बदलती मानसिकता पर ठोस आंकड़ों और दृष्टांतों के साथ विचार प्रस्तुत किए।

उन्होंने 27 देशों की हिंदी पत्रकारिता से जुड़े पत्र-पत्रिकाओं की प्रतियाँ एकत्रित करने के लिए की गईं विभिन्न देशों की यात्राओं, उन देशों के राष्ट्रीय पुस्तकालयों और अभिलेखागारों में किए गए अपने शोध को विस्तार से बताया।

डॉ. जवाहर कर्नावट ने यह भी बताया कि विदेश में 1883 से हिंदी पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है और विभिन्न देशों में प्रकाशित होने वाले पत्र-पत्रिकाओं में भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष के पक्ष में सामग्री प्रकाशित की। उन्होंने बताया कि बहुत सी पत्रिकाएं वर्षों तक हाथ से लिखकर प्रकाशित की गईं।

कार्यक्रम के संचालक एवं सह-वक्ता डॉ. शैलेश शुक्ला (वरिष्ठ पत्रकार, वैश्विक प्रधान संपादक – सृजन संसार) ने वैश्विक पत्रकारिता के तकनीकी, व्यावसायिक और सांस्कृतिक पक्षों की विवेचना करते हुए हिंदी को विश्व मंच पर प्रतिस्थापित करने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने प्रवासी भारतीय समाज में हिंदी पत्रकारिता के योगदान और संभावनाओं की व्याख्या की।

गंभीर संवाद, बहस और नवदृष्टि  : संवाद के दौरान अनेक प्रश्नों और मुद्दों पर प्रकाश डाला गया — जैसे हिंदी पत्रकारिता की सांस्कृतिक ज़िम्मेदारी, क्षेत्रीय बनाम वैश्विक एजेंडा, न्यू मीडिया (New Media) का प्रभाव, हिंदी बनाम अन्य भारतीय भाषाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI) से पत्रकारिता की दिशा और प्रवासी भारतीयों की पहचान की रक्षा में हिंदी मीडिया की भूमिका।

सक्रिय संयोजन और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता

इस भव्य आयोजन की मुख्य संयोजक रहीं श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन), जबकि आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं संरक्षक की भूमिका में रहे डॉ. शैलेश शुक्ला, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा और लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता को ‘वाणी के स्तर से नीति के स्तर तक’ पहुँचाने की आवश्यकता बताई।

संयोजक श्री प्रशांत चौबे (अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन), राष्ट्रीय संयोजक डॉ. कल्पना लालजी (सृजन मॉरीशस), मार्गदर्शक प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय), संरक्षक प्रो. आशा शुक्ला (आशा पारस फाउंडेशन), तथा सह संयोजकों की अंतरराष्ट्रीय टीम — डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, प्रो. रतन कुमारी वर्मा, डॉ. हृदय नारायण तिवारी, श्री कपिल कुमार, डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, श्री अरुण नामदेव, श्रीमती शालिनी गर्ग — ने अपनी प्रभावी भूमिका निभाई।

दुनिया भर से सहभागिता और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं  : कार्यक्रम में भारत के साथ-साथ मॉरीशस, थाईलैंड, मलेशिया, अमेरिका, यूरोप, कतर, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से जुड़े हिंदीप्रेमी, पत्रकार, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी ऑनलाइन शामिल हुए। सोशल मीडिया चैनलों, टेलीग्राम एवं व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से इस आयोजन की जानकारी सैकड़ों लोगों तक पहुँची।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं और आयोजकों ने इस बात पर सहमति जताई कि हिंदी पत्रकारिता अब केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक वैश्विक संवाद का साधन बन चुकी है। यह संवाद, आलोचना, जनचेतना, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता का माध्यम है। इसके विविध आयामों की समझ और विकास हेतु इस प्रकार के संवाद निरंतर आवश्यक हैं।

यह कार्यक्रम न केवल “अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025” का एक महत्त्वपूर्ण आयाम था, बल्कि यह आगामी “अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष – 2025-26” की दिशा निर्धारित करने वाला प्रेरक संवाद भी सिद्ध हुआ।




“हिंदी की वेब पत्रिकाओं का प्रचार-प्रसार : एसईओ एवं अन्य तकनीकी आयाम” विषय पर संवाद आज शाम 9 बजे से

