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श्रीमती ज्योति मिश्रा की नई कविता ‘ भारत के कवियों की गाथा’

क्रौंच पंक्षी के आहत से

शीकरूणा हुई तरंगित ।।

वाल्मीकि के मुख से

पद्य काव्य सृजित ।।

नेत्रों में लिए दया भाव

बसी करूणामयी छवि।

मिले जगत को सर्वप्रथम

वाल्मीकि मुनि आदिकवि।।

राजाओं के आश्रित रहकर

करते उनका नित गुणगान ।

वीरों की विरुद्घावली गाते

युद्ध,शौर्य,वीरगाथा महान।।

राम-कृष्णमय कवियों की

निर्मल भक्ति की धारा।

कबीर,तुलसी,सूर,जायसी

इनको जाने सब संसारा ।।

मीराबाई, रहीम,रसखान

रचे कृष्णमय अद्भुत काव्य।

नित भक्ति में रहते लीन

पुष्टिमार्ग कवि अष्टछाप।।

नारी का सौंदर्य और प्रकृति

किया खूब नख-शिख वर्णन ।

लिए काव्य में गहन भावना

रीति कवि बिहारी महान ।।

प्रसाद, पंत,निराला जी

यह है,छायावादी स्तंभ

महादेवी की नारी गरिमा

करती नवयुग का आरंभ ।।

प्रसाद की ‘कामायनी’

गुप्त जी की’ साकेत’।

केशव को कहते सदा

कठिन काव्य का प्रेत।।

स्वतंत्रता के समरागंण में

हुई लेखनी की पैनी धार।

अंग्रेजी हुकूमत ने भी

मानी इनके आगे हार।।

राजनीति,कुरीति, नारी

देशप्रेम और उत्साह ।।

नई कविता, प्रगतिशीलता है

काव्य का अविरल प्रवाह ।।

ओजस्विता लिए वीरता

अमर शहीदों की गाथा।

इस अज्ञानी लेखनी से

भारतीय कवियों की गाथा।।

श्रीमती ज्योति मिश्रा की नई कविता ‘ भारत के कवियों की गाथा’ नई कविता, सम्पादन: रेखा रानी, हिसार