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भारत को स्वर्ग बनाना है।

आज हमें भारत को स्वर्ग बनाना है,
अपने श्रम की बूंदों से सजाना है।

चलें राष्ट्र के गौरव को बढ़ाने हम,
आओ तोड़ दें सभी स्थूलता का ये भ्रम,
नहीं रहेगा भारत अब कोई मोहताज,
चलो दिखा दें दुनिया को अपना दमख़म।
विश्वपटल पर भारत को छा जाना है,
अपने श्रम की बूंदों से सजाना है।

हम जिस दिन भाई-भाई बन जाएंगे,
तब ही सच्चे देशभक्त कहलाएंगे,
जात-पात और सम्प्रदाय के विष को तज,
एकता का प्रेम राग सब गाएंगे।
फिर से उस स्वर्णिम युग को दोहराना है,
अपने श्रम की बूंदों से सजाना है।

हम सब की मेहनत एक दिन रंग लाएगी,
चहुंओर सुख समृद्धि छा जाएगी,
होगा सारा राष्ट्र मुक्त सब रोगों से,
तभी बात ‘बापू’ की सच हो पाएगी।
भारत को ‘निर्मल भारत’ बनाना है,
अपने श्रम की बूंदों से सजाना है।

आज हमें भारत को स्वर्ग बनाना है,
अपने श्रम की बूंदों से सजाना है।