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष – 2025–26 के अंतर्गत 30 मई से 30 जून 2025 तक आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 की विविध शृंखला में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम 11 जून 2025, रात 9:00 बजे आयोजित किया जा रहा है। इस विशेष संवाद का विषय है: “हिंदी की वेब पत्रिकाओं का प्रचार-प्रसार : एसईओ (Search Engine Optimization) एवं अन्य तकनीकी आयाम”

 

यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन युवा मीडिया कर्मियों, वेब-पत्रिका संपादकों, डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े शोधकर्ताओं, कंटेंट क्रिएटर्स एवं प्रकाशकों के लिए उपयोगी है जो हिंदी को वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में प्रभावी और प्रतिस्पर्धी बनाना चाहते हैं।

इस संवाद कार्यक्रम के मुख्य वक्ता होंगे – वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ एवं Search MarkUp (नोएडा) के निदेशक श्री सोनू पाण्डेय, जो वेब पत्रिकाओं के SEO (Search Engine Optimization), keyword optimization, backlink building, structured metadata, mobile optimization, content strategy एवं search ranking बढ़ाने की तकनीकों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन देंगे।

यह संवाद न केवल डिजिटल मार्केटिंग की समग्र समझ देगा, बल्कि हिंदी वेब सामग्री को Google जैसे प्रमुख सर्च इंजनों में उच्च स्थान दिलाने की रणनीतियाँ भी सुझाएगा।

संवाद एवं मंच संचालन करेंगे – वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, संपादक एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला

वे हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर डिजिटल मीडिया के वर्तमान परिदृश्य तक की चर्चा करते हुए इस बात पर ज़ोर देंगे कि आज SEO कोई तकनीकी विकल्प नहीं, बल्कि वेब प्रकाशन के लिए एक अनिवार्यता बन चुका है।

इस कार्यक्रम का आयोजन न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित  किया जा रहा है।

इस बहुस्तरीय आयोजन में सहभागी संस्थाएँ हैं – त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय (डॉ. आंबेडकर चेयर), पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा), बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज्म (बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी), एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह), जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज (प्रयागराज), थाईलैंड हिंदी परिषद, आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एवं अंतरराष्ट्रीय सृजन पत्रिकाएँ – सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन अमेरिका, सृजन मलेशिया, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, सृजन कतर एवं मधुराक्षर आदि प्रसिद्ध हिंदी पत्रिकाएँ

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक हैं – श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन)। अध्यक्ष एवं संरक्षक हैं – डॉ. शैलेश शुक्ला

 

 संयोजक – श्री प्रशांत चौबे (संस्थापक-निदेशक, अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन)। अन्य सह-संयोजकों में शामिल हैं – डॉ. कल्पना लालजी (संपादक, सृजन मॉरीशस), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री (मधुराक्षर), प्रो. रतन कुमारी वर्मा (जगत तारन कॉलेज), डॉ. हृदय नारायण तिवारी (एकलव्य विश्वविद्यालय), श्री कपिल कुमार (सृजन यूरोप), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (सृजन मॉरीशस), श्री अरुण नामदेव (सृजन अमेरिका), शालिनी गर्ग (सृजन कतर) आदि।

संरक्षक – प्रो. आशा शुक्ला (पूर्व कुलगुरु, ब्राउस, म.प्र.)
मार्गदर्शक – प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस एवं अधिष्ठाता, त्रिपुरा विश्वविद्यालय)

कार्यक्रम से जुड़ी सभी जानकारी, पंजीकरण एवं लिंक निम्न माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है:
🔗 https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms
🔗 https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

यह संवाद हिंदी पत्रकारिता की तकनीकी सुदृढ़ता की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध होगा और नई पीढ़ी के लिए डिजिटल दक्षता का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस ऐतिहासिक आयोजन का लाभ सभी डिजिटल हिंदी मीडिया कर्मियों को अवश्य लेना चाहिए।




झारखंड में हिंदी शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श 

पं. रामप्रसाद बिस्मिल की 129वीं जयंती पर विषय-विशेषज्ञ से संवाद

झारखंड में हिंदी शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श 

‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में 11 जून 2025 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है – “झारखंड में हिंदी शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता”।

यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के अंतर्गत मनाए जा रहे “अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025” की श्रृंखला का एक प्रमुख सोपान है। विशेष बात यह है कि यह आयोजन भारत माता के महान सपूत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिकारी कवि और अमर शहीद पं. रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की 129वीं जयंती को समर्पित किया गया है।

यह वैश्विक आयोजन त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर (पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा), बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज़्म (बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी), आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह), थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय सहित सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन अमेरिका, सृजन यूरोप, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन थाईलैंड और मधुराक्षर जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के सहयोग से संपन्न होगा।

इस ऐतिहासिक आयोजन में मीडिया, साहित्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विद्वान भाग लेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं– हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के सुविख्यात विद्वान प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय, जो रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं।

मंच संचालन और संवाद का उत्तरदायित्व निभाएंगे वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और वैश्विक संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला, जो सृजन पत्रिका समूह के वैश्विक नेतृत्वकर्ता हैं।

कार्यक्रम की मुख्य संयोजक श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला हैं, जो ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ तथा ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ की संस्थापक-निदेशक हैं।

साथ ही, राष्ट्रीय संयोजक के रूप में डॉ. कल्पना लालजी (संपादक, सृजन मॉरीशस), संयोजक श्री प्रशांत चौबे (अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन), तथा सह-संयोजक मंडल में डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, प्रो. रतन कुमारी वर्मा, डॉ. हृदय नारायण तिवारी, श्री कपिल कुमार, डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, श्री अरुण नामदेव, शालिनी गर्ग आदि अनेक महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। मार्गदर्शक के रूप में कार्यक्रम से जुड़े हैं प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (पूर्व महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस) और प्रो. आशा शुक्ला (पूर्व कुलगुरु, ब्राउस, महू)।

झारखंड जैसे हिंदी समृद्ध प्रदेश के साहित्यिक एवं पत्रकारिता परिप्रेक्ष्य को केंद्र में रखकर यह विमर्श न केवल हिंदी भाषा के भविष्य की राहें खोलेगा, बल्कि पं. रामप्रसाद बिस्मिल जैसे बलिदानी वीर की स्मृति को भी अक्षुण्ण बनाए रखने का माध्यम बनेगा। यह आयोजन वैश्विक हिंदी बिरादरी के लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय है।

आयोजन की समस्त जानकारी, पंजीकरण और कार्यक्रम लिंक ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के आधिकारिक लिंक https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर उपलब्ध हैं।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

🔹 मुख्य संयोजक: श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला, संस्थापक निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन व अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन।




हिंदी का वैश्विक परिदृश्य : विविध आयाम’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संवाद

‘हिंदी का वैश्विक परिदृश्य : विविध आयाम’ विषय पर होगा अंतरराष्ट्रीय संवाद
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की स्मृति में 12 जून को विशेष आयोजन 

लखनऊ/मॉरीशस/त्रिपुरा। हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष को समर्पित ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष 2025–26’ के अवसर पर 12 जून 2025 को एक विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय संवाद आयोजित होने जा रहा है, जिसका विषय है ‘हिंदी का वैश्विक परिदृश्य : विविध आयाम’

यह आयोजन ‘24वें विश्व बाल श्रम निषेध दिवस’ के अवसर पर भी विशेष महत्व रखता है।

कार्यक्रम का आयोजन न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस आयोजन में त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा), बीआईयू कॉलेज ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड जर्नलिज्म, बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्य प्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इन्स्टिच्यूशन, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, और विश्व की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रिकाएं — सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन अमेरिका, सृजन कतर, सृजन थाईलैंड, सृजन मलेशिया, सृजन यूरोप, मधुराक्षर आदि सहयोगी संस्थाओं के रूप में सहभागी होंगी।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:
🔹 विषय-विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहेंगे: श्री अनिल जोशी जी 

श्री अनिल जोशी, वरिष्ठ लेखक, विचारक एवं भारतीय भाषा मंच की राष्ट्रीय टोली के सदस्य।

🔹 वार्ताकार और मंच संचालन करेंगे डॉ. शैलेश शुक्ला 

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शुक्ला के अनुभव और संवाद शैली इस कार्यक्रम को और भी ज्ञानवर्धक और संवादपरक बनाएगी। इस कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के सफर को याद करते हुए डिजिटल युग में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव पर चर्चा होगी। इसके साथ ही न्यू मीडिया के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता के प्रशिक्षण में आने वाली संभावनाओं, चुनौतियों और नई तकनीकी दिशा पर भी विचार-विमर्श होगा।

