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देश भक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता

“देश भक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता” हेतु

 

साष्टांग नमन तुमको करती,

शत बार नमन तुमको करती।

मिट्टी से इसकी तिलक करूं,

मैं देश नमन तुमको करती ।।

        माथे का मुकुट हिमालय है,

        सागर पद प्रक्षालन करता,

        जीवन अमृत नदियां इसकी,

        गंगा कल कल छल छल बहती।। 

                          मै देश नमन तुमको करती ….

यह वीर प्रसूता धरती है,

वीरों को जन्मा करती है,

राणा का रक्त शिराओं में,

अरिदल पर विद्युत बन गिरती ।।

                         मै देश नमन तुमको करती….

शक हूण मिटे इस धरती से,

गोरी गजनी भी धूल मिले,

पश्चिमी सुनामी लौट गई,

पूंजीपति बर्बरता मिटती ।।

                       मै देश नमन तुमको करती….

घोर निशा अब बीत चली है,

नवल ज्योति अब फूट चली है,

किरणों के कर खोले कपाट,

अब मुक्त हुई अपनी धरती ।।

                        मै देश नमन तुमको करती….

चिर पावन नूतन बीज लिए,

मनु नौका प्लावन पार हुई,

हम विजय गीत गाते बढ़ते,

यह रैन अंधेरी है मिटती ।।

                        मै देश नमन तुमको करती …

                        

   पूर्णतः स्वरचित मौलिक                     

गीता सिंह “शंभु सुता”

व्यवसाय..गृहणी