प्रेम काव्य प्रतियोगिता/नैन
प्रेम काव्य प्रतियोगिता
कविता-नैन
नैन मेरे मिले पिय के नैंन से
पिय हो गए मेरे मैं तो हो गई पिय की,
आई ऐसी विपदा पिय गए परदेस
नैंसी मेरे आंसू ढ़रै
नहीं आया कोई संदेश,
मैंने मेरे पिय बसे
घरी -घरी आए उनकी यादें,
नैन से मेरे उतरे नहीं
बसी है नैन में उनकी काया,
कब तक रहोगे परदेस में
मेरे प्यारे परदेसी पिया,
अब तो धैर्य की राह छूटै
कब तलग लौटोगे पिय मेरे
नैन मेरे मिले पिय के नैन से
पिय हो गए मेरे मैं हो गई पिय की।
स्वरचित मौलिक रचना
श्रीमती मार्गरेट कुजूर
सीएमपीडीआई कॉलोनी धर्मजयगढ़ जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़,
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