इस कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. कल्पना लालजी (राष्ट्रीय संयोजक, सृजन मॉरीशस), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री (संस्थापक-संपादक, मधुराक्षर), प्रो. रतन कुमारी वर्मा (जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज), डॉ. हृदय नारायण तिवारी (एकलव्य विश्वविद्यालय), श्री कपिल कुमार (वरिष्ठ पत्रकार, सृजन यूरोप), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (राष्ट्रीय संपादक, सृजन मॉरीशस), श्री अरुण नामदेव (राष्ट्रीय संपादक, सृजन अमेरिका), शालिनी गर्ग (राष्ट्रीय संपादक, सृजन कतर), प्रो. आशा शुक्ला (संरक्षक) और प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (मार्गदर्शक) सहित अनेक विद्वानों का योगदान सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम की सफलता के लिए श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (मुख्य संयोजक एवं संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) और श्री प्रशांत चौबे (संयोजक, अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) का विशेष सहयोग उल्लेखनीय है। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता में तकनीकी बदलाव और प्रशिक्षण के नए दृष्टिकोण पर विमर्श करेगा, बल्कि भारत के गौरवशाली सैन्य इतिहास के प्रति भी नई पीढ़ी को जागरूक करेगा।

आयोजकों ने हिंदी पत्रकारिता, मीडिया शिक्षण, तकनीकी शिक्षा, रक्षा अध्ययन, अभिलेख विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से जुड़े सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों और भाषा प्रेमियों से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

आयोजन की समस्त जानकारी, पंजीकरण और कार्यक्रम लिंक ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के आधिकारिक लिंक https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर उपलब्ध हैं।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

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और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

आयोजकों का विश्वास है कि यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता को नई ऊँचाइयाँ देने के साथ-साथ फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के बलिदान और उनकी नेतृत्वगुणों की गौरवगाथा को भी नई पीढ़ी तक पहुँचाएगा।


–  श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला, मुख्य संयोजक, अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष – 2025-26 एवं  संस्थापक निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन व अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन।




कृत्रिम मेधा के दौर में हिंदी पत्रकारिता प्रशिक्षण विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 27 जून को

फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि पर आयोजन संबंधित विशेष समाचार
कृत्रिम मेधा के दौर में हिंदी पत्रकारिता प्रशिक्षण विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 27 जून को

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह 2025’ के अंतर्गत कृत्रिम मेधा के दौर में हिंदी पत्रकारिता प्रशिक्षण विषय पर एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 27 जून 2025 को शाम 7:30 बजे किया जाएगा।

यह आयोजन ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें हिंदी पत्रकारिता के साथ-साथ सैन्य इतिहास और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रतीक रहे फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी।

इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा), आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्य प्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इन्स्टिच्यूशन, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय तथा सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप, मधुराक्षर आदि अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) के बढ़ते उपयोग और उसके प्रभावों पर गहन संवाद को समर्पित होगा, जिसमें विषय-विशेषज्ञ प्रो. संजीव भानावत (प्रसिद्ध मीडिया विशेषज्ञ, पूर्व अध्यक्ष, जनसंचार केन्द्र, राजस्थान विश्वविद्यालय और संपादक, कम्युनिकेशन टुडे) अपने विचार साझा करेंगे।

फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और भारतीय सैन्य इतिहास में उनके अतुलनीय योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, जिन्हें प्यार से ‘सैम बहादुर’ कहा जाता है, 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व करते हुए देश को ऐतिहासिक विजय दिलाने वाले भारत के पहले फ़ील्ड मार्शल थे। 27 जून 2008 को उनका निधन हुआ था, और इस आयोजन में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा।

कार्यक्रम में वार्ताकार एवं मंच संचालक की भूमिका वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और ‘सृजन संसार’ अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला निभाएंगे।

डॉ. शुक्ला के अनुभव और संवाद शैली इस कार्यक्रम को और भी ज्ञानवर्धक और संवादपरक बनाएगी। इस कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के सफर को याद करते हुए डिजिटल युग में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव पर चर्चा होगी। इसके साथ ही न्यू मीडिया के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता के प्रशिक्षण में आने वाली संभावनाओं, चुनौतियों और नई तकनीकी दिशा पर भी विचार-विमर्श होगा।

