राष्ट्रीय बालिका दिवस पर समर्पित कविता – “बेटी”
बेटी
मैं भी बेटी हूँ किसी की
हर बेटी का सम्मान करती हूँ
बेटी है स्वाभिमान किसी का
जो जाकर पराये घर,
उस घर को, परिवार कोो अपनाती है
जन्म देती, जीवन को,संस्कारों को
धन-धान्य से परिपूर्ण घर परिवार सजाती है
बेटी लक्ष्मी है घर की
बेटी पाना,बेटी होना सौभाग्य मेरा
बेटियाँ कलंक नहीं जीवन का
ये तो काला टिका है घर का
जो बुरी नजर से बचाती है
बेटियाँ हर घर की थाती है तू कब समझेगा, नादान यही रुप देवी का यही तेरा वितान
पिंकी ‘हरि’ भार्गव
कराला
उत्तर पश्चिम, दिल्ली