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भारत की बेटी

    भारत की बेटी

 

 

  हम भारत की बेटी हैं

  समझो न किसी से कम

पर्वत से ऊंची उड़ान हमारी…

 हम नहीं घबराती

 राहें चाहे कितनी भी

  हों मुश्किल

पीछे मुड़कर हम नहीं देखती

बस आगे ही बढ़ते जाती

हम भारत की बेटी हैं।

 

हम जननी

ममता की मूरत भी हम

माँ-बाप का अभिमान हम

पति की हिम्मत हम

बच्चों की पहली गुरु

रिश्तों की मजबूत

डोर भी हमसे

भारत का कल भी हम

देश का गौरव भी हम

हम भारत की बेटी हैं।

 

इतिहास गवाह है,

देख भारत-बेटी की वीरता

दुश्मन ने भी

शीश झुकाया है

दुर्गा, चंडी भी हम

त्याग और बलिदान की

मूरत भी हम

हम भारत की बेटी हैं।

 

वक़्त आन पड़ा फिर

उम्मीद छोड़ दूसरों से

ख़ुद-से कदम बढाने का

चूड़ियां उतार, तलवार उठाने का

हर बेटी के साथ

हुए अन्याय

का न्याय मांगने का..

वक़्त आन पड़ा फिर

औरत की ताक़त का

दुनिया को बताने का..

हम भारत की बेटी हैं।

स्वरचित, मौलिक, सपना

 

 

 

 




प्रेम

     प्रेम

 

माँ-बाप का प्रेम

जग में सबसे अनमोल

बच्चों की छोटी छोटी खुशियों में

ढूँढें जो अपनी ख़ुशी

उनकी खुशियों के लिए छोड़ दें

जो अपनी सारी खुशियां।

 

कभी बन जाते गुरु हमारे

कभी बन जाएँ दोस्त

अच्छे बुरे का पाठ सिखाते

दुनिया की बुरी नज़र से हमें बचाते।

 

प्रेम का मतलब हमें सिखलाते

अपनेपन का एहसास करवाते

दूर रहने पर भी

जो हर दम रहते

पास हमारे।

 

बिना कुछ बोले

मन की बात समझ लेते

रिश्तों की मजबूती का

राज हमें बतलाते।

 

दर्द में देख हमें

आँसू उनकी आंखों से बहें

बावजूद मुश्किल से लड़ना सिखलाते

ख़ुद को भूल

ध्यान हमारा रखते

जल्दी हो जाऊं ठीक

प्रार्थना ईश्वर से करते

देख यह त्याग

प्रेम से साक्षात हम होते…

समझ आता बिना प्रेम

जीवन हमारा निरर्थक

जैसे बिन पानी मछली का जीवन।

 

स्वार्थ से ऊपर है प्रेम

जीवन का आधार है प्रेम

नित् नित् बढ़ता ही जाए

ऐसा स्पर्श है प्रेम…

सबसे करो प्रेम

ऐसा पाठ वह हमें

  सिखलाते।

 

…जीवन का अस्तित्व ही

जुड़ा प्रेम से

प्रेम से ही दिल

जीता जा सकता सबका

जब आपके पास शेष

कुछ नहीं बचता

ऐसे कठिन समय में

जो आस जगा दे

ऐसा, माँ-बाप का अनमोल प्रेम!

हम पढ़ -लिख कर

कुछ बन पाएं

…जीवन में

खानी न पड़े ठोकर

बस इतनी सी ख्वाहिश उनकी

ऐसा, माँ-बाप का प्रेम!

 

    स्वरचित, मौलिक,  सपना