इस कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. कल्पना लालजी (राष्ट्रीय संयोजक, सृजन मॉरीशस), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री (संस्थापक-संपादक, मधुराक्षर), प्रो. रतन कुमारी वर्मा (जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज), डॉ. हृदय नारायण तिवारी (एकलव्य विश्वविद्यालय), श्री कपिल कुमार (वरिष्ठ पत्रकार, सृजन यूरोप), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (राष्ट्रीय संपादक, सृजन मॉरीशस), श्री अरुण नामदेव (राष्ट्रीय संपादक, सृजन अमेरिका), शालिनी गर्ग (राष्ट्रीय संपादक, सृजन कतर), प्रो. आशा शुक्ला (संरक्षक) और प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (मार्गदर्शक) सहित अनेक विद्वानों का योगदान सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम की सफलता के लिए श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (मुख्य संयोजक एवं संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) और श्री प्रशांत चौबे (संयोजक, अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) का विशेष सहयोग उल्लेखनीय है। यह आयोजन न केवल हिंदी पत्रकारिता में तकनीकी बदलाव और प्रशिक्षण के नए दृष्टिकोण पर विमर्श करेगा, बल्कि भारत के गौरवशाली सैन्य इतिहास के प्रति भी नई पीढ़ी को जागरूक करेगा।

आयोजकों ने हिंदी पत्रकारिता, मीडिया शिक्षण, तकनीकी शिक्षा, रक्षा अध्ययन, अभिलेख विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से जुड़े सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों और भाषा प्रेमियों से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

आयोजन की समस्त जानकारी, पंजीकरण और कार्यक्रम लिंक ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के आधिकारिक लिंक https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर उपलब्ध हैं।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

आयोजकों का विश्वास है कि यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता को नई ऊँचाइयाँ देने के साथ-साथ फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के बलिदान और उनकी नेतृत्वगुणों की गौरवगाथा को भी नई पीढ़ी तक पहुँचाएगा।




ऑस्ट्रेलिया में हिंदी : विविध आयाम’ विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 9 जून 2025 को

विशेष रिपोर्ट

ऑस्ट्रेलिया में हिंदी : विविध आयाम विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह 2025’ के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया में हिंदी: विविध आयाम विषय पर एक विशेष विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 9 जून 2025, रविवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 1:00 बजे किया जाएगा। यह कार्यक्रम ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस विशेष वार्ता का आयोजन 16वें अंतरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस के अवसर पर किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा के वैश्विक परिदृश्य में संरक्षण, अभिलेखीय दृष्टिकोण और डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से अभिलेखागार की नई संभावनाओं को उजागर करना है।

कार्यक्रम का आयोजन त्रिपुरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. आंबेडकर चेयर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा), आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, एकलव्य विश्वविद्यालय (दमोह, मध्य प्रदेश), अमरावती ग्रुप ऑफ इन्स्टिच्यूशन, थाईलैंड हिंदी परिषद, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय तथा सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन कतर, सृजन मलेशिया, सृजन अमेरिका, सृजन थाईलैंड, सृजन यूरोप और मधुराक्षर जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के सहयोग से किया जा रहा है। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा, जो हिंदी पत्रकारिता की विविधता और वैश्विक आयामों को नई दिशा देने का कार्य करेगा।

कार्यक्रम में विषय-विशेषज्ञ के रूप में श्रीमती रेखा राजवंशी को आमंत्रित किया गया है, जो वरिष्ठ लेखिका, साहित्यकार एवं सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की राष्ट्रीय संयोजक हैं। श्रीमती राजवंशी का हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है।

ऑस्ट्रेलिया में हिंदी के प्रचार-प्रसार, भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक समन्वय में उनकी भूमिका को विशेष रूप से सराहा जाता है। उन्होंने हिंदी भाषा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए साहित्यिक रचनाओं, पत्रकारिता और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से निरंतर कार्य किया है।

इस कार्यक्रम में वार्ताकार एवं मंच संचालक की भूमिका डॉ. शैलेश शुक्ला निभाएंगे, जो स्वयं वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, साहित्यकार एवं ‘सृजन संसार’ अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह के वैश्विक प्रधान संपादक हैं।

