बेचारी बन्नी की मम्मी
बेचारी बन्नी की मम्मी
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सुबह से रात हो जाती है,
लगी रहती है,
अपने घर को सजाने में,
बच्चे जो है बिगड़ैल,
उन्हे सँवारने में।
वह रोज अपने दो कमरे के घर में,
सेण्ट छिटकती है,
कोने-कोने- को चमकाती है,
सारे सोफा, तकिया करीने से लगाती है,
और वह बच्चा, जो आठवी में पहुँच कर भी,
शब्दों को पढ़ नहीं पता,
उसे पुचकारती है,
झिड़क देता है वह अपनी माँ को,
जैसे वह, उसकी नौकरानी हो,
सायं को अपने घर में अगरबत्ती जला कर,
जैसे किसी देवता के आने की इंतज़ार करती है,
पति घर आता है,
हुलास कर जाती है पति के पास,
जुटी रहती है, उसके तीमारदारी में,
एक मिनट के लिये भी दूर नहीं जाती उससे,
क्या पता, कब क्या माँग ले वे,
बैठी रहती है,
तब तक, जब तक,
वह अपने पान मशाला भरे मुंह से,
उसके घर की और उसकी हालत,
पहले जैसा करके पैर पसार के सो ना जाये,
फिर अगले दिन वही कहानी,
कुछ दर्द जीवन में घुल कर जिंदगी जैसे ही लगने लगते है ना ?@ Manoranjan Kumar Tiwari