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बिना तेरे

तेरा हो जाऊँ

तेरा हो जाऊँ

तेरी बाहों के सिरहाने पे, सर रख कर सो जाऊँ ।
तेरे हसीं खाबों में हमेशा के लिए गुम हो जाऊँ ।।

हम भी बड़े बेताब हैं,तेरे दिल में रहने को;
तू प्यार से बुला मुझे,मैं अंदर तभी तो आऊँ ।

तुझे हक़ से दुनिया वालों से माँग ही लूँगा;
बस, पहले ज़माने की नजर में कुछ हो जाऊँ।

हर वक्त मेरे ही ख़्याल पैदा हो तेरे ज़हनो-दिल में; तेरी यादों में अहसासों के कुछ मीठे बीज बो जाऊँ ।

अब तो दिन-रात यही फ़रियाद करता है ‘दीप;
ता क़यामत तू मेरी हो जाए ,मैं तेरा हो जाऊँ।

तेरी बाहों के सिरहाने पे, सर रख कर सो जाऊँ ।
तेरे हसीं खाबों में हमेशा के लिए गुम हो जाऊँ ।।

    संदीप कटारिया (करनाल, हरियाणा)