डॉ. शुक्ला के अनुभव और कुशल संचालन में यह संवाद और भी अधिक विचारोत्तेजक एवं संवादात्मक बन जाएगा।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, पत्रकारिता, साहित्यिक गतिविधियों और सांस्कृतिक समन्वय के ऐतिहासिक, वर्तमान और भविष्य के परिदृश्य पर विस्तार से विचार-विमर्श करना है। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय अभिलेख दिवस के संदर्भ में हिंदी भाषा और पत्रकारिता के अभिलेखीय दस्तावेजों के महत्व, संरक्षण और डिजिटलीकरण पर भी विशेष चर्चा की जाएगी। यह आयोजन डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता और भाषा के अभिलेखीय संदर्भ में चुनौतियों एवं संभावनाओं का विश्लेषण करने में भी सहायक होगा।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. कल्पना लालजी (राष्ट्रीय संयोजक, सृजन मॉरीशस), डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री (संस्थापक-संपादक, मधुराक्षर), प्रो. रतन कुमारी वर्मा (जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज), डॉ. हृदय नारायण तिवारी (एकलव्य विश्वविद्यालय), श्री कपिल कुमार (वरिष्ठ पत्रकार, सृजन यूरोप), डॉ. सोमदत्त काशीनाथ (राष्ट्रीय संपादक, सृजन मॉरीशस), श्री अरुण नामदेव (राष्ट्रीय संपादक, सृजन अमेरिका), शालिनी गर्ग (राष्ट्रीय संपादक, सृजन कतर), प्रो. आशा शुक्ला (संरक्षक) और प्रो. विनोद कुमार मिश्रा (मार्गदर्शक) सहित अनेक विद्वानों का योगदान सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम की सफलता के लिए श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला (मुख्य संयोजक एवं संस्थापक-निदेशक, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) और श्री प्रशांत चौबे (संयोजक, अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन, लखनऊ) का सक्रिय योगदान उल्लेखनीय है। यह आयोजन हिंदी भाषा, पत्रकारिता और अभिलेख संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की भूमिका को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

इस महोत्सव में भाग लेने हेतु सभी प्रतिभागियों को पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकरण लिंक :-  https://tinyurl.com/IHJM2025ForAllPrograms और क्यू आर कोड :- 

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए गूगल मीट लिंक – https://tinyurl.com/IHJM2025 और क्यू आर कोड उपलब्ध कराया गया है :-

आयोजन से जुड़ी ताज़ा जानकारी के लिए टेलीग्राम चैनल लिंक : https://t.me/SrijanAustraliaIEJournaL  और क्यू आर कोड :- 

व्हाट्सएप चैनल लिंक : https://whatsapp.com/channel/0029Vakop6x0lwgge8FkKy1v और क्यू आर कोड :- 

और व्हाट्सएप समूह लिंक : https://chat.whatsapp.com/KCXWeRI0jUYEhbcywcxyMa और क्यू आर कोड :- 

आयोजकों ने हिंदी भाषा, पत्रकारिता, अभिलेख विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों और भाषा प्रेमियों से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सहभागी बनने का अनुरोध किया है। आयोजन से संबंधित सभी विवरण, पंजीकरण और कार्यक्रम लिंक ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के आधिकारिक लिंक https://tinyurl.com/IHJM2025DetailsLinksQRCodes पर उपलब्ध हैं। आयोजकों का विश्वास है कि यह आयोजन ऑस्ट्रेलिया में हिंदी भाषा, पत्रकारिता और अभिलेख संरक्षण के क्षेत्र में सार्थक संवाद स्थापित करेगा और हिंदी के वैश्विक विस्तार को नई दिशा प्रदान करेगा।




