1

प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु कविता–शीर्षक=”वज़ूद “

कविता

“वज़ूद “

न होते हुए भी

तुम्हारा वज़ूद 

घेरे रहता है जैसे

चंद्रमा को वलय

घंटों चलता है

मौन सन्लाप तुमसे

निकल जाती हूं

बहुत दूर तुम्हारे साथ

किसी पहाड़ी के

नीचे खेत में

सुनती हूं

पसंदीदा गीत

जो गुनगुनाए थे

कानों में मेरे

सामने शीशे से

तुम्हीं देखते हो

मेरी चुस्त पोशाक

‘बड़ी सुंदर हो तुम’

कानों में फुसफुसााते हो 

जिंदा रहते हुए जन्नत

दिखाते हो तुम

अब यह तुम हो या हम

कहना है मुश्किल क्योंकि

तुम्हारा वज़ूद  हमारे वज़ूद  

में घुल सा गया है!!!!!!

 

नाम=डॉ॰रश्मि चौधरी 

पदनाम =व्याख्याता

संगठन=शा0के0आर0जी0कॉलेज,ग्वालियर 

डाक पता=60/1121 यमुनानगर (दर्पण काॅलोनी के पास)थाटीपुर ग्वालियर मध्यप्रदेश,भारत। पिन =474011

ईमेल = [email protected] 

मोबाइल नं0=9039032695

वाट्सअप नं0=9039032695

 

 




देश भक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता

कविता

(1)”प्रेम की गहराई”

यदि दिल की गहराइयों से

प्यार करते हो मुझसे

तो सोते फूटेंगे ज़रूर

उन्हीं गहराइयों से बहेगा

झरना झर-झर,कल-कल

हर एक जलकण से

जन्मेगा प्रेम मोती

खिल उठेगी सीप मुंह बाए

सागर की गहराई में

होता है अन्त जहां

प्रेमी युगल विश्राम करते हैं

बातें दो-चार करते हैं

पर प्रेम की गहराई

होती है अनंत !!!!!

(2) “वज़ूद”

न होते हुए भी तुम्हारा वज़ूद 

घेरे रहता है मुझे

जैसे चंद्रमा को वलय

घंटों चलता है

मौन सन्लाप तुमसे

निकल जाती हूं

बहुत दूर तुम्हारे साथ

किसी पहाड़ी के नीचे खेत में

सुनती हूं पसंदीदा गीत

जो गुनगुनाए थे कानों में

सामने शीशे से तुम ही

देखते हो मेरी चुस्त पोशाक

‘बड़ी सुंदर हो तुम’

कानों में फुसफुसाते हो

जिंदा रहते हुए

जन्नत दिखाते हो तुम 

अब यह तुम हो या हम

कहना है मुश्किल क्योंकि

तुम्हारा वज़ूद हमारे वज़द में

थोड़ा घुल सा गया है!!!!!




नीलम जैन की कविता “गुरू”

करुणा का भंडार गुरु
सुखों का आधार गुरु
ज्ञान का विस्तार गुरु
तेरी महिमा अपार गुरु

जीवन के उद्धारक गुरु
ज्ञान के प्रसारक गुरु
अंधकार के विनाशक गुरु
आदर्शों के विचारक गुरु

देते मृदुवाणी मुस्कान गुरु
बनाते नींव पर मकान गुरु
भरकर स्नेह ,ममता से
भरते प्रेम का भंडार गुरु

देते सपनों को आकार गुरु
हौसलों में भर देते उड़ान गुरु
पहुँचा कर हमें मजिलों तक
नहीं माँगते हमसे सम्मान गुरू

नीलम जैन
प्र.वि. रजवारा, ब्लाक -बिरधा
ललितपुर




प्रेम काव्य प्रतियोगिता में शामिल करने हेतु ।।

        “अधखुली आंखों वाली”

सुनिए..
जीवन दर्शन में
रिश्तों के अहमियत पर
क्या ख्याल है आपका..
क्या सच में..
एक स्नेह पूर्ण जीवन जीने के लिए
रिश्तों के विभिन्न आयामों के
उपर गहन विमर्शोंपरांत ही 
इस डोर में बंधा या बांधा जाता है
नहीं..
कभी – कभी तो मूक संबंध भी
एक ठोस रिश्ता में परिवर्तित हो जाता है
और वक्त के साथ वो रूहानी हो जाता है
नैसर्गिक रूप से प्रस्फुटित रिश्ता 
ज्यादा प्रबल होता है
जहां दैहिक आकर्षण गौण हो जाता है
देखिए..
मुझे रिश्तों को नाम के दायरे में 
समेटने में घबराहट होती है
क्योंकि अक्सर देखा है इसे
टुटते हुए, बिखरते हुए या बदलते हुए
माना कि मैनें आपको
स्वामी के रूप में स्वीकार किया है 
और यह नश्वर देह समर्पित है 
पर सुनिए.. 
संबंध दर्शन के परिधि से निकल कर
मुझे सिर्फ असीम निश्छल प्रेम चाहिए 
जो पल्लवित – पुष्पित होता रहे 
इस धरा पर यूं हीं चिर काल तक..
बड़ी ही सहजता से समझा गई
प्रेम दर्शन में स्पर्श, स्पंदन और समर्पण  
वो अधखुली आंखों वाली लड़की ।।

  • डॉ. अजय कुमार