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महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता शीर्षक मां दिनांक 2 जनवरी 2021

मां,,,,,

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मां चंदा की चांदनी ,मां सूरज की धूप।।

वक़्त पड़े ज्वालामुखी ,वक्त़ पड़े जल रूप।।

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सरिता मां की नम्रता, इसमें इतना प्यार।।

जीवन भर टूटे नहीं, जिसकी अविरल धार।।

3,,,,

मां शाला मां है गुरू, मां जीवन आधार।।

पौधा मां के प्यार में, वृक्ष बने छतनार।।

4,,,,

मां मीरा की पीर है,मां कबीर का सत्य।।

मां ईश्वर की प्रार्थना, तुलसी का साहित्य।।

5,,,

मां गीता का सार है, मां है वेद पुरान।।

मां है पावन बाइबिल,मां में हर ईमान।।

6,,,,,

मां में तीरथ धाम सब, मां अटूट विश्वास।।

मां के चरणों में हुआ,जन्नत का आभास।।

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बृंदावन राय सरल सागर एमपी

मोबाइल 7869218525

12/1/2021