खाद्य पदार्थों का खेत से थाली तक हो सुरक्षित सफ़र

7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष लेख

खाद्य पदार्थों का खेत से थाली तक हो सुरक्षित सफ़र

डॉ. शैलेश शुक्ला

वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार एवं

वैश्विक समूह संपादक, सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह 

हर साल 7 जून को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन के प्रति जागरूक करने का अवसर है, बल्कि यह पूरी वैश्विक खाद्य प्रणाली की समीक्षा करने का भी क्षण है। आज जब विज्ञान और तकनीक का स्तर चाँद तक पहुँच गया है, तब भी करोड़ों लोग या तो दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ रहे हैं या असुरक्षित खाद्य उत्पादों का शिकार बन रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल लगभग 42 लाख लोग असुरक्षित खाद्य के सेवन से मर जाते हैं, जिसमें से बच्चों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है। ऐसे में यह दिवस सिर्फ सूचना देने या कार्यक्रम आयोजित करने का दिन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए वैश्विक और स्थानीय स्तर पर ठोस नीति निर्माण का दिन बनना चाहिए। भारत जैसे विकासशील देशों में जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है और खाद्य श्रृंखला की निगरानी सीमित है, वहाँ यह मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है।

भोजन की गुणवत्ता केवल स्वाद और पोषण का मामला नहीं, बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। आजकल बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाने वाले पैक्ड फूड, स्ट्रीट फूड और प्रोसेस्ड सामग्री में भारी मात्रा में कीटनाशकों, रसायनों, प्रिज़र्वेटिव्स और मिलावट का प्रयोग हो रहा है। फलों पर वैक्सिंग, दूध में डिटर्जेंट, मावा में सिंथेटिक पदार्थ और तेल में खतरनाक रसायनों की मिलावट आम होती जा रही है। खाद्य सुरक्षा केवल बड़ी कंपनियों की ज़िम्मेदारी नहीं हो सकती, इसके लिए स्थानीय विक्रेताओं से लेकर रेस्तरां मालिकों, होटलों और यहां तक कि आम गृहणियों तक को जागरूक करना होगा। उपभोक्ता को भी यह जानने का अधिकार है कि उसके भोजन में क्या मिलाया गया है और किस प्रक्रिया से वह उनके घर तक पहुँचा है। यह पारदर्शिता तभी संभव है जब खाद्य सुरक्षा के नियम सख्त हों और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की जाए।

भारत में FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) इस दिशा में कई सकारात्मक कदम उठा रहा है, जैसे ‘ईट राइट इंडिया’, ‘फूड लाइसेंसिंग’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ से जोड़कर खाद्य मानकों को बेहतर करना। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि गाँवों, कस्बों और यहां तक कि बड़े शहरों में भी खाद्य निरीक्षण तंत्र बेहद कमजोर है। कई रेस्तराँ बिना लाइसेंस के कार्यरत हैं, खुलेआम अस्वास्थ्यकर खाना परोसा जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में तो खाद्य प्रयोगशालाएं ही उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि हर साल फूड पॉइज़निंग, डायरिया, हेपेटाइटिस और अन्य बीमारियों के हज़ारों मामले सामने आते हैं। यह सवाल पूछना ज़रूरी है कि जब भोजन जीवन की पहली आवश्यकता है, तो उसके सुरक्षित होने की गारंटी क्यों नहीं है? क्या यह समय नहीं है कि खाद्य सुरक्षा को भी स्वास्थ्य सेवा की तरह एक मौलिक अधिकार घोषित किया जाए?

खाद्य सुरक्षा केवल स्वच्छता और रसायन मुक्त भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्य श्रृंखला के हर चरण – उत्पादन, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, बिक्री और उपभोग – में गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ी है। उदाहरण के लिए, यदि कोई किसान कीटनाशक का अत्यधिक प्रयोग कर रहा है या अनाज को प्लास्टिक में खुले में रख रहा है, तो वह खाद्य असुरक्षा की शुरुआत है। उसी प्रकार, यदि गोदाम में रखे अनाज में नमी के कारण फफूंदी लग रही है या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खुले ट्रकों में खाद्य सामग्री धूल और धूप में प्रभावित हो रही है, तो वह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए यह ज़रूरी है कि खाद्य श्रृंखला के हर स्तर पर प्रशिक्षण, लाइसेंसिंग और सतत निगरानी की व्यवस्था हो। डिजिटल ट्रैकिंग, QR कोड आधारित खाद्य ट्रेसिंग और उपभोक्ता फीडबैक जैसे तकनीकी उपायों को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

