नव वर्ष
जो बीत गया उसे भूल जाये
जो आ रहा उसे अपनाये
हालांकि जाते जाते बहुत रूलाया
कईयों को अपनो से बिछड़ाया
दुख तकलीफ की बढ़ाई छाया।
पर,
जीना भी वो सिखलाया
एकता और भाईचारा बढ़ाया
संयम और संवेदना बढाया
बढ़ाई प्रकृति की मोहक छाया
शुद्धता और सुंदरता लौटाया।
और,
जाते जाते दे गई कुछ नसीहतें
सीखा और समझा गई कुछ बाते
प्रकृति के साथ ही चलना
ताकत उसकी कम ना आंकना
प्रगति के पथ पर बढ़ते रहना
प्रकृति का हाथ भी पकड़े रहना
संयम और संतुलन बनाये रखना।
आशा से आकाश थमा है
आशा से विश्वास जमा है
आशा से काल घुमा है
आशा से काल टला है
आशा से ही सृष्टि चला है।
स्वागत है नव वर्ष
फैलाओ चहुओर हर्ष
प्राप्त हो सबको उत्कर्ष।
दुख,पीड़ा, विषाद के अंधेरे से सब उबरे
सुख, हर्ष और खुशी के प्रकाश से सब निखरे
एकता, संयम और जीवटता से बढ़ते रहना
बस यही है, इस नव वर्ष की शुभकामना।