खाद्य सुरक्षा की बात करते समय हमें स्कूलों, आंगनवाड़ियों और सामुदायिक भोजन केंद्रों को भी नहीं भूलना चाहिए। ये वे स्थान हैं जहाँ लाखों बच्चे और महिलाएं प्रतिदिन खाना खाते हैं और यदि यहां की गुणवत्ता खराब हो, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। मिड डे मील योजना में अक्सर ख़बरें आती हैं कि बच्चों को कीड़े लगे भोजन दिए गए, या रसोईघर में स्वच्छता का अभाव है। यह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध है। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों, जेलों और वृद्धाश्रमों में दिया जाने वाला भोजन भी गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। ये संस्थागत स्थान सरकार की सीधी ज़िम्मेदारी हैं और यदि यहाँ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो फिर सार्वजनिक स्वास्थ्य की बातें खोखली लगती हैं। खाद्य निरीक्षण दलों को इन जगहों पर नियमित और औचक जांच करने का अधिकार तथा संसाधन मिलना चाहिए।

आज की वैश्विक परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा का संबंध केवल स्वास्थ्य से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय से भी जुड़ गया है। जलवायु परिवर्तन, असंतुलित कृषि नीति, जल संकट और जैव विविधता की क्षति भी अब खाद्य गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। यदि मछलियों में पारा की मात्रा बढ़ रही है, तो वह समुद्र की गंदगी का परिणाम है। यदि सब्जियों में नाइट्रेट की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुँच रही है, तो वह ज़मीन की रासायनिक थकावट का संकेत है। इन समस्याओं से निपटने के लिए केवल खाद्य मंत्रालय नहीं, बल्कि पर्यावरण, जल संसाधन, ग्रामीण विकास और शहरी नियोजन विभागों को मिलकर काम करना होगा। बहुस्तरीय नीति और क्रॉस सेक्टोरल प्लानिंग के बिना खाद्य सुरक्षा एक सपना ही बनी रहेगी।

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2025 का विषय है “Safe Food Now for a Healthy Tomorrow” – यानी ‘आज का सुरक्षित भोजन ही कल का स्वस्थ भविष्य तय करेगा’। यह नारा अपने आप में एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। यदि हम आज बच्चों को दूषित खाना खिलाते हैं, तो हम एक बीमार और कमजोर पीढ़ी की नींव रख रहे हैं। यदि हम आज किसानों को केवल रासायनिक खेती की ओर धकेलते हैं, तो हम कल की ज़मीन को बंजर बना रहे हैं। यह समय है जब सरकार, उद्योग, किसान, उपभोक्ता और शिक्षा जगत – सभी मिलकर खाद्य सुरक्षा को एक राष्ट्र-निर्माण की प्राथमिकता बनाएं। केवल विज्ञापन, पोस्टर और एक दिन के उत्सव से कुछ नहीं बदलेगा। बदलाव तभी आएगा जब हर थाली में आने वाले कौर के पीछे एक ईमानदार और पारदर्शी प्रक्रिया होगी।

आख़िर में, खाद्य सुरक्षा केवल ‘क्या खा रहे हैं’ का सवाल नहीं, बल्कि ‘कैसे, कहाँ और किसके माध्यम से खा रहे हैं’ – इसका भी उत्तर मांगता है। जब तक समाज का हर व्यक्ति इस जिम्मेदारी को साझा नहीं करता, तब तक लाखों लोगों की सेहत, भविष्य और ज़िन्दगी असुरक्षित बनी रहेगी। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2025 हमें यही याद दिलाने आया है कि सुरक्षित भोजन कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक मानवीय अधिकार है। और यह अधिकार तब तक अधूरा है जब तक उसे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सुनिश्चित न किया जाए।

(लेखक डॉ. शैलेश शुक्ला वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, भाषाकर्मी होने के साथ-साथ ‘सृजन अमेरिका’, ‘सृजन ऑस्ट्रेलिया’, ‘सृजन मॉरीशस’, ‘सृजन मलेशिया’, ‘सृजन कतर’, ‘सृजन यूरोप’ जैसी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के वैश्विक प्रधान संपादक हैं। डॉ. शुक्ला द्वारा लिखित एवं संपादित 25 पुस्तकें प्रकाशित हैं। डॉ. शैलेश शुक्ला भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा प्रदत्त ‘राजभाषा गौरव पुरस्कार (2019-20)’  और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की हिंदी अकादमी द्वारा ‘नवोदित लेखक पुरस्कार (2004)’ सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मनो एवं पुरस्कारों से सम्मानित हैं।)